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सोरेन सरकार को एक साल होने वाले हैं, पत्थलगड़ी से जुड़े केस का क्या हुआ?

हेमंत सोरेन सरकार ने पहली कैबिनेट में पत्थलगड़ी से जुड़े केस वापस लेने का फैसला किया था.

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सीएम हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार ने पहली कैबिनेट मीटिंग में पत्थलगड़ी आंदोलन से जुड़े केस वापस लेने का फैसला किया था. (फाइल फोटो)
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डेविड
11 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 11 दिसंबर 2020, 03:34 PM IST)
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पिछले साल दिसंबर में जब झारखंड में सरकार बदली तो सीएम हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार ने पहली कैबिनेट मीटिंग में एक बड़ा फैसला लिया. यह फैसला पत्थलगड़ी आंदोलन से जुड़ा था. पहली कैबिनेट में पत्थलगड़ी आंदोलन से जुड़े सभी केस वापस लेने का फैसला लिया गया. इस फैसले को एक साल होने वाले हैं लेकिन सरकार ने अब तक केस वापस लेने का अनुरोध कोर्ट को नहीं भेजा है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, झारखंड जनाधिकार महासभा की रिपोर्ट के अनुसार, खूंटी, सरायकेला खरसावां, पश्चिम सिंहभूम में पत्थलगड़ी से संबंधित 30 FIR दर्ज की गईं, जिसमें केवल 16 मामलों में जिला समितियों द्वारा वापसी की सिफारिश की गई है. पुलिस ने 200 नामजद और 10 हजार अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था. इसमें राजद्रोह, लोकसेवकों के काम में बाधा पहुंचाना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और आपराधिक धमकी के मामले में केस दर्ज हुआ था. रिपोर्ट के अनुसार जिला समिति जिसमें डिप्टी कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और सरकारी वकील शामिल हैं, ने कुल मामलों में से केवल 60 प्रतिशत मामलों को ही वापस लेने की सिफारिश की है. इसके अलावा, खूंटी जिला समिति ने सात मामलों में से केवल राजद्रोह के आरोपों को हटाने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्थलगड़ी से जुड़े सभी मामलों को वापस लेने की घोषणा सोरेन सरकार ने की थी. इसे रघुबर दास सरकार की विफलता बताया था. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में 76 साल के ठाकुरा मुंडा ने बताया,
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वहीं एक्टिविस्ट सिराज का कहना है,
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सरकार के एक सूत्र ने कहा कि फाइल गृह विभाग में अटकी है और जल्द ही इसे अदालत में भेज दिया जाएगा.

क्या केस है?

झारखंड के खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुछ इलाकों में पत्थलगड़ी कर पारंपरिक ग्राम सभाओं के सर्वशक्तिशाली होने का ऐलान किया गया था. इन पत्थरों पर लिखा था कि ग्राम सभाओं की इजाजत के बगैर किसी बाहरी शख्स का प्रवेश प्रतिबंधित है. जून 2018 में पूर्व लोकसभा स्पीकर कड़िया मुंडा के गांव चांडडीह और पड़ोस के घाघरा गांव में आदिवासियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई. पुलिस फायरिंग में एक आदिवासी की मौत हो गई. पुलिस ने कई जवानों के अपहरण का आरोप लगाया. बाद में जवान सुरक्षित लौटे. इस संबंध में कई थानों में देशद्रोह के मामले में केस दर्ज हुआ था जिसे सोरेन सरकार ने वापस लेने का फैसला किया था.

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