नोटबंदी की वजह से परेशानी हो रही है या नहीं. ये मैं ऑफिस में बैठकर तय करने वालाकौन हूं. सच क्या है, वो तो फील्ड में जाने के बाद ही पता चलेगा. एप का सर्वे बतारहा है कि लोग खुश हैं. इस सर्वे में पता नहीं उन लोगों ने वोट किया है या नहीं, जोकतारों में खड़े हुए हैं. लेकिन इस सच को भी नकारा नहीं जा सकता कि ये नोटबंदी कई कीजान पर भरी पड़ गई. एक और मौत हुई है. नौ साल के बच्चे की. 28 साल के मोहम्मद हारून.उनका बेटा मुनीर दूसरी क्लास में था. बीमार हुआ. इलाज नहीं हो पाया. बाप के पासपैसे तो थे. मगर पुराने थे. दो दिन बैंक की कतार में लगे. नंबर नहीं आया. मजबूरबाप. 30 किलोमीटर दूर हॉस्पिटल. कंधे पर बेटा. और पैदल सफर. हॉस्पिटल तो पहुंच गए.अफसोस... बेटा जिंदा नहीं रहा. बाप के कंधे पर ही दम तोड़ गया. ये दुखद हादसाजम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में शुक्रवार रात हुआ. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिकमामले की सच्चाई पता करने के लिए नायब तहसीलदार कुलदीप राज और गोरां पुलिस पोस्ट केइंचार्ज नानक चंद मोहम्मद हारून के घर सोमवार को पहुंचे और उनका बयान दर्ज किया.सांबा जिले की डीएम शीतल नंदा से जब कॉन्टैक्ट किया गया तो उन्होंने बताया कि हारूनअपने पुराने नोट बदलने बैंक गए था. लेकिन बच्चे की मौत की वजह वह नहीं है. हालांकि,इस मामले में उन्होंने अपने अफसरों से रिपोर्ट मांगी है. दो दिन जिन दो बैंकों कीकतार में हारून खड़े हुए, उन बैंकों के मैनेजर का कहना है कि अगर हारून ने अपनीपरेशानी बताई होती तो उनके पैसे बदल दिए जाते. हारून ने बताया कि मुनीर 14 नवंबर कोबीमार पड़ा था. पहले दिन उसको घर में ही ब्लैक टी और कुछ जड़ी-बूटियां दी गईं. उसकीतबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ. उसके बाद उसे मानसर में डॉक्टर के पास ले जाने काफैसला किया. उस वक्त उनके पास छोटे नोटों में महज 100 से 150 रुपये थे. इसके अलावा29 हजार रुपये की कीमत के 500 और एक हजार के पुराने नोटे थे. इलाज कराने के लिए वेपुराने नोटों को बदलने के लिए आठ किलोमीटर पैदल चलकर खून इलाके में जम्मू-कश्मीरबैंक की ब्रांच पहुंचे. कतार में खड़े हुए. नंबर नहीं आया. क्योंकि वहां काफी लंबीकतार थी. इसके बाद हारून दूसरे दिन सुबह खून से 8-10 किलोमीटर दूर रामकोट गए. अफसोसवहां भी लोगों की भीड़ ज्यादा थी और वहां भी बारी नहीं आ पाई. हारून ने बताया किउनके 100-150 रुपये तीन दिनों में बैंक की ब्रांचों के चक्कर काटने में ही खर्च होगए. 18 नवंबर को मुनीर की ज्यादा हालत खराब हो गई. परेशान मां-बाप बिना देरी किएउसे हॉस्पिटल ले जाना चाहते थे. हारून ने बेटे को कंधे पर उठाया. जंगल के रास्ते सेहोते हुए 9 किलोमीटर पैदल चलके रात के 8 बजे सड़क तक पहुंचे. उनकी बीवी भी साथ थीं.किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया. हारून ने बताया, ‘सड़क पर हमने एक वैन ड्राइवर सेमिन्नत की कि वे हमें मानसर पहुंचा दें, उन्होंने एक हजार रुपये किराया मांगा, हमदेने के लिए राजी थे, लेकिन दिक्कत तब हुई, जब उन्होंने पूछा कि क्या हमारे पासपुराने नोट हैं या नए. मैंने उन्हें 500 और 1000 के पुराने नोट दिखाए तो उन्होंनेहमें ले जाने से मना कर दिया. समझ नहीं आया क्या करें. उनके मना करने के बाद हमनेफैसले किया कि हम लोग अपने बच्चे को पैदल ही छोटे रास्ते से ले जाएंगे.' सुबह पांचबजे हारून एक डॉक्टर के घर पहुंचे. मगर गम का पहाड़ टूट पड़ा. क्योंकि उनके कंधे परअब उनका जिंदा बेटा नहीं बल्कि उसकी लाश थी. डॉक्टर ने चेक किया और बताया मुनीर अबजिंदा नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस को हारून ने फोन पर बताया, 'मोदी ने हमें बर्बादकर दिया. अगर हमारे पास नए नोट होते तो हम हमारे बच्चे को वक्त पर डॉक्टर के पास लेजा पाते और उसकी जिंदगी बचा लेते.'-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंदो हजार का पहला नकली नोट गुजरात से मिला है मितरोंशादी के लिए पैसा निकालने वालों को नई राहत: पर इसका फायदा क्या है?ये कैसी तैयारी, नए नोट आधे छपे हुए निकल रहे हैं एटीएम से!