स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ऑप्शन मिल गया? ईरान इस रास्ते से जहाजों को निकाल रहा
ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड के कंट्रोल वाले इस रास्ते से 9 जहाज गुजर भी चुके हैं. भारत के तीन शिप शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी भी इन जहाजों में शामिल हैं.

होर्मुज में संकट के बादल कब छंटेंगे, कोई नहीं जानता. इसी बीच ईरान ने वहां फंसे जहाजों के लिए एक रास्ता निकाला है. कथित तौर पर एक नया गलियारा बनाया गया है, जो ईरान के समुद्री इलाके से होकर गुजरता है. इस रास्ते से कुछ चुनिंदा जहाजों को ही जाने की इजाजत दी जा रही है. ईरान तो कह रहा है कि ये रास्ता सेफ है, लेकिन एक्सपर्ट्स को इस दावे पर भरोसा नहीं है. कहा जा रहा है कि आने वाले समय में यह सेफ पासेज भी अमेरिका के निशाने पर आ सकता है.
अब ये जब हो तब हो. फिलहाल, ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड के कंट्रोल वाले इस रास्ते से 9 जहाज गुजर भी चुके हैं. बताया गया है कि भारत के तीन शिप शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी भी इन जहाजों में शामिल हैं. इन जहाजों ने ओमान से होकर जाने वाले छोटे रास्ते की बजाय ईरान के कंट्रोल वाले समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया और भारत पहुंचे. इनके अलावा दूसरे बल्क कैरियर और टैंकर भी ऐसा ही कर रहे हैं.
ईरान ने ये खास गलियारा तब शुरू किया है, जब भारत, पाकिस्तान, इराक, मलेशिया और चीन समेत कई देश अपने जहाजों के सेफ पासेज के लिए तेहरान के साथ बातचीत कर रहे हैं. जाहिर है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच की जंग खाड़ी देशों में भी फैल गई है. ऐसे में होर्मुज के रास्ते से ग्लोबल शिपिंग को काफी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं. इसका असर गैस और तेल के संकट के रूप में सामने आ रहा है, जिसने भारत के रसोईघरों तक पर असर डाला है.
ऐसे में ईरान की ओर से ये वैकल्पिक सिस्टम आने के बाद व्यापारिक जहाजों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इस गलियारे से उन्हीं शिप को गुजरने दिया जाएगा, जिन्हें ईरानी अधिकारियों की पहले से परमिशन मिली होगी. नए सिस्टम के तहत शिप ऑपरेटरों को पहले से मध्यस्थों के जरिए ईरानी अधिकारियों को कुछ जानकारियां साझा करनी होंगी. जैसे- जहाज का मालिक कौन है? उसमें क्या माल लदा है और वह कहां जा रहा है?
फिलहाल ये काम ‘केस टू केस’ आधार पर हो रहा है. यानी हर जहाज के लिए अलग-अलग प्रोसेस तय किया जा रहा है. लेकिन लॉयड्स लिस्ट पत्रिका की रिपोर्ट के हवाले से टीओआई ने बताया कि बाद में इसे लेकर एक फिक्स सिस्टम बनाया जा सकता है. लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट बताती है कि शिप को इस गलियारे से गुजारने के लिए उसके मालिक अच्छा-खासा पैसा भी खर्च कर रहे हैं. ऐसे ही एक जहाज को सुरक्षित रास्ता पाने के लिए लगभग 20 लाख डॉलर यानी 15-16 करोड़ रुपये तक देने पड़े हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि एक्सपर्ट्स को लगता है कि ये रास्ता उतना भी सेफ नहीं है. उनका कहना है कि ईरानी अफसरों से मंजूरी मिलने के बाद भी इस रास्ते पर सुरक्षा की गारंटी नहीं है. क्योंकि अलग-अलग पोर्ट पर IRGC की अलग-अलग यूनिट्स होती हैं. ये यूनिट्स जहाजों को रोक सकती हैं. उन्हें जब्त भी कर सकती हैं. इससे शिपिंग कंपनियों के लिए थोड़ी सी असुविधा हो सकती है.
इसके अलावा, हो सकता है अमेरिका अभी इस रास्ते की बाधा बनने से बचे ताकि एनर्जी की ग्लोबल सप्लाई में रुकावट न हो, लेकिन लंबे समय तक इस गलियारे को उससे बचाना मुश्किल है.
इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के कंट्रोल बढ़ाने से भी तनाव बढ़ने के आसार बन सकते हैं. इसके जवाबी कार्रवाई में भी गलियारे पर संकट बढ़ सकता है.
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