अब इस रास्ते को बंद करेगा ईरान? दुनिया की 30% तेल सप्लाई ठप हो जाएगी
ईरान पहले ही युद्ध शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पहरा बिठा चुका है. इसके चलते पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इस रास्ते दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस गुजरता है. भारत समेत कई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी रास्ते पर निर्भर है. होर्मुज के बाद बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी ने तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है.

डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को शांति समझौते के लिए पांच दिन का समय दिया था. ट्रंप की दी गई मियाद 27 मार्च को खत्म हो रही है. अगर कोई डील नहीं हुई तो अमेरिका फिर हमले शुरू कर सकता है. अंदेशा है कि वाशिंगटन का अगला निशाना ईरान का खर्ग द्वीप हो सकता है. इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके द्वीपों पर हमले होते हैं तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट को भी बंद कर सकता है.
अगर ऐसा होता है तो पूरी दुनिया की तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. क्योंकि इस रास्ते से दुनिया भर के 12 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होती है. वॉइट हाउस ने कहा है कि ईरान अगर युद्धविराम की शर्तें नहीं मानता तो अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है. जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका और इजरायल को ईरान की जमीन पर किसी तरह के जमीनी हमले के खिलाफ चेतावनी दी है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पहले ही युद्ध शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पहरा बिठा चुका है. इसके चलते पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इस रास्ते दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस गुजरता है. भारत समेत कई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी रास्ते पर निर्भर है. होर्मुज के बाद बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी ने तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है.
बाब-अल-मंडेब का क्या महत्व है?
अरबी भाषा में बाब-अल-मंडेब का मतलब होता है 'आंसुओं का द्वार' या 'शोक का द्वार'. यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र (जिबूती और इरिट्रिया) के बीच स्थित है. स्वेज नहर तक पहुंचने वाले जहाजों के लिए यह रास्ता लाइफलाइन माना जाता है.
अगर होर्मुज और बाब-अल मंडेब दोनों समुद्री रास्ते बाधित होते हैं, तो पूरी दुनिया की करीब 30 प्रतिशत एनर्जी सप्लाई प्रभावित हो सकती है. अगर यह रास्ता बंद होता है तो जहाजों को साउथ अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाना होगा. इससे डिलीवरी में ज्यादा समय लगेगा और शिपिंग की लागत बढ़ेगी. साथ में बीमा और सुरक्षा खर्च भी बढ़ेगा. इसका सीधा असर क्रूड व गैस की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी.
हूती विद्रोहियों की मदद लेगा ईरान
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान से लगा हुआ है. लेकिन बाब-अल मंडेब स्ट्रेट ईरान से काफी दूर है. होर्मुज से इसकी दूरी 1200 मील है. अब सवाल उठता है ईरान इतनी दूरी से कैसे इस रास्ते पर नियंत्रण करेगा. यहां उसके प्रॉक्सी मिलिशिया गुट एक्शन में आते हैं. ईरान की कुद्स फोर्स पूरे मिडिल ईस्ट में प्रॉक्सी मिलिशिया नेटवर्क को हथियार और ट्रेनिंग देती है. इस मिलिशिया ग्रुप में लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती, सीरिया और इराक के मिलिशिया समूह, गाजा में हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद ग्रुप शामिल हैं.
बाब अल मंडेब यमन के पास है. यमन में हूती एक्टिव है. तेहरान इस संगठन की मदद से बाब अल मंडेब स्ट्रेट पर नियंत्रण कर सकता है. हूती ने संघर्ष शुरू होने के बाद तेहरान से वादा भी किया था कि जरूरत पड़ी तो वह इस स्ट्रेट पर कब्जा करने में ईरान की मदद करेगा.
हूती पहले भी इस इलाके में अपनी ताकत दिखा चुका है. साल 2023 में गाजा संघर्ष के दौरान इस संगठन ने इजरायल के जहाजों को निशाना बनाया था. इन हमलों के चलते कई जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ा. इसके अलावा हूती अमेरिकी नौसेना के जहाजों और इजरायली ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले भी कर चुका है.
वीडियो: स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर टोल वसूलने की तैयारी, ईरानी संसद में बिल प्रस्ताव होगा?

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