इजरायल को लेकर JDU ने दिखाए सख्त तेवर, कहा- 'भारत रोके हथियारों की सप्लाई...'
JDU Leaders on Israel Palestine Conflict: इजरायली सेना के हमलों में फिलिस्तीन का गाजा शहर पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. इस पूरे जंग में केंद्र सरकार की भूमिका लेकर विपक्षी पार्टियों के साथ साथ NDA की सहयोगी JDU के प्रवक्ता ने भी सवाल उठाए हैं.

इजरायल और हमास (Israel Hamas War) के बीच जंग लंबे समय से जारी है. इस युद्ध में फिलिस्तीन का गाजा शहर (Attack on Gaza) पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. इस पूरे जंग में भारतीय सरकार की भूमिका लेकर विपक्षी पार्टियां लगातार हमलावर रही हैं. कई विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार से इजरायल को मदद ना पहुंचाने की बात कही है. अब नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार की सहयोगी पार्टी JDU ने भी विपक्षी पार्टियों के सुर में सुर मिलाए हैं.
JDU प्रवक्ता केसी त्यागी ने केंद्र सरकार से इजरायल को गोला-बारूद ना मुहैया कराने की मांग की है. उन्होंने ये मांग दिल्ली में फिलिस्तीन नेता मोहम्मद मकरम बलावी से विपक्षी सांसदों की मुलाकात के बाद कही. केसी त्यागी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि जनता पार्टी के समय से ही हम फिलिस्तीन का समर्थन करते हैं. भारत सरकार, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी फिलिस्तीन का समर्थन करते थे. त्यागी ने आगे कहा कि वो चाहते हैं कि गाजा में बूढ़े, बच्चों, महिलाओं और मासूमों पर अत्याचार रुके.
25 अगस्त को फिलिस्तीन नेता से विपक्षी दलों के नेताओं की इस मुलाकात में जेडीयू नेता केसी त्यागी ने शामिल होकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा. इस बैठक में सपा के राज्यसभा सांसद जावेद अली खान से लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली, सपा के लोकसभा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी, पूर्व सांसद और राष्ट्रवादी समाज पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद अदीब, आप सांसद संजय सिंह, आप विधायक पंकज पुष्कर, कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल शामिल थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक फिलिस्तीनी नेता से मुलाकात के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया. जिसमें केसी त्यागी समेत बाकी नेताओं के भी सिग्नेचर थे. इस संयुक्त बयान में कहा गया कि इजरायल की तरफ से गाजा में किए जा रहे नरसंहार में भारत कतई भागीदार नहीं हो सकता है, इसलिए उसे इजरायल को गोला-बारूद की आपूर्ति नहीं करनी चाहिए. बयान में आगे कहा गया कि इजरायल की तरफ से जारी यह क्रूर हमला न केवल मानवता का अपमान है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय और शांति के सिद्धांतों का भी घोर उल्लंघन है.
इस संयुक्त बयान में आगे कहा गया कि भारत को इस बात पर गर्व है कि वह 1988 में फिलिस्तीन को मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश था. भारत ने फिलिस्तीनी लोगों की संप्रभुता और मुक्ति के अधिकार का लगातार समर्थन किया है.
दरअसल, भारत में इजरायल के पूर्व राजदूत डेनियल कार्मन (Daniel Carmon) ने दावा किया था कि हमास से युद्ध के दौरान भारत, इजरायल को शायद इसलिए हथियारों की सप्लाई कर रहा है, क्योंकि करगिल युद्ध के समय इजरायल ने भारत की सहायता की थी.
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बताते चलें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया था. इस हमले में तकरीबन 1200 लोगों की मौत हुई थी. वहीं कई लोगों को हमास ने बंदी बना लिया. इसके बाद से इजरायल ने हमास के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले जारी रखे हैं. इन हमलों की वजह से गाजा शहर पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. इस पूरे विवाद में भारत ने काफी बैलेंस बनाए रखा है. भारत ने जहां हमास की तरफ किए गए हमले की निंदा की, वहीं इजरायल से भी मानवाधिकारों का हवाला देते हुए गाजा में हो रहे हमले को रोकने को अपील की.
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