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ट्रंप के पैनल में दो पूर्व 'जिहादियों' को दी गई जगह, एक ने तो लश्कर के कैंप में ट्रेनिंग ली है

Jihadists in White House Panel: इन दो 'जिहादियों' के नाम हैं- इस्माइल रॉयर और शेख हमजा यूसुफ. इन पर आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं. एक तो 13 साल तक जेल की सजा भी काट चुका है.

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शेख हमजा यूसुफ और इस्माइल रॉयर को व्हाइट हाउस के प्रमुख सलाहकार बोर्ड में नामित किया गया. (AP Photo)
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रवि सुमन
18 मई 2025 (अपडेटेड: 18 मई 2025, 03:06 PM IST)
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अमेरिकी सरकार ने वाइट हाउस पैनल में दो पूर्व 'जिहादियों' (Jihadists in Trump Panel) को जगह दी है. इनमें से एक पर आरोप है कि उसने साल 2000 में पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' के कैंप में ट्रेनिंग ली थी. और वो कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में भी शामिल था. इसमें भारतीय इलाकों में गोलीबारी भी शामिल है.

13 साल जेल में बिताए

इनमें से एक का नाम इस्माइल रॉयर है. ‘पूर्व जिहादी’ रॉयर आतंकवाद से संबंधित आरोपों में 13 साल तक जेल की सजा काट चुका है. वाइट हाउस ने उसे ‘धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ के 'एडवाइजरी बोर्ड ऑफ ले लीडर्स' में नियुक्त किया है. 2003 में रॉयर पर आंतकवाद के आरोप लगे. कहा गया कि वो अमेरिका के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश में शामिल था. उसने ‘अल-कायदा’ और ‘लश्कर-ए-तैयबा’ जैसे आंतकी संगठनों की सहायता की. वो रॉयर ही है जिस पर आरोप लगे हैं कि उसने साल 2000 में लश्कर के ट्रेनिंग कैंप में भाग लिया.

2004 में उसने खतरनाक हथियारों और विस्फोटकों के इस्तेमाल में सहायता करने का दोष स्वीकार कर लिया. उसे 20 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन उसने 13 साल ही जेल में बिताए. ये बातें अमेरिकी सरकार की सरकारी वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं.

"पागलपन भरा फैसला"

जैतुना कॉलेज का को-फाउंडर शेख हमजा यूसुफ भी सलाहकार बोर्ड की सूची में है. लारा लूमर के अनुसार, यूसुफ पर इस्लामिक जिहादियों और प्रतिबंधित आतंकी समूहों से संबंध होने के आरोप हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लारा लूमर एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट और इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट भी हैं. उन्होंने रॉयर की नियुक्ति को ‘पागलपन’ बताया है.

ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) माइक वाल्ट्ज को हटाने के पीछे का एक बड़ा कारण लारा लूमर को ही माना जाता है. 

ये भी पढ़ें: ट्रंप को Apple का ये जवाब अच्छा नहीं लगेगा! कंपनी से बोले थे कि भारत में iPhone ना बनाओ

वाइट हाउस ने क्या कहा?

वाइट हाउस के बयान के अनुसार, रॉयर वर्तमान में ‘इस्लाम एंड रिलीजियस फ्रीडम एक्शन टीम’ का डायरेक्टर है. उसने 1992 में इस्लाम धर्म को अपनाया. वाइट हाउस ने दावा किया है कि रॉयर ने धर्मों के बीच शांति को बढ़ावा देने के लिए कई संगठनों के साथ काम किया है.

शेख हमजा यूसुफ के बारे में कहा गया है कि वो बर्कले के ‘ग्रेजुएट थियोलॉजिकल यूनियन’ में ‘सेंटर ऑफ इस्लामिक स्टडीज’ का सलाहकार है. 

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