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जम्मू-कश्मीर: हिजबुल चीफ़ के बेटे समेत 4 की नौकरी गई, आतंकी कनेक्शन का आरोप

जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Jammu Kashmir Government) की निकाले गए कर्मचारियों में बिट्टा कराटे की पत्नी भी शामिल है.

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13 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 13 अगस्त 2022, 07:47 PM IST)
Jammu Kashmir Hizbul Mujahideen Syed Salahuddin
Hizbul Mujahideen का सरगना Syed Salahuddin. (फाइल फोटो)
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जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Jammu Kashmir) ने 13 अगस्त को चार सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. प्रशासन ने आरोप लगाया कि ये कर्मचारी देश की सुरक्षा के लिए खतरा (Security Threat) हैं और इनका आतंकवादी कनेक्शन (Terror Link) है. निकाले गए कर्मचारियों में कश्मीर यूनिवर्सिटी (Kashmir University) का एक प्रोफेसर और एक वैज्ञानिक, कश्मीर प्रशासनिक सेवा की एक महिला कर्मचारी और आईटी मैनेजर शामिल हैं. नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों में पाकिस्तान के हिजबुल मुजाहिद्दीन (Hizbul Mujahideen) प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन (Syed Salahuddin) का बेटा अब्लुद मुईद भी शामिल है. वहीं आतंकवादी बिट्टा कराटे (Bitta Karate) की पत्नी असबाह खान को भी नौकरी से निकाला गया है.

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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 11 महीने में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 40 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है. इनमें से पांच कर्मचारी जम्मू के हैं. बाकी के कश्मीर घाटी से.

Article 311 का इस्तेमाल

जिन वैज्ञानिक को नौकरी से निकाला गया है, उनका नाम डॉक्टर मुहीत अहमद भट्ट है. भट्ट के पास कम्प्यूटर साइंस में पीएचडी की डिग्री है. भट्ट कश्मीर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं. भट्ट को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 का हवाला देकर निकाला गया. इस अनुच्छेद के तहत सरकार अपने कर्मचारियों को बिना किसी स्पष्टीकरण के नौकरी से निकाल सकती है.

असबाह खान जिला पंचायत अधिकारी रही हैं. वो कश्मीर प्रशासनिक सेवा की 2011 बैच की अधिकारी हैं. वो जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के पूर्व मिलिटेंट नेता फारुक अहमद डार की पत्नी हैं. फारुक अहमद डार को बिट्टा कराटे के नाम से जाना जाता है. वो इस समय जेल में है.

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अब्दुल मुईद JKEDI में इनफॉरमेशन टेक्नॉलजी मैनेजर के तौर पर काम कर रहा था. मुईद, सैयद सलाहुद्दीन का बेटा है. मुईद के भाई शाहिद यूसुफ और सैय्यद शकील को पहले ही नौकरी से निकाला जा चुका है.

इधर इन कर्मचारियों को निकाले जाने पर पीपल्स कॉन्फ्रेंस की तरफ से प्रतिक्रिया आई है. पीपल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने कहा कि किसी के बेटे को उसके पिता कामों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक के पास अधिकार हैं. उन्होंने कहा कि रिश्तों का हवाला देकर लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है. ये सही नहीं है. 

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