'होर्मुज एक आर्थिक न्यूक्लियर हथियार जैसा... ', अमेरिका की टेंशन की असल वजह ये है
Iran-US peace deal deadlock: मार्क रुबियो ने कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को आर्थिक न्यूक्लियर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. उधर ईरान ने अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखी हैं जिसके बाद वादा किया कि वो स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खोल देगा.

ईरान और अमेरिका के बीच डील कहां अटकी हुई है? क्या ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है? और क्या इसी वजह से अमेरिका पीछे हटने को तैयार नहीं? ये तमाम सवाल हैं मगर दोनों ही देश जवाब के तौर पर केवल चेतावनी दे रहे हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है.
उन्होंने कहा, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ एक तरह का आर्थिक न्यूक्लियर हथियार (Economic Nuclear Weapon) है. जिसे ईरान दुनिया के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है.’
रुबियो ने आगे कहा कि अगर ऐसे लोगों के पास न्यूक्लियर वेपन आ गए, तो खतरा और बड़ा हो सकता है. उनके मुताबिक, ईरान अभी तेल के जरिए वही करने की कोशिश कर रहा है, जो वो न्यूक्लियर वेपन से करना चाहता है.
अमेरिका अपने तर्क के मुताबिक एक्शन भी ले रहा है. उसने ईरान के पोर्ट्स पर पाबंदी लगा रखी है. ताकि उस पर दबाव बढ़ाया जा सके. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान के लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि वहां की जनता खुद अपने सिस्टम की नीतियों से परेशान है. दूसरी तरफ ईरान ने एक थ्री स्टेप प्लान अमेरिका के सामने रखा है. अमेरिका ने बताया कि वो इसपर विचार कर रहा है.
ईरान की शर्तें क्या हैं?अलजज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कहा कि जब तक उसे यह भरोसा नहीं मिलेगा कि अमेरिका दोबारा हमला नहीं करेगा, तब तक बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल है. ईरान का आरोप है कि बातचीत के दौरान ही उस पर दो बार हमला किया गया और यही वजह है कि ईरान के मन में भरोसे की कमी है. एक तरफ ये भी बताया कि वो नई डील के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले जंग ख़त्म होनी चाहिए. ये तीन शर्तें हैं-
- अमेरिका ईरान और उसके पोर्ट्स पर लगाए गए Economic and Maritime Sanctions हटाए.
- वेस्ट एशिया में चल रही जंग को खत्म किया जाए.
- न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत बाद के फेज़ में की जाए.
इसके बदले ईरान ने कहा कि वो स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को फिर से खोल सकता है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ये प्रपोज़ल मीडिएटर के सामने रखा है. इसी बीच, अराघची रूस भी पहुंचे. उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. पुतिन ने ईरान के रुख का समर्थन किया और कहा कि रूस इस मामले में शांति लाने के लिए हर संभव कोशिश करेगा. यानी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पीस डील का रोड़ा बना हुआ है. ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है. वहीं, अमेरिका को डील करनी है मगर अपनी शर्तों पर.
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