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  • Jammu Kashmir : Congress leader Saiffudin Soz and Gulam Nabi Azad have given controversial statement on Pakistan and now BJP is attacking while congress is in defensive mode

अभी चुनाव नहीं है, वरना इस एक बयान के बाद कांग्रेस की हार तय थी

बयान कश्मीर से आया है, जो पुराने बयानों से ज्यादा खतरनाक है.

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22 जून 2018 (अपडेटेड: 22 जून 2018, 11:58 AM IST)
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बीजेपी प्रवक्ता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कश्मीर के दो वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं सैफुद्दीन सोज और गुलाम नबी आजाद को उनके बयानों के लिए पाकिस्तान का हिमायती करार दिया है.
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अगर कोई नेता उल्टे सीधे बयान दे और वो नेता कांग्रेस का हो तो हाल फिलहाल उस नेता को मणिशंकर अय्यर कहा जा रहा है. वजह ये है कि मणिशंकर अय्यर अब किसी एक नेता के नाम से ज्यादा मेटाफर के तौर पर इस्तेमाल होने लगा है. और अब ये मेटाफर इस्तेमाल हुआ है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपीए सरकार में केंद्रीय मंंत्री रहे सैफुद्दीन सोज के साथ. और हो भी क्यों न. उन्होंने काम ही ऐसा किया है. बयान दिया है और वो भी कश्मीर को लेकर. उन्होंने कहा है-
'कश्मीर के लोगों की पहली प्राथमिकता आजादी पाना है. वर्तमान स्थिति में कश्मीर की आजादी इससे जुड़े देशों के कारण संभव नहीं है, लेकिन यह जरूर है कि कश्मीर के लोग पाकिस्तान के साथ इसका विलय नहीं कराना चाहते हैं. मैं निजी रूप से कहना चाहता हूं कि कश्मीर के लोगों की पहली प्राथमिकता आजादी है. कश्मीर ना भारत के साथ रहना चाहता है और ना ही यह चाहता है कि पाकिस्तान के साथ इसका विलय कराया जाए. कश्मीर के लोगों के लिए शांतिपूर्ण माहौल ज़रूरी है, जिससे यहां के लोग शांति से रह सकें.'

पूर्व केंद्रीय मंत्री सोज के बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर दूसरा मणिशंकर अय्यर बताया जा रहा है.

अब सोज का मतलब तो साफ है कि कश्मीर के लोग भारत के साथ नहीं रहना चाहते हैं. उन्होंने ये बयान किस आधार पर दिया ये तो वही जानें, लेकिन उनके इस बयान ने एक बार फिर से कांग्रेस की खासी फजीहत करवा दी है. भले ही सोज अब कह रहे हैं कि ये उनका निजी बयान है, लेकिन अब कांग्रेस को उनके बयान पर सफाई देनी पड़ रही है. खुद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने 22 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है-
'जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और आगे भी वह भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहेगा. अगर कोई एक किताब बेचने के लिए 'सस्ते हथकंडे' अपना रहा है तो उससे शाश्वत सत्य नहीं बदल जाता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.'

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सैफुद्दीन सोज के बयान से किनारा कर लिया है. वहीं उन्होंने गुलाम नबी आजाद के बयान को भी सिरे से खारिज कर दिया है.

सुरजेवाला ने कहा-
'सेना या सुरक्षा बल के जवानों की कोशिश होती है कि कोई आतंकवादी या माओवादी न बचने पाए, लेकिन कार्रवाई के दौरान कोई निर्दोष न मरे, इसकी बात करना देशद्रोह कैसे हो जाता है. अलग अलग तरह के लोग अलग-अलग बयान देते रहते हैं, जिसे कांग्रेस पूरी तरह से खारिज करती है.'
वहीं बीजेपी ने हर बार की तरह इस बार भी कांग्रेस नेताओं के बयान पर हमलावर रुख अपनाया है. बीजेपी के प्रवक्ता और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोज के बयान के तुरंत बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा-
'कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए.'
वहीं इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था-
'सैन्य ऑपरेशन में आतंकवादियों से ज्यादा आम लोग मारे जाते हैं. घाटी में हालात बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह ये है कि मोदी सरकार बातचीत नहीं, कार्रवाई करने में यकीन रखती है. ऐसा लगता है कि वे हमेशा हथियार इस्तेमाल करना चाहते हैं. कार्रवाई को ऑपरेशन ऑलआउट कहना बताता है कि वे बड़े जनसंहार की योजना बना रहे हैं.'

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कश्मीर के कांग्रेस के दोनों ही नेताओं पर हमला बोला है और राहुल-सोनिया से जवाब मांगा है.

इसपर भी रविशंकर प्रसाद ने हमला करते हुए कहा-
'कांग्रेस का वो नेता ऐसा बयान दे रहा है जो जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री रह चुका है और जिसने कश्मीर में आतंकवाद के दंश को झेला है. आजाद के बयान का लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन भी समर्थन कर रहे हैं. आजाद सेना चीफ बिपिन रावत और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के शहीद औरंगजेब के घर जाने को ड्रामा बताते हैं. इससे खराब बात और क्या हो सकती है. उनके इस बयान से सबसे ज्यादा खुश पाकिस्तान ही होगा. राहुल जेएनयू में जाकर राष्ट्रविरोधी ताकतों के साथ खड़े हो जाते हैं. सर्जिकल स्ट्राइक पर खून की दलाली का बयान देते हैं.'

कश्मीर पर बयान आने के बाद सुब्रमण्यन स्वामी भी चुप नहीं रहे और सैफुद्दीन सोज को पाकिस्तान जाने की सलाह दे डाली.

इसके अलावा बीजेपी के और भी नेता सैफुद्दीन सोज और गुलाम नबी आजाद के बयान पर हमला बोल रहे हैं. सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा है कि-
'जब सोज केंद्र में मंत्री थे और JKLF ने सोज की बेटी का अपहरण किया था तब उन्हें केंद्र से मदद मिली थी. ऐसे लोगों की मदद करने का कोई फायदा नहीं. अगर कोई परवेज मुशर्रफ को पसंद करता है तो उनका एक तरफ का पाकिस्तान जाने का टिकट कटवा दिया जाए.'
विवादित बयानों के लिए अब मणिशंकर अय्यर का नाम रूपक की तरह इस्तेमाल होने लगा है.
विवादित बयानों के लिए अब मणिशंकर अय्यर का नाम रूपक की तरह इस्तेमाल होने लगा है.

खैर ये सियासत है. होती रहती है. बीजेपी भी करती है और कांग्रेस भी. जब बीजेपी करती है तो चुनाव जीत जाती है, लेकिन जब कांग्रेस करती है तो उसका हाल मणिशंकर अय्यर वाला हो जाता है. मणिशंकर अय्यर ने गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को जाने-अनजाने अपशब्द कहे थे. कांग्रेस ने मणिशंकर अय्यर से पल्ला तो झाड़ लिया, लेकिन नतीजा आया तो कांग्रेस चुनाव हार गई थी. बाकी तो मणिशंकर अय्यर मेटाफर हैं. बयान याद करते रहिए और कांग्रेस की हार की लिस्ट भी. सैफुद्दीन सोज को भी सोचना चाहिए और गुलाम नबी आजाद को भी. कहीं उनका हाल मणिशंकर अय्यर जैसा न हो जाए. और अगर आज की तारीख में चुनाव हो जाएं, तो उस चुनाव का हाल गुजरात के नतीजे जैसा ही होगा.


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