बिल्डिंग का नाम BR आम्बेडकर करने के लिए प्रोटेस्ट किया था, कोर्ट ने मेवानी को 6 महीने की सजा सुनाई
जिग्नेश मेवानी के साथ 18 और लोगों को सजा सुनाई गई. हालांकि, 17 अक्टूबर तक इस सजा पर रोक रहेगी.

गुजरात (Gujarat) के दलित नेता और निर्दलीय विधायक बने जिग्नेश मेवानी (Jignesh Mevani) को साल 2016 के एक मामले में छह महीने की सजा सुनाई गई है. अहमदाबाद की अदालत ने मेवानी के साथ-साथ 18 अन्य लोगों को भी छह महीने की सजा सुनाई है. इन सभी ने मिलकर साल 2016 में एक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय की लॉ बिल्डिंग का नाम बदलकर डॉ. बीआर आम्बेडकर के नाम पर रखने की मांग की गई थी.
इस मामले में कुल 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, इस बीच एक शख्स की मौत हो गई थी और बाकी के 19 लोगों को 16 सितंबर को छह महीने की सजा सुनाई गई है. हालांकि, फिलहाल के लिए इस सजा पर रोक लगा दी गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पीएन गोस्वामी ने 17 अक्टूबर तक के लिए सभी आरोपियों की सजा पर रोक लगा दी है, ताकि वो इसके खिलाफ अपील दायर कर सकें. जज ने सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया है.
जिग्नेश मेवानी का जवाबजिग्नेश मेवानी ने खुद ट्वीट कर इस मामले की जानकारी दी है. उन्होंने कहा,
'अहमदाबाद के मेट्रोपोलिटन कोर्ट द्वारा मेरे सहित 19 आरोपियों को 6 महीने की सजा सुनाई गई है. साल 2016 में गुजरात यूनिवर्सिटी के कानून भवन का नाम बाबा साहब आम्बेडकर भवन रखने की मांग के साथ रोड ब्लॉक करने का यह मामला है. आंदोलनकारियों को सजा और बलात्कारियों को रिहाई.'
इससे पहले अहमदाबाद की एक जनसभा में जिग्नेश मेवानी पर हमला करने का मामला सामने आया था. मेवानी ने आरोप लगाया था कि गुजरात के पूर्व गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा के लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में उनपर हमला किया था. बकौल मेवानी, ये हमला अहमदाबाद के वस्त्रल क्षेत्र में हुआ था.
मेवानी ने इस घटना के संबंध में ट्वीट कर कहा था,
'सवाल ये है कि जब एक विधायक के सामने कोई ऐसी गुंडागर्दी दिखा रहा हो, वो सामान्य परिस्थितियों में न जाने क्या करता होगा. उसका यह भी दावा है कि पुलिस उसकी जेब में है. ऐसे असामाजिक तत्वों पर काबू करना गुजरात पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि इन गुंडों को बीजेपी सरकार का पूरा संरक्षण मिला हुआ है.'
इस घटना के दौरान मेवानी के अलावा कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन हितेंद्र पिठादिया वहां मौजूद थे.
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