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बस दो शर्तें और होर्मुज का संकट खत्म, ईरान का नया प्रस्ताव अमेरिका मानेगा?

ईरान ने अमेरिका को हॉर्मुज खोलने का नया प्रस्ताव दिया है. ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को ये ऑफर दिया है. ईरान चाहता है कि पहले अमेरिकी नाकेबंदी खत्म हो और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोला जाए. तेहरान की शर्त ये है कि उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत तभी शुरू होगी जब समुद्री संकट पूरी तरह सुलझ जाएगा.

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27 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 11:23 PM IST)
hormuz iran america war nuclear programme
ईरान ने अमेरिका को हॉर्मुज खोलने का नया प्रस्ताव दिया है. (इंडिया टुडे)
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अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी सुलह नहीं हो पा रही है. दोनों के बीच की लड़ाई के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद है. इस बीच ईरान ने अमेरिका को होर्मुज खोलने का एक नया प्रस्ताव दिया है. तेहरान होर्मुज से ब्लॉकेड खत्म करने को तैयार है. लेकिन इसके लिए उसने युद्ध खत्म करने और न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत को पोस्टपोन की शर्त रखी है.

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को ये ऑफर दिया है. ईरान चाहता है कि पहले अमेरिकी नाकेबंदी खत्म हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोला जाए. ईरान की शर्त ये है कि उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत तभी शुरू होगी जब समुद्री संकट पूरी तरह सुलझ जाएगा. ईरान ने प्रस्ताव में सीजफायर को लंबे समय तक बढ़ाने या इसे स्थायी सीजफायर में बदलने की बात कही है.

इस प्रस्ताव की जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर एक्सियोस न्यूज आउटलेट को प्रस्ताव के बारे में बताया है. ये प्रस्ताव ईरानी और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच हुई गुप्त बैठक से निकला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस प्रस्ताव पर सहमत होने के चांसेज कम ही हैं. अगर ट्रंप इस पर सहमत होते हैं तो फिर ईरान पर हमला करने का उनका मकसद अधूरा रह जाएगा. ईरान के इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत आगे बढ़ जाएगी, जबकि ट्रंप का ईरान पर हमला करने का घोषित मकसद ही ईरान के परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को नष्ट करना था. ईरान का ये प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरानी विदेश मंत्री रूस के दौरे पर हैं. रूस ईरान के विश्वस्त सहयोगियों में से एक है. यह साफ नहीं है कि मॉस्को इसमें किस तरह से ईरान की मदद करेगा.

दुनिया भर के तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है. अमेरिकी ब्लॉकेड का मकसद ईरान को तेल बेचने से रोकना है. ईरान की इनकम का एक बड़ा सोर्स तेल का एक्सपोर्ट है. ऐसे में ब्लॉकेड से अमेरिका ईरान को आर्थिक झटका देना चाहता है. साथ ही वो ऐसी स्थिति बनाना चाहता है जिसमें ईरान को तेल का एक्सपोर्ट और उत्पादन रोकने पर मजबूर होना पड़े.

इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से डॉनल्ड ट्रंप पर दबाव बढ़ गया है. अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन से पहले तेल और गैसोलीन की कीमतें आसमान छू रही हैं. इससे यूएस के खाड़ी देशों के सहयोगियों पर भी दबाव बढ़ा है, जो अपने तेल और गैस के एक्सपोर्ट के लिए इसी जलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं. इस बंदी का ग्लोबल इकोनॉमी पर भी बड़ा असर हुआ है. इससे फर्टिलाइजर, खाने के सामान और दूसरी बुनियादी चीजों के दाम बढ़ गए हैं. 

वीडियो: पाकिस्तान जा रहे अमेरिकी डेलीगेशन को रोका, ईरान ने क्या इल्जाम लगाया?

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