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मदरसे नहीं जाना चाहता था लड़का, मां-बाप ने दी ये घटिया सजा

जम्मू के लड़के की तस्वीरें हो रहीं वायरल.

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18 अक्तूबर 2016 (अपडेटेड: 18 अक्तूबर 2016, 08:02 AM IST)
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बचपन में जब स्कूल जाने का मन नहीं होता था तो अक्सर पेट या सिर दर्द होने लगता था. घर वाले कई बार तो छुट्टी कर लेने की बात कह देते थे. पर जब कभी समझ जाते थे कि बहाना कर रहा है तो जबरदस्ती स्कूल भेजा जाता था. कई बार तो बहाना बनाने के लिए पिटाई भी हो जाती थी. पर कभी वो हाथ-पैर बांधकर स्कूल ले जाएं ये नौबत तो नहीं आती थी. बस ऐसे ही बोल देते थे. जिद करने लगो तो अक्सर कह दिया जाता था कि जाने दो, मत जाओ आज. पर जम्मू के पास ही एक जगह है भटिंडी. यहां से child abuse का एक मामला सामने आया है. यहां म्यांमार से आए एक रिफ्यूजी मां-बाप पर अपने 11 साल के बच्चे को जंजीरों से बांधकर रखने का इल्जाम लगा है. कहा जा रहा है वो बच्चे को इसलिए बांधकर रखते थे कि वो मदरसे से भाग न जाए. पुलिस के हिसाब से लड़के के मां-बाप और मदरसे के हेड मौलवी ने ऐसा करना शुरू किया था. मौलवी की पहचान अब्दुल गफूर के तौर पर हुई है. इन लोगों के हिसाब से पहले ये लड़का कई बार मदरसे से भाग चुका था. बाप ने बताया कि जब इस बार वो भागा तो उसकी मां उसे शनिवार को पकड़कर वापस लाई और उसके पांवों में जंजीरें डाल दीं. तबसे वो बच्चा वैसे ही रह रहा था. सोमवार को पास के ही रहने वाले किसी शख्स ने बच्चे की तस्वीर लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी. इसके बाद से वो तस्वीरें वायरल होने लगीं. तब पुलिस ने एक्शन लिया. बच्चे की तस्वीरें सोशल मीडिया, खासकर वाट्सएप पर वायरल हो रही थीं. लड़के को लोकल पुलिस पोस्ट पर ले जाया गया. जहां पर उसकी जंजीरें खोली गईं. और फिर उसे उसके मां-बाप को दे दिया गया. हालांकि इंडियन एक्सप्रेस की खबर के हिसाब से बच्चे को मां-बाप के सुपुर्द करने से पहले पुलिस ने मां-बाप को चेतावनी दी है. और सेक्शन 36 के तहत केस भी दर्ज कर लिया है. मां-बाप का कहना है कि वो करीब 4 साल पहले बांग्लादेश के रास्ते भारत आए थे. और तीन साल पहले वो जम्मू आए, जहां वो नरवल में बस गए. बाप गफूर ने माना, ये एक गलत काम था. पर बच्चा दो बार पहले भी मदरसे से भाग चुका है. इसलिए जब उसकी मां उसे शनिवार को पकड़ कर वापस लाई तो उलेमा उसे मदरसे में भर्ती करने को तैयार नहीं थे. तब इसकी मां ने इसके पांव में जंजीर डाली और उसकी चाभी हमें दे दी. ये मदरसा एक मलिन बस्ती में चलता है. गफूर के हिसाब से इस मदरसे में म्यांमार के रिफ्यूजियों के लिए 160 सीटें हैं. यहां रहने वाले बच्चों के लिए ये लोग आसपास के मुसलमानों और मस्जिदों से चंदा करके पैसे जुटाते हैं. बच्चे की मां ने मान लिया है कि उसने ही बच्चे के पांव में चेन डाली थी. मां ने बताया कि इससे पहले उसे एक सरकारी स्कूल में भर्ती कराया था. वो कभी भी क्लास में नहीं जाता था, इसलिए 6 महीने पहले उसे इस मदरसे में ले जाया गया. जहां रहने की भी फैसिलिटी थी. दो-तीन मंजिल के एक घर में ये मदरसा चलता है. एक दिन जब पास के जंगलों में मौलाना लोग इस लड़के को लेकर लकड़ी बटोरने गए हुए थे. तो लड़का वहीं से भाग गया. अभी लड़के के बाप को इंडिया में रिफ्यूजी का दर्जा भी नहीं मिला है.
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