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भारत ने क्यों नहीं किया गाजा में इजरायली हमले रोकने का समर्थन? विदेश मंत्री ने बताई वजह

इजरायल-हमास युद्ध और गाजा में युद्ध विराम पर UN के प्रस्ताव पर भारत के मतदान नहीं करने के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत खुद आतंकवाद से बहुत ज्यादा पीड़ित है. ऐसे में हमें आतंकवाद पर एक जैसा रुख बनाए रखने की जरूरत है.

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30 अक्तूबर 2023 (पब्लिश्ड: 09:47 AM IST)
EAM S. Jaishankar said India take strong position on terrorism becuase we are big victims of it.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर मध्यप्रदेश चुनाव से पहले राजधानी भोपाल के टाउन हॉल में अपनी बात रख रहे थे. (फोटो क्रेडिट - एएनआई)
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इजरायल-हमास युद्ध (Israel Hamas War) के बीच आतंकवाद पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर भारत दूसरे देशों पर असर डालने वाले आतंकवाद को गंभीर नहीं मानता है तो हमारे देश की कोई विश्वसनीयता नहीं होगी.

विदेश मंत्री का ये बयान तब आया है, जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में गाजा में युद्ध विराम के प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बना ली थी. भारत की तरफ से कहा गया कि उसने इस मतदान से इसलिए दूरी बनाई क्योंकि इस प्रस्ताव में हमास के आतंकवादी हमलों की निंदा नहीं की गई थी. न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक,  विदेश मंत्री मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक टाउन हॉल में अपनी बात रख रहे थे. वे विधानसभा चुनावों से पहले राज्य पहुंचे. यहां उन्होंने आतंकवाद पर एक जैसा रुख अपनाने पर भी जोर दिया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा,

"आज एक अच्छी सरकार और मजबूत शासन अपने लोगों के लिए खड़ा है. जिस तरह घर में सुशासन जरूरी है, वैसे ही विदेशों में भी सही फैसला लेना जरूरी है. हम आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हैं क्योंकि हम खुद आतंकवाद से बहुत ज्यादा पीड़ित हैं."

एस. जयशंकर ने आगे कहा,

"अगर हम कहते हैं कि 'जब आतंकवाद हम पर असर डाले तो ये गंभीर है, लेकिन जब किसी और के साथ आतंकवादी घटना हो तो वो गंभीर नहीं है', ऐसे में हमारी कोई विश्वसनीयता नहीं रहेगी. हमें आतंकवाद पर एक जैसा रुख अपनाने की जरूरत है."

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कनाडा के प्रस्ताव के साथ भारत  

भारत ने UN में जॉर्डन के प्रस्ताव पर मतदान नहीं किया. इसमें गाजा में इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष को तुरंत रोकने की बात कही गई थी. इसमें हमास के आतंकवादी हमलों की निंदा नहीं की गई थी. इसे इजरायल-फिलिस्तीन संकट पर UN महासभा के आपातकालीन विशेष सत्र में अपनाया गया.

जॉर्डन के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव के पक्ष में 120 और विपक्ष में 14 मत पड़े. वहीं, 45 देशों ने इस प्रस्ताव पर मतदान नहीं किया. इनमें भारत, आइलैंड, पनामा, लिथुआनिया और ग्रीस जैसे देश शामिल हैं. हालांकि, भारत ने कनाडा के उस प्रस्ताव का साथ दिया, जिसमें हमास के आतंकवादी हमलों की निंदा की गई थी.

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भारत ने इजरायल-हमास युद्ध में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों के मारे जाने पर गहरी चिंता जताई. भारत ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने और हिंसा से बचने का आग्रह किया है. UN में भारत की डिप्टी पर्मानेंट रिप्रजेंटेटिव योजना पटेल ने इस विशेष सत्र में कहा,

"भारत बिगड़ते सुरक्षा हालातों और संघर्ष के बीच नागरिकों के मारे जाने पर बहुत चिंतित है. इलाके में संघर्ष बढ़ने से मानवीय संकट और गहरा होगा. सभी पक्षों के लिए यहां जिम्मेदारी से काम करना बेहद जरूरी है."

UN महासभा ने फिलिस्तीन में फंसे नागरिकों के लिए पर्याप्त मात्रा में लगातार और बिना किसी रोक-टोक के लाइफ सेविंग सप्लाई और सुविधाएं भेजने के प्रावधान की भी मांग की. इजरायल और हमास के बीच 7 अक्टूबर से चल रहे युद्ध में करीब 8,000 फिलिस्तीनियों ने जान गंवाई है. वहीं, 7 अक्टूबर को हमास के हमलों में 1400 से ज्यादा इजरायलियों की मौत हुई थी.

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वीडियो: IB की थ्रेट रिपोर्ट में ऐसा क्या मिला कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की सुरक्षा बढ़ा दी गई?

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