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क्या दाढ़ी बनवा लेने से जान बच जाएगी?

दुनिया भर के आतंकवादियों के लिए ये सबसे बुरी खबर है.

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फोटो - thelallantop
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ऋषभ
2 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 20 मार्च 2018, 05:03 AM IST)
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मोसूल. इराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर. रक्का के बाद ISIS के आतंकवादियों की सबसे प्यारी जगह. इसी शहर की मस्जिद में बगदादी ने सबसे पहले खुद को इस्लाम का खलीफा घोषित किया था. इसी शहर में इराक के 20 हजार सैनिक हजार आतंकवादियों के सामने हथियार छोड़कर भागे थे. 2014 में. और तब से इसी शहर के तेल कुएं आतंकवादियों को पाल-पोस रहे हैं.
पर अब बाजी पलट गई है. आतंकवादी सिर मुंडा रहे हैं. दाढ़ी छिलवा रहे हैं. कपड़े बदल रहे हैं. काले लंबे कपड़ों की जगह इंसानों वाले कपड़े पहन रहे हैं. क्योंकि शहर से भागना है उनको. इराक के सैनिकों के हाथ नहीं आना है. क्योंकि 17 अक्टूबर से इराक की सेना ने मन बना लिया है आतंकवादियों को उखाड़ फेंकने का. इराकी सैनिक धीरे-धीरे शहर को कब्जे में ले रहे हैं.
दो सालों में आतंकवादियों ने यहां के लोगों को मजबूर किया है दाढ़ी बढ़ाने के लिए. बाल भी एक खास स्टाइल में रखने थे. जिसमें वेस्ट हेयर कट नजर नहीं आना चाहिये. बार्बर समुदाय को तो बैन कर दिया था. कई बार्बर तो क्लेम कर रहे हैं कि दाढ़ी बनाना ही भूल गए हैं.
अमेरिका और कुर्द सेनाओं के सपोर्ट से गोलियों की गूंज अब मोसूल शहर के अंदर भी सुनाई दे रही है. दस लाख लोग रहते हैं यहां. 5 हजार आतंकवादी हैं. इन लोगों ने जनता को ही अपना ढाल बना लिया है. उनको ही आगे कर देते हैं. पर इराकी सैनिक मुस्तैद हैं. चारों ओर से घेरने का प्लान है. शहर की मुख्य जगहों से सेना 7-8 किमी ही दूर है.
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क्या है मोसूल की कहानी?

इराक एक ऐसा देश बन चुका है, जहां के आतंकवादियों के बारे में तो हर जगह के लोग जानते हैं, पर ये नहीं जानते कि सद्दाम के मरने के बाद वहां सरकार भी है. पहले नूरी अल मलिकी के नेतृत्व में. अब हैदर अल अबादी के. इस सरकार ने ISIS के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की है. मोसूल शहर में. जो इराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. तेल के कुएं हैं यहां. इसकी आबादी है 15 लाख. यहां पर ISIS के 5 हजार लड़ाके हैं. खबर आ रही है कि ये लोग सिविलियन लोगों को इराकी सेना के सामने खड़ा कर लड़ रहे हैं. लगभग हजार लोग शहर छोड़कर पास के सीरिया देश में भाग गये हैं. इस शहर को जीतना इराक की सरकार के लिये बहुत जरूरी है क्योंकि 2014 में इसी शहर से ISIS के मुखिया अबू बकर अल बगदादी ने इस्लामिक स्टेट बनाने का ऐलान किया था.
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पर ऐसा नहीं था कि सेना बगदादी से डर के ही भाग गई थी. मोसुल में सुन्नी आबादी है. जबकि बगदाद में शिया अधिकारी हैं. तो ये अलग लफड़ा था. बगदादी को इसी वजह से यहां सपोर्ट था. फिर नेता तो नेता ही होते हैं. प्रधानमंत्री लोग भी सबका साथ, सबका विकास नहीं कर पाये थे. सुन्नी अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे थे. उसके बाद आतंकवादियों ने मार-काट मचा दी थी. सुन्नी भी शहर छोड़ के भागने लगे थे. जो रुक गये, बड़ी मुश्किल में थे.
मोसूल का मतलब है लिंक. जो एक जगह को दूसरी जगह से जोड़ता है. हजार साल पहले ये अपने कॉटन के लिये फेमस था. जिसे मुस्लिन कहते थे. बाद में ये शहर चंगेज खान के नाती हलाकू खान के चंगुल में आया था. फिर ओटोमन साम्राज्य में भी आय़ा. उसके बाद ब्रिटिश राज में इराक देश बनने के साथ उसमें चला आया. तब तक ये तेल, कॉटन, सीमेंट के लिये फेमस हो चुका था. और ये इस्लामिक भी नहीं था. इसमें कई समुदाय रहते थे. कुर्द, तुर्कमेन, अस्सीरियन और शिया-सुन्नी तो थे ही.
सद्दाम के वक्त ही स्थिति वैसी ही रही. पर अमेरिका के हमले के बाद खराब हो गई. इस शहर में अल-कायदा, कुर्द लड़ाके, सद्दाम की पार्टी के सारे अमेरिका के खिलाफ लड़ रहे थे. उस वक्त सारे देशभक्त बने पड़े थे. पर ISIS के आने के बाद स्थिति फिर बदल गई. कुछ दिन तो किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है. क्योंकि ये ग्रुप बिल्कुल ही अलग था. ये लोग उस इस्लाम की बात कर रहे थे जो इनको भी नहीं पता था. जॉर्डन के एक गुंडे जरकावी के शुरू किये हुये इस ग्रुप ने इस्लामी राज की नई इबारत लिखनी शुरू की. जिसमें नियम हमेशा चेंज होते रहते था.
जून 2014 में इन लोगों ने मोसूल पर कब्जा कर लिया. इनका डर इतना था कि 800 आतंकवादियों के सामने 20-25 हजार की सेना हथियार छोड़ के भाग गई. फिर यहीं पर ISIS ने शरिया के नाम पर राज करने का ऐलान किया और अपना नाम बदल कर इस्लामिक स्टेट रख लिया. मोसूल की फेमस मस्जिद में बगदादी कई सालों के बाद पहली बार लोगों के सामने आया.
फिर औरतों पर पाबंदी लगनी शुरू हुई. सिगरेट पीना बंद कराया गया. चोरी के इल्जाम में हाथ काटे जाने लगे. लोगों के घरों में घुस नियम-कानून बनने लगे. मोसूल के हजार साल पुराने कल्चर को तोड़ा जाने लगा. हेरिटेज बिल्डिंगें तोड़ी जाने लगीं.
दो साल बाद अब इराकी सेना ने कलेजा दिखाया है. पर पता चल रहा है कि आतंकवादियों ने भी पूरा इंतजाम किया है. सुरंगें खोदी हैं. माइंस बिछाई हैं. कार बम तैयार किये गये हैं. सिविलियन लोगों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.


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