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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा- दविंदर सिंह को गृह मंत्रालय से कोई वीरता पदक नहीं मिला

DSP दो आतंकियों के साथ गिरफ्तार किए गए थे.

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15 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 15 जनवरी 2020, 07:43 AM IST)
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11 जनवरी को DSP दविंदर सिंह हिज़बुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों और एक वकील के साथ पकड़े गए थे.
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DSP दविंदर सिंह. 11 जनवरी को हिज़बुल मुजाहिदीन के आतंकियों के साथ पकड़े गए थे. पहले कहा जा रहा था कि दविंदर सिंह को गृह मंत्रालय की ओर से वीरता पदक मिल चुका है. अब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस बात से इनकार किया है. पुलिस का कहना है कि इसी नाम के दूसरे अफसर को ये पदक मिला है.
दविंदर सिंह को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम ज़िले के मीर बाज़ार से दो आतंकियों और एक वकील के साथ गिरफ्तार किया गया था. उनकी पोस्टिंग श्रीनगर एयरपोर्ट में थी. फिलहाल वो सस्पेंडेड हैं.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्वीट करते हुए कहा कि दविंदर को गृह मंत्रालय ने नहीं, बल्कि पहले की जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार ने वीरता पदक से सम्मानित किया था. पुलिस का कहना है,
यह स्पष्ट किया जा रहा है कि डीएसपी दविंदर सिंह को गृह मंत्रालय की ओर से वीरता या मेधावी पदक नहीं दिया गया है, जैसा कि कुछ मीडिया संस्थान और लोग लिख रहे हैं. यह पूरी तरह ग़लत है. दविंदर सिंह को स्वतंत्रता दिवस 2018 पर पूर्व की जम्मू-कश्मीर सरकार ने वीरता पदक दिया था. उन्हें पुलवामा ज़िले में 25-26 अगस्त, 2017 में हुए फिदायीन हमले के काउंटर अभियान में हिस्सा लेने के लिए सम्मानित किया गया था. उस वक्त दविंदर पुलवामा पुलिस लाइंस में डीएसपी थे.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि मीडिया को तथ्यों से परे काल्पनिक स्टोरी लिखने से बचना चाहिए. पुलिस ने एक और ट्वीट में कहा,
जम्मू-कश्मीर पुलिस अपने प्रोफेशनलिज्म के लिए जानी जाती है. अगर अपना ही काडर किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल हो, तो उसे भी छोड़ा नहीं जाता है. हम पहले भी ऐसा कई बार कर चुके हैं. इस केस में भी हमने अपने इनपुट के आधार पर अपने अधिकारी को पकड़ा है. जम्मू-कश्मीर आगे भी अपनी आचार संहिता का पालन करती रहेगी, जो कि सभी के लिए समान हैं.
जम्मू-कश्मीर पुलिस के ऑफिशियर हैंडल से शेयर किए गए ट्वीट्स. फोटो: ट्विटर
जम्मू-कश्मीर पुलिस के ऑफिशियर हैंडल से शेयर किए गए ट्वीट्स. फोटो: ट्विटर

ट्विटर पर ही एक यूजर ने 2019 के प्रेसिडेंट पुलिस मेडल की लिस्ट शेयर की. इसमें मेधावी पदक जीतने वालों के नाम हैं. यूजर ने कहा कि 98वें नंबर पर दविंदर सिंह का नाम है. इस पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जवाब दिया, 'प्लीज़, फिर से चेक करें. इसी नाम के शुरुआती अक्षरों से दूसरे अफसर भी हैं.'
वहीं जम्मू-कश्मीर लेफ्टिनेंट गवर्नर के सलाहकार फारूक खान ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस मामले में भी राजनीति कर रहे हैं, जबकि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है. उन्होंने कहा, 'मैं इस मसले पर ज्यादा चर्चा नहीं करना चाहता. हर संस्था में एक ब्लैक शीप होता है, वो (दविंदर सिंह) भी ब्लैक शीप था... लेकिन जम्मू-कश्मीर पुलिस को इसका श्रेय जाना चाहिए कि उन्होंने उसकी पहचान कर पकड़ा और उसकी रची साजिश का पर्दाफाश किया.'
इंदिरा नगर में आलीशान घर
शनिवार, 11 जनवरी को श्रीनगर के इंदिरा नगर में बन रहे दविंदर सिंह के घर पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल इकट्ठे हुए और तलाशी ली. एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'हमें इसका अंदेशा नहीं था कि ऐसा कुछ होगा. बड़ी संख्या में सिक्योरिटी फोर्स यहां आईं. इसके बाद पता चला कि अफसर को गिरफ्तार कर लिया गया है.'
इंडिया टुडे की एक ग्राउंड रिपोर्ट
  
के मुताबिक, श्रीनगर के इंदिरा नगर में 2017 से दविंदर सिंह का आलीशान घर बन रहा है. ये सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता है. इस घर की दीवार बादामी बाग़ में आर्मी के 15 कॉर्प्स हेडक्वार्टर से लगती है.
आतंकियों को पनाह
दविंदर सिंह ने पूछताछ के दौरान बताया कि उन्होंने आतंकियों को कुलगाम से जम्मू और फिर चंडीगढ़ से दिल्ली पहुंचाने के लिए 12 लाख रुपए लिए थे. आईजी कश्मीर, विजय कुमार ने मीडिया से कहा कि खु़फिया सूत्रों ने बताया था कि आतंकवादियों ने गणतंत्र दिवस पर हमले की योजना बनाई थी.
दविंदर सिंह से इंटेलिजेंस ब्यूरो, मिलिट्री इंटेलिजेंस, R&AW और NIA ने पूछताछ की है. ऐसी रिपोर्ट है कि दविंदर ने ये स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने अपने इंदिरा नगर वाले घर में आतंकियों को रखा था.


वीडियो- जम्मू-कश्मीर में डीएसपी दविंदर सिंह दो आतंकियों के साथ अरेस्ट किए गए

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