ईरान ने नया हथियार बाहर निकाला, अमेरिका-इजरायल को 'हार्ट अटैक' आ सकता है
अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की बातचीत को लेकर सहमति बनती नहीं दिख रही है. इस बीच ईरान ने अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं. ईरानी सेना का दावा है कि वे बहुत जल्दी ही दुश्मनों को एक ऐसे हथियार का सामना कराएंगे, जिससे उनके होश फाख्ता हो जाएंगे.

अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी सीजफायर को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है. डॉनल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान के हॉर्मुज खोलने वाले प्रस्ताव को खारिज करने से तनाव और बढ़ गया है. इस बीच ईरान अगले राउंड के संभावित टकराव की तैयारी करता दिख रहा है. ईरानी सेना ने अमेरिका और इजरायल को नए हथियार की धमकी दी है. उनका दावा है कि इससे दुश्मनों को 'हार्ट अटैक' आ सकता है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की नौसेना के कमांडर शहराम ईरानी ने कहा,
इस्लामिक गणराज्य बहुत जल्द अपने दुश्मनों का सामना ऐसे हथियार से कराएगा, जो 'उनके बिल्कुल करीब' मौजूद है. मुझे उम्मीद है कि उन्हें हार्ट अटैक नहीं आएगा.
शहराम ईरानी ने जिस गुप्त हथियार का इशारा किया है, वो 'हूट' नाम का रॉकेट टॉरपीडो हो सकता है. इसकी टेस्टिंग ईरान ने गुप्त तरीके से साल 2006 के आसपास की थी. इसकी स्पीड इतनी तेज होती है कि डिफेंस सिस्टम्स को रिएक्ट करने का समय तक नहीं मिलता.
हूट टॉरपीडो क्या है?
फारसी में हूट का अर्थ व्हेल होता है. ईरान का दावा है कि यह पानी में सबसे तेज चलने वाले हथियारों में एक है. रूस के बाद ईरान दूसरा ऐसा देश है, जिसके पास सुपर-कैविटेटिंग टॉरपीडो है. रूस ने 'VA-111 Shkval' नाम के सुपर टॉरपीडो को 1990 के दशक में ही अपने बेड़े में शामिल कर लिया था.
ट्रेडिशनल टॉरपीडो पानी के भीतर चलने वाले गाइडेड मिसाइलों की तरह होते हैं. इनकी स्पीड 60-100 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है. वहीं ईरान का दावा है कि उनका हूट टॉरपीडो पानी के अंदर 360 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड से ट्रैवल कर सकता है. अगर ईरान का ये दावा सच है तो अमेरिकी नेवी के लिए ये एक बड़ी चुनौती होगी.
इधर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और आक्रामक बयानबाजी के बीच, ईरानी कमांडर ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि हालिया संघर्ष में कोई भी पक्ष तुरंत जीत हासिल कर सकता है. उन्होंने कहा,
दुश्मन को लगा था कि वह कम से कम समय में, मसलन तीन दिन से एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ युद्ध में निर्णायक स्थिति तक पहुंच सकता है. लेकिन उनकी ये धारणा मिलिट्री अकादमियों में मजाक बन गई है.
कमांडर शहराम ने आगे बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष की शुरुआत होने के बाद से ईरान की आर्म्ड फोर्सेज ने पूरे वेस्ट एशिया में अमेरिका और इजरायली ठिकानों पर कम से कम 100 जवाबी हमले किए हैं. उनके मुताबिक, इन हमलों में वेस्ट एशिया के बड़े इलाके में फैले सेंसिटिव ठिकानों को टारगेट किया गया. ईरानी कमांडर ने चेतावनी देते हुए कहा,
अगर अमेरिका अपनी जिद नहीं छोड़ता और ईरान की शर्तों को खारिज करता है तो जल्द ही उनको एक अलग तरह की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है.
कमांडर शहराम ईरानी ने आरोप लगाया कि संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाई है, जिसमें अतिरिक्त युद्धपोत और मिसाइल प्लेटफॉर्म्स की तैनाती शामिल है. उन्होंने कहा,
अमेरिका के शुरुआती नेवल अटैक को उम्मीद के मुताबिक रिजल्ट नहीं मिला और वे अब भी फंसे हुए हैं.
ईरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका को एक प्रस्ताव दिया था. उनका प्रस्ताव था कि स्थायी सीजफायर और हॉर्मुज को खोलने तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली बातचीत को टाल दिया जाए. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. वाशिंगटन का कहना है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम भी शुरुआती बातचीत का हिस्सा रहेगा.
वीडियो: अमेरिका-ईरान सीजफायर के बीच ईरान ने भारत को फोन किया, क्या बात हुई?

