पुलिस रिमांड से बचने के लिए नकली घायल बनकर रिटर्न हुए विधायक पुत्र
निर्दलीय विधायक के निर्दयी बेटे ने 3 लोगों को अपनी BMW से कुचल दिया. अब कानून से बचने का जुगाड़ कर रहा है.
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Image: ANI
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हाथ में पावर, कंधे पर सत्ता का हाथ और काबिल वकील का साथ. ये सब हो तो कानून को नागिन डांस कराना कतई मुश्किल नहीं. यही साबित करने की कोशिश कर रहे हैं जयपुर के विधायक नंदकिशोर महारिया. अपने करामाती कुलदीपक सिद्धार्थ को बचाने के लिए एकदम चौकस चालें चल रहे हैं. लेटेस्ट ये है कि उन्होंने अपने बेटे को 'घायल' कर दिया है.
केस ये है कि नंदकिशोर फतेहपुर, जिला सीकर, राजस्थान से विधायक हैं. उनके बेटे सिद्धार्थ के पास BMW कार है. दारू पीकर फुल स्पीड में चलाई. एक ऑटो को टक्कर मार दी. जिसमें तीन लोग मर गए. फिर एक पुलिस वैन से टकराए. उसमें तीन पुलिस वाले घायल हो गए. पुलिस ने इनको दबोच लिया. जांच हुई तो पता लगा पीकर चला रहे थे.
शनिवार को इंडिया टुडे टीवी पर सिद्धार्थ का इंटरव्यू चल रहा था. दो दिन की रिमांड के बाद लोकल कोर्ट में पेशी हुई. वहां भी चिहुकते हुए पहुंचे जिल्लेइलाही. वहां से निकले भी मौज लेते हुए. लेकिन फिर कोर्ट ने पूछताछ के लिए पुलिस की रिमांड तीन दिन और बढ़ा दी. बस यहीं कांड हो गया.
अब लेटेस्ट अपडेट ये है कि
इतना एक्सपीरिएंस्ड ड्राइवर खोज लाने वाले नंदकिशोर विधायक जी का वकील दीपक चौहान भी थ्योरी बता रहा है. कि पुलिस ने लड़के का मेडिकल तो कराया, लेकिन इलाज नहीं कराया. इसलिए भर्ती कराना पड़ा. कोर्ट के बाहर ड्राइवर हंसी ठट्टा कर रहा है. ड्राइवर सीट के एयर बैग पर खून के धब्बे हैं. लेकिन ड्राइवर के जिस्म पर नहीं. वो सिद्धार्थ के जिस्म पर हैं. कह रहे हैं कि पुलिस और चश्मदीद सब झुट्ठे हैं. अब समझ जाओ पूरा गणित. निर्दलीय विधायक के निर्दयी बेटे का केस कोर्ट कानून के हाथ में है.
शनिवार को इंडिया टुडे टीवी पर सिद्धार्थ का इंटरव्यू चल रहा था. दो दिन की रिमांड के बाद लोकल कोर्ट में पेशी हुई. वहां भी चिहुकते हुए पहुंचे जिल्लेइलाही. वहां से निकले भी मौज लेते हुए. लेकिन फिर कोर्ट ने पूछताछ के लिए पुलिस की रिमांड तीन दिन और बढ़ा दी. बस यहीं कांड हो गया.
अब लेटेस्ट अपडेट ये है कि
सिद्धार्थ सवाई मानसिंह अस्पताल में अट्टी पट्टी बंधवा के पड़ा है. फुल टू घायल के गेटप में. और उनके पापा ने कोर्ट में अपना ड्राइवर पेश कर दिया है. ये ड्राइवर महाराष्ट्र के कमला नेहरू नगर का रहने वाला है. पप्पा बता रहे हैं कि गाड़ी मेरा बेटा नहीं, ये ड्राइवर चला रहा था. ड्राइवर भी गंगाजली उठा रहा है कि हां हुजूर, मैं ही चला रहा था गाड़ी. मुझसे एक्सीडेंट हुआ है. मेरा रोज का यही काम है. मैं मुंबई में भी तमाम एक्सीडेंट कर चुका हूं.
इतना एक्सपीरिएंस्ड ड्राइवर खोज लाने वाले नंदकिशोर विधायक जी का वकील दीपक चौहान भी थ्योरी बता रहा है. कि पुलिस ने लड़के का मेडिकल तो कराया, लेकिन इलाज नहीं कराया. इसलिए भर्ती कराना पड़ा. कोर्ट के बाहर ड्राइवर हंसी ठट्टा कर रहा है. ड्राइवर सीट के एयर बैग पर खून के धब्बे हैं. लेकिन ड्राइवर के जिस्म पर नहीं. वो सिद्धार्थ के जिस्म पर हैं. कह रहे हैं कि पुलिस और चश्मदीद सब झुट्ठे हैं. अब समझ जाओ पूरा गणित. निर्दलीय विधायक के निर्दयी बेटे का केस कोर्ट कानून के हाथ में है.
