प्रोन पोजीशन से ऑक्सीजन लेवल बेहतर करने में कब, कैसे और कितनी मदद मिलती है?
देश में ऑक्सीजन की कमी की खबरों के बीच ये पोजीशन चर्चा का विषय बनी हुई है.
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि Prone Position से ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने में थोड़ी मदद मिलती है और कोविड 19 के गंभीर मरीजों को इस पोजीशन पर किसी मेडिकल एक्सपर्ट की निगरानी में ही रखा जाना चाहिए (पहली फोटो एक कॉमन प्लेटफॉर्म और दूसरी फोटो वायरल वीडियो से ली गई है.)
कोरोना वायरस. यह शब्द डर, दुख, त्रासदी और वेदना का पर्यायवाची बन चुका है. इस वायरस ने जिस महामारी को जन्म दिया है, उसे पिछले 100 साल की सबसे भयंकर महामारी बताया गया है. इस स्वास्थ्य संकट के कारण हमारे देश के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. हर दिन ढाई-ढाई लाख मामले सामने आ रहे हैं. औसतन एक से डेढ़ हजार लोग दम तोड़ रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि देश की सांस को किसी ने जकड़ लिया है. कोविड 19 के गंभीर मरीज एक अदद ऑक्सीजन सिलेंडर (Oxygen Cylinder) और वेंटिलेटर बेड के लिए तड़प रहे हैं. कइयों को बहुत जुगाड़ से ही यह मेडिकल सुविधाएं मिल पा रही हैं. ज्यादातर हलकान हैं. इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है.
बेंगलुरू में मेडिकल ऑक्सीजन सिलिंडरों को एक जगह इकट्ठा करता वर्कर. इस समय पूरे देश में ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. (फोटो- पीटीआई)
प्रोन पोजीशन से ऑक्सीजन बढ़ने का दावा इस वीडियो में प्रोन पोजीशन (Prone Position) की बात हो रही है. दावा किया जा रहा है कि इस पोजीशन की प्रैक्टिस करने से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ जाती है. इस बारे में हम आपको आगे बताएंगे. लेकिन उससे पहले हम कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों की जरूरी बातें आपको बताते हैं.
ICMR के डीजी डॉक्टर बलराम भार्गव ने 19 अप्रैल को कहा था कि कोरोना वायरस की पिछली लहर के मुकाबले इस दूसरी लहर में ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है. ऑक्सीजन को लेकर पीएम मोदी ने भी 21 अप्रैल को दिए गए राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कुछ बातें कहीं. उन्होंने कहा कि देश के अनेक हिस्सों में ऑक्सीजन की डिमांड बहुत बढ़ गई है और इसके लिए बहुत तेजी और पूरी संवेदनशीलता के साथ काम किया जा रहा है. केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, प्राइवेट सेक्टर, सभी की पूरी कोशिश है कि हर जरूरतमंद को ऑक्सीजन मिले.
अब हम फिर से वापस उस वायरल वीडियो पर आते हैं. यह वीडियो अंकित चौधरी नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने डाला है. इसमें एक शख्स ऑक्सीमीटर के साथ बता रहा है कि कैसे प्रोन पोजीशन के जरिए शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है. वीडियो की शुरूआत में वो बताता है कि जब वो पीठ के बल लेटा था, तो उसके शरीर में ऑक्सीजन सैचुरेशन 94 यूनिट था. इसके बाद जब उसने प्रोन पोजीशन अपनाई यानी पेट के बल लेटा, तो यह लेवल पांच यूनिट बढ़कर 99 तक पहुंच गया. इस आधार पर शख्स ने दावा किया कि कोविड-19 से बीमार मरीज इस प्रैक्टिस के जरिए अपने शरीर में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ा सकते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट? हमने इस दावे को लेकर विशेषज्ञों से बात की. पूछा कि क्या वाकई में प्रोन पोजीशन से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है? अगर हां, तो ऐसा किस तरह होता है? इसे किसी मेडिकल एक्सपर्ट की निगरानी में करना जरूरी है या नहीं? आदि.For those who are having oxygen saturation level around 90
Pronal or Ventilator breathing. See the amazing results. Hats off to the person who made this video pic.twitter.com/mNcnkFepLm
— Ankit Chaudhary (@entrepreneur987) April 19, 2021
इन सवालों के जवाब के लिए हमने नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के स्लीप एंड चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर पीपी बोस से बात की. डॉक्टर बोस ने हमें बताया कि प्रोन पोजीशन का यूज काफी सालों से मेडिकल साइंस के क्षेत्र में हो रहा है, लेकिन यह सिर्फ मेडिकल एक्सपर्ट की निगरानी में किया जाता है. कोविड मरीजों के संदर्भ में उन्होंने बताया-
