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परमाणु बम नहीं, तो ईरान क्या छिपाने में लगा... ये तस्वीरें इजरायल-अमेरिका के कान खड़े कर देंगी

ईरान से आईं इन तस्वीरों की वजह से सवाल उठ रहे हैं कि अगर उसके पास न्यूक्लियर बम नहीं है, तो इतने बड़े पैमाने पर वो सुरक्षा को क्यों बढ़ाता जा रहा है. इन ठिकानों पर जरूर कुछ ऐसा है, जिसे ईरान दुनिया की नजरों में नहीं आने देना चाहता. देखिए ये फोटो.

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Iran rushes to turn nuclear sites into bunkers satellite images reveal that iran is protecting its key sites
सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान किलेबंदी करता हुआ दिख रहा है (PHOTO- इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी)
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मानस राज
19 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:19 AM IST)
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अमेरिका-ईरान के बढ़ते तनाव के बीच अब कुछ तस्वीरें सामने आई हैं. इन सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक तनाव के बीच ईरान अपने न्यूक्लियर ठिकानों की सुरक्षा को और भी पुख्ता कर रहा है. ईरान अपने ठिकानों की सुरक्षा के लिए ऐसे बंकर तैयार कर रहा है, जिन्हें तोड़ना काफी मुश्किल है. सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रहा है कि ईरान अपने संवेदनशील ठिकानों को जमीन के और भी नीचे कर रहा है.

ईरान के इस कदम की वजह से सवाल उठ रहे हैं कि अगर उसके पास न्यूक्लियर बम नहीं है, तो इतने बड़े पैमाने पर वो सुरक्षा किसकी कर रहा है. अमेरिकी संस्थान इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) के मुताबिक इन ठिकानों पर जरूर कुछ ऐसा है, जिसे ईरान दुनिया की नजरों में नहीं आने देना चाहता. IS इंस्टूट्यूट ने तस्वीरें जारी करते हुए एक्स पर लिखा,

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तस्वीरों को देखने पर समझ आता है कि ईरान पास की पहाड़ियों पर मिट्टी के ढेर जमा कर रहा है. ये मिट्टी शायद स्ट्रक्चर को और दबाने के लिए है, जिससे सिर्फ कुछ ही एंट्री गेट दिखेंगे. यह जगह ऊंची सिक्योरिटी दीवारों से घिरी हुई है. घेरे के अंदर एक कंक्रीट बैच प्लांट बना है जिसे शायद किलेबंदी के काम के लिए ही बनाया गया है. इंस्टीट्यूट ने कहा कि नया कंस्ट्रक्शन ईरानी सरकार के लिए इस जगह की स्ट्रेटेजिक अहमियत को साफ दिखाता है. हालांकि सिर्फ तस्वीरों से इसका सही मकसद पता नहीं लगाया जा सकता.

नतांज-इस्फहान में भी किलेबंदी जारी

10 फरवरी की कुछ और सैटेलाइट इमेजेज को देखें तो कोलांग-गाज ला माउंटेन के नीचे टनल के एंट्रेंस को मजबूत करने की कोशिशें दिख रही हैं. ये जगह नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी से लगभग दो किलोमीटर दूर है. यहां टनल के एक बड़े पश्चिमी एंट्रेंस पर कंक्रीट डाला जा रहा है. पूर्वी पोर्टल पर, पत्थर और मिट्टी को पीछे धकेलकर लेवल किया गया है ताकि एक्स्ट्रा पत्थर, मिट्टी या कंक्रीट की परतें जो संभावित एयरस्ट्राइक के फोर्स को सोख सकें, और जितना हो सके उसके असर को कम कर सकें. इंस्टीट्यूट के मुताबिक ये कोशिशें टनल के पोर्टल को मजबूत करने कि लिए की जा रही हैं.

दूसरी ओर इस्फहान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स जो एक और एनरिचमेंट साइट है, वहां भी किलेबंदी जारी है. इस जगह पर अमेरिका ने पहले भी बमबारी की थी, 8 फरवरी की सैटेलाइट तस्वीरों को देखें तो टनल के एंट्रेंस को छिपाने की साफ कोशिशें दिख रही हैं. मौजूदा इंटेलिजेंस के आधार पर देखें तो ये साफ नहीं है कि ये उपाय कितने कारगर हैं. क्या ये पिछली बार की तरह B2 बॉम्बर का हमला झेल सकते हैं? 

वीडियो: दुनियादारी: क्या अमेरिका और ईरान ने ग्लोबल पीस का तमाशा बनाकर रख दिया?

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