अगर नोटबंदी देश के लिए 'वर्ड ऑफ़ द इयर' था, तो दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा चर्चितशब्द शायद 'पेटीएम' रहा होगा. दुकानदारों, चायवालों से लेकर सब्जी वालों तक, हर जगहलोग पेटीएम से पैसे लेने लगे. कई लोगों ने ये आरोप लगाए कि कैशलेस होने का सबसेज्यादा भला तो पेटीएम को हुआ है. अरविंद केजरीवाल ने ये सवाल भी उठाया कि फैसलामोदी का है, पूरी देश में कैश की कमी है और पेटीएम का भला हो रहा है. 'प्रधानमंत्रीजी, डील क्या है? इधर नोटबंदी का फैसला आया और उधर पेटीएम के इश्तेहारों से हमारेदिन-रात लद गए. सुबह उठकर अखबारों में दिखा, टीवी पर दिखा. रेस्टोरेंट को खानेमंगाने के लिए फ़ोन किया, तो जवाब आया परेशान न हों, पेटीएम से पैसे दे दें. IRCTCने कहा पेटीएम से टिकट बुक करो, कैब वालों ने बोला पेटीएम से पेमेंट करोगे तो 25रुपये का डिस्काउंट मिलेगा. कुल मिलकर मोदी अगर अर्थव्यवस्था को 'कैशलेस' करने केलिए 2 कदम चले, तो तीसरे कदम से पेटीएम उनके साथ हो लिया. जिस ई-वॉलेट में रोजहजारों करोड़ रूपये जमा होने लगे, वो रातों-रात दिन दूनी रात चौगुनी कमाई करने लगा,ये कहना अतिशयोक्ति न होगा कि पेटीएम के CEO विजय शेखर शर्मा 37 की उम्र में देश केसबसे अमीर और मशहूर व्यवसाइयों में से एक हो गए. अकेले दिसंबर 2016 में पेटीएम के 8करोड़ एक्टिव यूजर थे. विजय शेखर शर्मा का एक सक्सेस पार्टी में रिकॉर्ड हुआ वीडियोख़बरों में आ रहा है. जिसमें वो अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को बुरा भला कह रहेहैं. किसी का नाम लेकर नहीं, बस जोश में: हमने कुछ सोचा और साला दूसरों की पैंटगीली नहीं हुई तो क्या सोचा? विजय शेखर शर्मा को कुछ वेबसाइट्स ने अभद्र बोलते हुए एक बुरा व्यक्ति भी बताया है.हालांकि मुझे वीडियो को ध्यान से देखने पर कुछ भी उत्तेजक या अभद्र नहीं लगता. इसवीडियो को 'ऑफिस चाय' नाम के एक ग्रुप ने अपलोड किया था. 15 की उम्र में स्कूल छोड़कॉलेज शुरू करने वाले विजय 37 की उम्र में करोड़ों की कंपनी के मालिक हैं. येआश्चर्य की तो बात नहीं है कि वो अपनी जीत का जश्न मनाते हुए जरा बहक गए. लगभग 15सालों तक माइक्रोसॉफ्ट के CEO रहे स्टीव बाल्मर भी इसी तरह स्टेज पर चीखते, नाचतेगाते थे. अपनी कंपनी में काम करने वालों में उत्साह भरते हुए उनके कई स्टेज वीडियोइसी तरह वायरल हुए हैं. https://www.youtube.com/watch?v=I14b-C67EXY