ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की तस्वीर जलाकर लड़कियां सिगरेट क्यों सुलगा रही हैं?
इन तस्वीरों को बीते दो हफ्तों से ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों की सबसे प्रभावशाली और याद रह जाने वाली तस्वीरों में से एक माना जा रहा है.
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7 सितंबर 1968 की शाम अमेरिका के अटलांटिक सिटी में मिस अमेरिका प्रतियोगिता अपने पूरे शबाब पर थी. कैमरों की रोशनी, तालियों की गूंज और अपने सपनों की उड़ान को जीती-मुस्कुरातीं लड़कियां. लेकिन उसी वक्त, इस चमक-दमक से कुछ ही दूरी पर एक अलग ही तस्वीर उभर रही थी. यहां सैकड़ों महिलाएं जमा थीं. उनके हाथों में तख्तियाँ थीं. आवाज़ में गुस्सा और आंखों में वो बेचैनी, जो बरसों से भीतर दबी हुई थी. ये कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं था. ये अमेरिका में उभरते Women’s Liberation Movement का सबसे प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक विरोध बनने जा रहा था.
सड़क पर प्रदर्शनकारी महिलाओं ने एक बड़ा-सा डस्टबिन रखा, जिस पर लिखा था- Freedom Trash Can. यानी आजादी का कूड़ेदान. एक-एक कर महिलाएं आगे आईं और उसमें वे चीजें फेंकती चली गईं, जिन्हें वे अपनी आजादी की राह में बाधा मानती थीं. इस डस्टबिन में ब्रा, कॉर्सेट, हाई हील्स, नकली पलकें, मेकअप, कुकबुक और पुरुषों की मैगज़ीनें फेंकी गईं. हर वस्तु के साथ एक ही संदेश था. ये चीज़ें व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि समाज की थोपी गई अपेक्षाएं हैं. यह विरोध वस्तुओं के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि उन नियमों और मानकों के ख़िलाफ़ था, जो महिलाओं के शरीर और जीवन को कंट्रोल करते थे.
महिलाओं के पोस्टरों पर साफ़ शब्दों में लिखा था- Women are not cattle. I am not a toy. No more Miss America. नारे गूंज रहे थे. ‘We want liberation, not beautification.’ अमेरिका में महिलाओं के विद्रोह और विरोध की ये तस्वीर इतिहास में दर्ज़ हो गई. लेकिन एक तस्वीर मौजूदा वक़्त में ईरान की ज़मीन से भी आ रही है. यहां अयातुल्लाह अली ख़ामेनई सरकार के विरोध में चल रहे प्रदर्शन को लगभग 14 दिन हो गए. सड़क से सोशल मीडिया तक ईरान के लोग अलग-अलग तरीके से विरोध ज़ाहिर कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें कुछ महिलाएं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की जलती हुई तस्वीरों से सिगरेट सुलगा रही हैं. तस्वीरें ईरान की बताई जा रही हैं लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है. हम इसकी लत को प्रमोट नहीं कर रहे लेकिन ऐसा क्यों कर रही हैं महिलाएं?
ख़ामेनेई का विरोधइन तस्वीरों को बीते दो हफ्तों से ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों की सबसे प्रभावशाली और याद रह जाने वाली तस्वीरों में से एक माना जा रहा है. ये विरोध ऐसे देश में व्यवस्था बदलने के लिए हो रहा है, जहां महिलाओं पर सख़्त सामाजिक पाबंदियां हैं. हाल के दिनों में ख़ामेनेई के नेतृत्व वाले शासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन और तेज़ हुए हैं. सरकार की सख़्ती और कार्रवाई के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. ये प्रदर्शन पहले आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ शुरू हुए थे, लेकिन अब ये आंदोलन सीधे-सीधे ख़ामेनेई सरकार और भ्रष्टाचार के विरोध में बदल चुका है.
पिछले आंदोलनों से अलग, इस बार प्रदर्शन करने वाले सिर्फ़ सुधार की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस्लामिक रिपब्लिक व्यवस्था को ही खारिज कर रहे हैं.
28 दिसंबर के बाद से राजधानी तेहरान समेत ईरान के कई शहरों में युवा और बुज़ुर्ग, सभी सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनों के दौरान ‘डेथ टू ख़ामेनेई’ यानी खामेनेई की मौत हो और ‘पहलवी वापस आएंगे’ जैसे नारे सुनाई दिए. प्रदर्शनकारियों में तमाम ऐसे हैं, जो ईरान के आख़िरी शाह के बेटे रज़ा पहलवी की वापसी की मांग कर रहे हैं. शाह को 1979 की क्रांति के बाद सत्ता से हटा दिया गया था.
