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ईरान ने क्लस्टर बम वाली मिसाइल दागी, देखकर इजरायल हैरान, चीन और रूस कर रहे सप्लाई?

क्लस्टर का हिंदी में मतलब होता है, गुच्छा या समूह. यानी, इसे छोटे-छोटे बमों का गुच्छा भी कह सकते हैं. इन बमों को किसी रॉकेट, मिसाइल या आर्टिलरी शेल में भरकर बंद कर दिया जाता है. संभव है कि रूस और चीन उसे ऐसे बम सप्लाई कर रहे हैं जो एक तरह से गेमचेंजर साबित हो सकते हैं.

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israeli officials said iran attacked with cluster bombs on tel aviv with ballistic missile
क्लस्टर बमों के इस्तेमाल को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं (PHOTO-United Nations)
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मानस राज
5 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 01:17 PM IST)
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इजरायल-ईरान की जंग के बीच एक अलग तरह के बम का नाम सामने आया है. इजरायली अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान ने उन पर 'क्लस्टर बम' से हमला किया है. उन्होंने कहा कि ईरान से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल में क्लस्टर बम का इस्तेमाल किया गया है. युद्ध और तनाव में बमों का इस्तेमाल होना कोई नई बात नहीं है. लेकिन क्लस्टर बम वो हथियार है जिनका इस्तेमाल हमेशा सवालों के घेरे में रहता है. आरोप है कि ईरान को ये बम चीन और रूस ने दिए हैं. 

इस बम को समझने के लिए एक मूवी का जिक्र करते हैं. साल 2008 में आई मूवी आयरन मैन का शुरुआती सीन. टोनी स्टार्क अमेरिकी फौज को अपना नया हथियार 'जेरिको मिसाइल' का डेमो दिखाने जाता है. मिसाइल हवा में जाती है, और फिर उससे कई सारे छोटे-छोटे टुकड़े निकलते हैं. जैसे ही वो टुकड़े जमीन पर गिरते हैं, वैसे ही जबरदस्त धमाका होता है. इस बम से तबाही तो होती है, मगर एक साथ कई जगहों पर. वैसे सारे धमाके एक साथ हों इसकी भी गारंटी नहीं है. क्योंकि पहले भी कई बार इस बम का इस्तेमाल हुआ जिस दौरान सारे क्लस्टर नहीं फटे. जब बम के मलबे की सफाई चल रही थी उस दौरान धमाका हुआ. टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक हालिया संघर्ष में ईरान ने तेल अवीव पर क्लस्टर बम से हमला किया हैै.

कैसे काम करता है?

क्लस्टर का हिंदी में मतलब होता है, गुच्छा या समूह. यानी, इसे छोटे-छोटे बमों का गुच्छा भी कह सकते हैं. इन बमों को किसी रॉकेट, मिसाइल या आर्टिलरी शेल में भरकर बंद कर दिया जाता है. इसको इस तरह डिजाइन किया जाता है कि खोल बीच हवा में ही फट जाए. इन्हें जमीन से, या हवा से टारगेट करके गिराया जा सकता है. खोल के फटते ही उसके अंदर भरे बम दूर-दूर तक काफी बड़े एरिया में फैल जाते हैं. इसके जरिए काफी बड़े इलाके को एक बार में ही निशाना बनाया जा सकता है.

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हालांकि, सारे बम एक साथ नहीं फटते. वे किसी मुलायम सतह या दलदल वाली जगह पर गिरते हैं तो पड़े रहते हैं. जिन बमों में तुरंत विस्फोट नहीं होता, उन्हें डड् (Not Dead) कहते हैं. क्लस्टर बमों के मामले में डड् रेट यानी तत्काल में नहीं फटने वाले बमों की दर काफी ज्यादा होती है. अगर 100 बम गिरे तो उनमें 15-20 बम डड् साबित होते हैं. यानी, उनके कभी किसी और मौके पर फटने की आशंका बनी रहती है. कई दफा ये बम तब फटते हैं, जब युद्ध खत्म हो चुका होता है. ऐसी स्थिति में बेगुनाह नागरिकों के मारे जाने का डर बना रहता है. 

चीन-रूस कर रहे मदद?

इस जंग में क्लस्टर बम की एंट्री से एक सवाल उठ रहा है. सवाल ये कि आखिर ईरान के पास ये हथियार आया कहां से? और जवाब है ईरान के दो सहयोगी देश, रूस और चीन. ये दोनों देश भले ही जंग में सीधे तौर पर ईरान का साथ नहीं दे रहे, लेकिन बयानों से ये साफ है कि वो ईरान को डिप्लोमैटिक सपोर्ट दे रहे हैं. रही बात हथियारों की तो ईरान के पास एक से बढ़कर एक बैलिस्टिक मिसाइल्स पहले से मौजूद हैं. उसे जरूरत है तो बस विस्फोटकों/बमों की जिन्हें मिसाइल में लगाया जा सके. इसलिए संभव है कि रूस और चीन उसे ऐसे बम सप्लाई कर रहे हैं जो एक तरह से गेमचेंजर साबित हो सकते हैं. और ऐसा ही हथियार क्लस्टर बम है.

वीडियो: दुनियादारी: इजरायल-ईरान जंग के बीच बदले ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के बोल, क्या कहा?

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