पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया आतंकी मसूद अजहर के मारेजाने की खबरें आ रही है. अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स अलग-अलग खबर चला रही हैं. कोई कहरहा है कि मसूद अजहर की अस्पताल में मौत हो गई है क्योंकि वो कई दिनों से बीमार चलरहा था. न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक भी जैश सरगना का पाकिस्तान के रावलपिंडी केएक अस्पताल में इलाज चल रहा था. जहां उसका रोज डायलिसिस हो रहा था. अब उसके मारेजाने की खबर चल रही है. हालांकि इस खबर का खंडन पाकिस्तान ने कर दिया है. इंडियाटुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने पाकिस्तान में इस खबर की जानकारी ली जिसके बादइस खबर का खंडन किया गया. राजदीप ने लिखा," पाकिस्तान सरकार में शीर्ष सूत्रों नेबताया है कि मसूद डायलिसिस पर है और मरने की कोई खबर नहीं है. अभी इस पर अपडेट्सआनी बाकी हैं"Top Govt sources in Pakistan refuse to confirm reports that #MasoodAzharDEAD. Claim he has been on daily dialysis. No formal statement yet. More newsupdates when they come..— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) March 3, 2019मरने की खबर कहां से आई?मसूद अजहर की मौत की खबर ट्विटर पर लगातार चल रही है, लोग उसे मारे जाने को लेकरलगातार ट्वीट कर रहे हैं. #MasoodAzharDEAD और #MaulanaMasoodAzhar के हैश टैग केसाथ मसूद की मौत की खबर पहले और तीसरे नंबर पर लगातार ट्रेंड करती रही. दो दिन पहलेन्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने इस बात की जानकारी दी कि मसूद अजहर किडनी की बीमारी की वजहसे काफी बीमार है, और बीमारी की वजह से वो डायलिसिस कराने पाकिस्तान के अस्पातल मेंलगातार जाता रहता है. जिसके बाद उम्मीद यही की जा रही है कि डायलिसिस की खबर के बादसे उसके मारे जाने की खबरें आनी शुरू हो गई.आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ही पुलवामा में हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. जिसकेबाद से ही मसूद अजहर पर कार्रवाई की मांग तेज़ होने लगी. मसूद अजहर ने हीजैश-ए-मोहम्मद की शुरुआत की थी. मसूद अजहर पहले भारत के कैद में था, लेकिन कंधारविमान हाईजैक कांड के बाद उसे दिसंबर 1999 में छोड़ना पड़ा था. इसके बाद मार्च 2000में मसूद अज़हर ने हरकत-उल-मुजाहिदीन को बांटकर जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना की थी.जैश-ए-मोहम्मद बनने की पूरी कहानीसाल 1989. हिंदू कुश की पहाड़ियों में दस साल अटके रहने के बाद आखिरकार सोवियतयूनियन को अपने पैर पीछे खींचने पड़े. सोवियत यूनियन की इस हार को चार दशक लंबे चलेशीत युद्ध का अंत माना गया. अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन से लड़ने के लिए अमेरिकाने इस्लामिक चरमपंथी समूहों को बड़ी मात्रा में आर्थिक और सैनिक मदद दी थी. इसअमेरिकी इमदाद ने दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवादी समूहों को पनपने में काफी मददकी.1989 में सोवियत-अफगान युद्ध की समाप्ति ने अफगानिस्तान में सक्रिय कई सारेकट्टरपंथी समूहों को अपने लिए नई जमीन की तलाश के लिए मजबूर कर दिया. ऐसा ही एकसंगठन था, 'हरकत-उल-मुजाहिदीन. यह अफगानिस्तान में सक्रिय संगठन 'हरकत-उल-जिहाद' सेटूटकर बना संगठन था. 1989 में कश्मीर में शुरू हिंसक अलगाववादी आंदोलन मेंहरकत-उल-मुजाहिदीन सक्रीय संगठन हुआ करता था. 