सऊदी-UAE ने लिया ऐसा फैसला, सुनते ही ईरान कहने लगा- 'हम तो आपको दुश्मन नहीं मानते'
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान की आत्मरक्षा में की गई प्रतिक्रिया को इन देशों के खिलाफ हमले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने ऐसे बयान तब देने शुरू किए जब खाड़ी देशों ने ईरान के खिलाफ बड़ा फैसला ले लिया.

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले शुरू किए हैं. इन हमलों के बीच ईरानी विदेश मंत्री ने दावा किया है कि उनकी खाड़ी देशों से कोई दुश्मनी नहीं है. उन्होंने ये दावा तब किया जब खाड़ी देशों ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़ा फैसला ले लिया. इन्होंने क्या संकल्प लिया है, आइए सब जानते हैं.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ फोन पर बातचीत के दौरान कहा, ‘ईरान खाड़ी देशों के प्रति शत्रुता का भाव नहीं रखता. वह उनके साथ एक अच्छे पड़ोसी की तरह संबंध बनाए रखने के लिए संकल्पित है.’
ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अरागची ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान की आत्मरक्षा में की गई प्रतिक्रिया को इन देशों के खिलाफ हमले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनकी यह टिप्पणी खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया के बाद आई है, जिसमें उन्होंने खुद का बचाव करने का संकल्प किया है. 1 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल की बैठक हुई. इस बैठक में छह खाड़ी देशों (यूएई, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर और कुवैत) के विदेश मंत्रियों ने जरूरत पड़ने पर ईरानी आक्रमकता का जवाब देने पर चर्चा की.
ईरानी हमले से प्रभावित GCC के छह सदस्य देशों ने हमलों से हुए नुकसान की समीक्षा की और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने के उपायों पर भी चर्चा की. बैठक के बाद एक बयान जारी कर बताया गया, ‘खाड़ी देश अपनी सुरक्षा और स्थिरता के लिए सभी जरूरी उपाय करेंगे, जिसमें आक्रमकता का जवाब देने का विकल्प भी शामिल है.’
इस बैठक में ईरानी हमलों को तत्काल बंद करने की मांग की गई. साथ ही ये भी कहा गया कि खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता केवल क्षेत्रीय चिंता का मसला नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के एक मूलभूत स्तंभ है.
ब्रिटेन हवाई हमलों से रिजीम चेंज के पक्ष में नहीं
ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा है कि ब्रिटेन इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जा रहे आक्रमक हमलों का हिस्सा नहीं बनेगा. क्योंकि उनका देश हवाई हमलों से ईरान में रिजीम चेंज में विश्वास नहीं करता है. लेकिन साथ में प्रधानमंत्री स्टार्मर ने अमेरिका द्वारा ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने का बचाव किया है. प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि मिडिल ईस्ट में ब्रिटेन के सहयोगियों पर हुए हमले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ब्रिटेन ने अपने दीर्घकालिक मित्रों और सहयोगियों की रक्षा के लिए ये फैसला किया है.
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्मर ने कहा कि इराक से मिले सबक के आधार पर ब्रिटेन ने ईरान पर हो रहे हमलों का हिस्सा नहीं बनने का फैसला किया है. उन्होंने कहा, ‘हम सभी को इराक में हुई गलतियां याद हैं. हमने उनसे सबक लिया है. ब्रिटेन की कोई भी कार्रवाई हमेशा कानूनी आधार और एक सोची समझी योजना पर आधारित होनी चाहिए.’
वीडियो: इजरायल-ईरान युद्ध के बीच स्पेन ने अमेरिका को कैसा झटका दे दिया?

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