"कोविड से गंभीर रूप से बीमार मरीजों के फेफड़ों की जो कोशिकाएं होती हैं, वायरस उन्हें नुकसान पहुंचाता है. इन्हें बंद कर देता है. इससे ऑक्सीजन के आदान-प्रदान में दिक्कत होती है. ऐसे में ऑक्सीजन देने के दूसरे तरीके अपनाए जाते हैं. जब यह तरीके काम नहीं करते. तब कहीं जाकर डॉक्टर प्रोन पोजीशन में मरीज को रखते हैं. लेकिन इसके साथ ही ऑक्सीजन देने के दूसरे तरीके जारी रहते हैं. प्रोन पोजीशन से फेफड़ों की कोशिकाओं को थोड़ा सा फायदा पहुंचता है."हमने उनसे ये भी पूछा कि प्रोन पोजीशन काम कैसे करती है? उन्होंने बताया-
"लंग्स के अलग-अलग हिस्से होते हैं. इन हिस्सों में कई कोशिकाएं निष्क्रिय पड़ी रहती हैं. इसे डॉक्टरी भाषा में फिजियोलॉजिकल लंग्स डेड स्पेस कहा जाता है. प्रोन पोजीशन से यह होता कि निष्क्रिय पड़ी कोशिकाएं काम करने लगती हैं. इनका हिस्सा करीब 25 फीसदी होता है. दूसरा यह है कि सांस छोड़ते वक्त फेफड़ों की कोशिकाएं आपस में चिपक जाती हैं. प्रोन पोजीशन इनके चिपकने के टाइम को घटाती है. इससे यह कोशिकाएं बेहतर काम करती हैं. तीसरी बात यह कि इस पोजीशन से लंग्स की इलास्टिक प्रॉपर्टी बेहतर हो जाती है. इससे कोशिकाएं थोड़ा सा और खुल जाती हैं. अब क्योंकि वायरस ने इन कोशिकाओं को बंद किया होता है, तो इनके खुलने से थोड़ा तो फायदा होता ही है."डॉक्टर पीपी बोस ने यह भी बताया कि प्रोन पोजीशन मेडिकल साइंस का हिस्सा है और इसे गंभीर कोविड मरीजों के लिए यूज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर यूज नहीं किया जाना चाहिए. आप इस पोजीशन के भरोसे घर पर नहीं बैठ सकते. खासकर तब, जब हालत लगातार बिगड़ती जा रही हो. अगर थोड़ी देर की बात है कि आधे-एक घंटे में आपको ऑक्सीजन मिलने वाली है या फिर वेंटिलेंटर बेड पर शिफ्ट किया जाना है, तो उतनी देर के लिए यह पोजीशन अपनाई जा सकती है. लेकिन सही तरीका यही है कि यह पोजीशन किसी मेडिकल एक्सपर्ट के निगरानी में अपनाई जाए. वे ही तय करेंगे कि कितने अंतराल पर और कितनी देर तक मरीज को इस पोजीशन में रखना है.
हमने इस पोजीशन के बारे में थोड़ी और रिसर्च की. इसमें हमें जाने माने मेडिकल जर्नल 'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' की एक स्टडी के बारे में पता चला. इस स्टडी में मरीजों के दो ग्रुप की तुलना की गई है. बताया गया कि जिन मरीजों ने प्रोन पोजीशन अपनाई उनके शरीर में ऑक्सीजन का लेवल, इस पोजीशन को ना अपनाने वाले मरीजों के मुकाबले थोड़ा सा ज्यादा रहा. साथ ही स्टडी में यह भी बताया गया कि सांस से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे जिन मरीजों पर जितनी जल्दी और जितने लंबे समय तक ये पोजीशन अप्लाई की गई, उनकी मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई. देश में ऑक्सीजन के आंकड़े क्या हैं? चलते-चलते बात ऑक्सीजन की भी कर लेते हैं. जैसा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है. ऐसे में कुछ आंकड़े जानना जरूरी है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में 9,294 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया. यह तब किया जब देश में कोरोना की दूसरी लहर आने की आशंका थी. वहीं इससे पहले वाले वित्त वर्ष में इसकी लगभग आधी यानी 4,502 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का ही निर्यात किया गया था.

कोरोना वायरस संकट के बीच PM Modi ने ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम करने की बात कही है. (फोटो- पीटीआई)
इतनी ज्यादा ऑक्सीजन का निर्यात करने के बाद अब सरकार 50 हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन का आयात करेगी. इसके लिए विदेश मंत्रालय को संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया है. हालांकि, कोरोना वायरस महामारी के बीच कौन सा देश ऐसा करने के लिए तैयार होगा, यह देखने वाली बात होगी. इसी तरह पिछले साल केंद्र सरकार ने देश भर के सरकारी अस्पतालों में 162 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की बात कही थी. इन प्लांट का अभी कोई अता पता नहीं है. इस बात की तस्दीक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के 18 अप्रैल, 2021 के उस ट्वीट से होती है, जिसमें कहा गया गया है कि सरकार ने 162 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमति दे दी है. मतलब यह कि अभी तक इस दिशा में कोई काम शुरू नहीं हुआ था.

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