1993 और 1994 का साल में भरतीयसुरक्षा बालों ने HUM की कमर तोड़ दी. नवंबर 1993 में इसके सरगना नसरुल्लाह मंसूरलंगरयाल को भारतीय सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया. इसके अगले साल, फरवरी 1994में HUM के सेक्रेटरी मौलाना मसूद अज़हर और सज्जाद अफगानी भी भारतीय सेना के हत्थेचढ़ गए.1999 में सज्जाद अफगानी को जेल तोड़कर भागते हुए गोली मार दी गई. इसके जवाब में HUMने इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट-814 को अगवा कर लिया. भारतीय सरकार को मजबूर होकरभारतीय जेलों में बंद तीन आतंकियों मौलाना मसूद अज़हर, अहमद उमर सईद शेख और मुस्तफाकअहमद ज़रगर को कंधार जाकर रिहा करना पड़ा. पाकिस्तान लौटने के बाद मौलाना मसूद अज़हरने HUM से अलग होकर अपना अलग संगठन बना लिया. नाम रखा, 'जैश-ए-मोहम्मद'. शाब्दिकअर्थ मोहम्मद की सेना. साल था 2000.1999 में HUM ने काठमांडू से दिल्ली आ रही इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट-814 कोहाईजैक कर लिया था.पहला बड़ा हमला किया अक्टूबर 2001 में. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा पर. इस हमले में 38लोगों की जान गई. इसके दो महीने बाद दिसंबर 2001 में लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकरदेश की संसद पर हमला किया. इस हमले में हमारे 8 जवान शहीद हुए. अक्टूबर 2001 मेंभारत के दबाव के चलते संयुक्त राष्ट्र संघ ने जैश को आतंकी संगठन घोषित कर दिया.दिसंबर 2001 में अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने भी इसे आतंकी संगठन घोषित किया.इसके बाद पकिस्तान ने भी अपने यहां जैश को आतंकी संगठन घोषित कर दिया. यह जनवरी2002 की बात है. यह परवेज मुशर्रफ की भारत यात्रा से ठीक पहले हुआ. जैश ने इसप्रतिबंध का कड़ा प्रतिरोध किया. मार्च 2002 से लेकर सितंबर 2002 तक जैश नेइस्लामाबाद, कराची,मुरी, बहावलपुर में फ़िदायीन हमलों की झड़ी लगा दी. प्रतिबंध लगनेके बाद जैश में दो टुकड़े हो गए. पहला टुकड़ा खुद्दाम-उल-इस्लाम. इसका नेतृत्व मसूदअज़हर कर रहा था. दूसरा टुकड़ा था तहरीक-उल-फुरकान. इसका नेतृव अब्दुल्लाह शाह मजहरकर रहा था. 2003 में पाकिस्तानी सरकार ने खुद्दाम-उल-इस्लाम और तहरीक-उल-फुरकान परभी बैन लगा दिया. इसके बाद अज़हर ने अपने संगठन का नाम बदलकर 'अल-रहमत ट्रस्ट' रखदिया. इस बैन से खार खाए अज़हर ने परवेज मुशर्रफ को भी नहीं बख्शा. 14 और 25 दिसंबर2003 में पाकिस्तानी राष्ट्रपति मुशर्रफ पर इस संगठन ने जानेलवा हमला करवाया.इसके बाद पकिस्तान सरकार ने इस संगठन के खिलाफ क्रेक डाउन शुरू किया. मिलेट्रीइंटेलिजेंस में जैश के समर्थकों को नौकरी से निकाल दिया गया. इनके ठिकानों कोतहस-नहस कर दिया गया. 2004 के क्रेक डाउन के बाद मसूद अज़हर ने पाकिस्तानी सरकार केसाथ समझौता कर लिया और पकिस्तान के भीतर आतंकी गतिविधि रोक दी. हालांकि जैशपकिस्तान में आधिकारिक तौर पर बैन था लेकिन ISI ने इस संगठन को फलने-फूलने मेंपर्याप्त मदद की. 2009 में आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस संगठन ने पकिस्तान केबहावलपुर में साढ़े छह एकड़ में अपना बड़ा सा कॉम्प्लेक्स बना लिया था. यहां आतंकियोंकी ट्रेनिंग लगातार जारी रही. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मसूद अज़हर ने एक सभामें धमकी दी थी कि उसके पास 300 आत्मघाती हमलावर तैयार हैं. अगर नरेंद्र मोदी भारतका प्रधानमंत्री बनते हैं तो वो भारत पर हमला बोल देगा.25 दिसंबर 2015 को नरेंद्र मोदी ने लाहौर जाकर पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री नवाज़ शरीफसे मुलकात की. इसने जैश को नाराज कर दिया. इसके ठीक सात दिन बाद इस संगठन नेपठानकोट एयर बेस पर हमला कर दिया.सितंबर 2016 में हुए उड़ी हमले भी इस संगठन का नामआया था. हालांकि आधिकारिक तौर पर जैश ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी. मौलानामसूद अज़हर जैश का संस्थापक है. हलांकि अब वो इस संगठन के लिए परदे के पीछे से कामकरता है. फिलहाल मसूद अज़हर का भाई अब्दुल रऊफ असगर इस संगठन का सरगना है. रऊफ 1999में इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट-814 के अपहरणकर्ताओं में से एक था. रक्षा जानकारजैश-ए-मोहम्मद को कश्मीर में सक्रीय सबसे खतरनाक आतंकी संगठन मानते हैं.