जलती तस्वीर से सिगरेट सुलगातीं महिलाएंइन नारों के बीच सबसे ज़्यादा ध्यान उन तस्वीरों ने खींचा है, जिनमें महिलाएं ख़ामेनेई की तस्वीर जलाकर उससे सिगरेट सुलगाती दिख रही हैं. ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं और दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं. सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कैरोलिन नाम की यूजर ने लिखा,
एक युवा ईरानी महिला की यह तस्वीर, जिसमें वह आयतुल्लाह की जलती हुई तस्वीर से अपनी सिगरेट जला रही है, बेहद ताक़तवर संदेश देती है. यह तस्वीर ईरान की मौजूदा स्थिति को बहुत साफ़ तरीके से दिखाती है. यह तस्वीर मजबूत है और लंबे समय तक याद रहने वाली है.
मालूफ नाम के यूज़र ने लिखा,
ईरान में एक नया ट्रेंड सामने आ रहा है. एक ईरानी लड़की अयातुल्ला खामेनेई की तस्वीर जलाकर उससे अपनी सिगरेट जलाती दिख रही है. ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ चल रहे आंदोलन में युवा ईरानी महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं.'
एक और यूज़र ने लिखा
पहले भी हुए हैं ऐसे विरोधये तस्वीर मेरे दिल को छू जाती है. एक खूबसूरत महिला, बिना हिजाब के, अयातुल्ला की तस्वीर से सिगरेट जलाती हुई. क्या ईरान में इससे बड़ा विरोध का कोई रूप हो सकता है.
हालांकि, इस तरह का विरोध ईरान के लिए नया नहीं है. साल 2022 में भी इसी तरह के प्रतीकात्मक विरोध देखने को मिले थे. तब 22 साल की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे. महसा अमीनी को ईरान की ‘मोरैलिटी पुलिस’ ने कथित तौर पर हिजाब से सिर न ढंकने के आरोप में हिरासत में लिया था. इसके बाद 22 साल की अमीनी की 16 सितंबर को मौत हो गई. परिवार का आरोप था कि महसा की मौत पुलिस की पिटाई से हुई.
इसके जवाब में ईरान सरकार ने कहा कि महसा की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई, लेकिन ये नहीं बताया गया कि उसके कान से खून क्यों निकल रहा था? महसा की मौत के बाद पूरे ईरान में सरकार और नैतिक पुलिस के खिलाफ बड़े प्रदर्शन शुरू हो गए. इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा शामिल हुए. कई महिलाओं ने खुलेआम अपने बाल काटकर विरोध जताया और कई मशहूर लोगों ने भी नैतिक पुलिस के खिलाफ आवाज़ उठाई. महसा अमीनी के बाद हुए प्रदर्शनों में 500 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी. वहीं, पिछले साल ओमिद सरलक नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर ख़ामेनेई की तस्वीर जलाते हुए अपना वीडियो डाला था. वीडियो सामने आने के कुछ घंटों बाद ही उनकी लाश उनकी कार में मिली थी.
प्रदर्शनकारियों को मौत की सजारॉयटर्स की खबर के मुताबिक, ईरान के ताजा विरोध के मामले में तेहरान के मुख्य अभियोजक ने कहा है कि जो प्रदर्शनकारी सरकारी इमारतें जलाने, सुरक्षा बलों से भिड़ने और “तोड़फोड़” करने में शामिल हैं, उन्हें मौत की सज़ा दी जा सकती है. यह बयान शुक्रवार को ईरान के सरकारी मीडिया के हवाले से सामने आया. इसके बावजूद प्रदर्शन थमे नहीं हैं. कुछ मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, सरकार विरोधी प्रदर्शनों में पिछले दो हफ्तों में देशभर में 48 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. ईरान के कई शहरों में इंटरनेट सेवा बंद है.
ये तस्वीरें और वीडियो बताते हैं कि प्रदर्शनकारी सिर्फ़ सरकार को चुनौती नहीं दे रहे, बल्कि महिलाओं पर थोपे गए सख़्त सामाजिक नियमों के ख़िलाफ़ भी खुलकर आवाज़ उठा रहे हैं. हालांकि ईरान में चल रहे विवाद पर सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर कड़ा हमला किया है. उन्होंने ट्रंप की तुलना दुनिया के पुराने तानाशाह और घमंडी शासकों से की.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए ख़ामेनेई ने कहा कि, जो अमेरिकी राष्ट्रपति पूरी दुनिया के बारे में घमंड में फैसले लेते हैं, उन्हें इतिहास याद रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिरौन, निमरूद, मोहम्मद रज़ा पहलवी जैसे शासकों का भी अंत हुआ था, जब उनका घमंड सबसे ज़्यादा बढ़ गया था. ख़ामेनेई ने कहा कि ट्रंप का भी यही अंजाम होगा.
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