ट्रंप के डिप्टी ने ऐसा क्या कह दिया, जो ब्रिटेन और फ्रांस के आर्मी वाले लाठी लेकर दौड़ पड़े?
JD Vance Controversy: आलोचनाओं के बाद JD Vance ने सफाई दी है. ब्रिटेन और फ्रांस के अधिकारियों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने उनके बयान को अपमानजनक बताया था. ऐसा भी क्या कहा था वेंस ने?

अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance UK France) एक नए विवाद में फंस गए हैं. वेंस ने यूक्रेन में सैनिकों (Ukraine Security) को लेकर एक बयान दिया था. जिसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस के अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने उनकी खूब आलोचना की. इन आलोचनाओं के बीच वेंस ने सफाई भी दी है. कहा है कि उनके बयान में कहीं भी ब्रिटेन और फ्रांस का जिक्र नहीं था. पहले आप वेंस के उस बयान को पढ़िए, जिसके ऊपर विवाद हो रहा है. अमेरिकी उप-राष्ट्रपति ने कहा था,
"अगर आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पुतिन दोबारा यूक्रेन पर हमला ना करें तो अमेरिका के आर्थिक हितों को यूक्रेन के भविष्य के साथ जोड़ना होगा. यही यूक्रेन की सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी होगी. ना कि यूक्रेन में किसी ऐसे देश के 20 हजार सैनिकों को तैनात कर देना, जिन्होंने पिछले 30-40 सालों से कोई युद्ध ही नहीं लड़ा है."
जेडी वेंस के इस बयान को व्यापक स्तर पर ब्रिटेन और फ्रांस के खिलाफ देखा गया. इन दोनों देशों ने यूक्रेन में लगातार अपने सैनिक भेजे हैं और आगे भी ऐसा करते रहने की प्रतिबद्धता जताई है.
JD Vance की आलोचनाअमेरिकी उप-राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ब्रिटेन और फ्रांस के अधिकारियों ने उनकी तीखी आलोचना की. वेंस को याद दिलाया गया कि ब्रिटेन और फ्रांस के सैनिकों ने बीते दशकों में कई लड़ाइयां लड़ी हैं. इनमें इराक और अफगानिस्तान में हुए संघर्ष भी शामिल हैं, जिनमें ब्रिटिश और फ्रेंच सैनिक अमेरिकी सैनिकों के साथ मोर्चे पर थे.
ब्रिटिश नेता जेम्स कार्टलिज ने वेंस को बयान को अपमानजनक बताया. वहीं पूर्व ब्रिटिश रक्षा मंत्री जॉनी मर्कर ने वेंस को एक 'जोकर' कहा. इधर, फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू संसद में बोले कि फ्रांस यह सुनिश्चित करेगा कि उसके सैनिकों का सम्मान हो.
इन आलोचनाओं के बीच वेंस X पर पहुंचे. लिखा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. आगे लिखा,
"मैंने ब्रिटेन या फ्रांस का जिक्र नहीं किया था. पिछले 20 सालों के दौरान इन दोनों देशों के सैनिक अमेरिकी सैनिकों के साथ बहादुरी से लड़े हैं."
वेंस ने आगे कहा कि उन्होंने अपने बयान में दूसरे देश की सेनाओं का जिक्र किया था. ऐसे बहुत से देश हैं, जो यूक्रेन में अपनी सेनाएं भेजने की बात कह रहे हैं और उनके पास ना तो युद्ध का अनुभव है और ना ही हथियार हैं.
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वेंस के बयान को लेकर ये विवाद ऐसे समय खड़ा हुआ है, जब अमेरिका और उसके सहयोगियों के रिश्तों में कड़वाहट पनप रही है. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी विदेश नीति में उल्लेखनीय बदलाव देखा जा रहा है. ट्रंप यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य सहायता देने के पक्ष में नहीं हैं. जिसे लेकर यूरोपीय नेता नाखुश हैं.
पिछले महीने, जर्मनी के म्यूनिख में हुए सुरक्षा सम्मेलन में भी जेडी वेंस ने ऐसा बयान दिया था, जिसे जर्मनी और दूसरे यूरोपीय देशों पर हमले के तौर पर देखा गया था. वेंस ने कहा था कि ये देश अपनी सुरक्षा की गारंटी नहीं ले रहे हैं और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचल रहे हैं.
वीडियो: दुनियादारी: अब यूक्रेन को कौन बचाएगा? ट्रंप ने कौन सी सैन्य मदद रोक दी?

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