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पायलट नहीं यूरेनियम? इस्फहान ऑपरेशन का सच कुछ और है? गाली देने पर क्यों उतरे ट्रंप?

ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप दुनिया के सामने सफेद झूठ बोल रहे हैं. उनके इस पूरे तामझाम का मकसद किसी पायलट को बचाना नहीं, कुछ और ही था, जो ‘बहुत बुरी तरह से फेल’ हो गया. इस नाकामी को छिपाने के लिए ही ट्रंप ने दुनिया के सामने झूठी कहानी सुनाई.

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7 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 10:42 PM IST)
donald trump
ईरानी मीडिया ने ट्रंप के पायलट रेस्क्यू ऑपरेशन को झूठा बताया है. (India today)
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4 बॉम्बर, 64 फाइटर जेट, 48 फ्यूल वाले टैंकर, 13 रेस्क्यू प्लेन. ट्रंप की मानें तो कुल 155 अमेरिकी एयरक्राफ्ट ईरान में घुसे थे. वो भी सिर्फ एक पायलट को बचाने के लिए! ये पायलट अमेरिका के ‘अभेद्य’ एफ-15E स्ट्राइक ईगल जेट का था, जिसे इस्फहान इलाके में ईरानी सेना ने मार गिराया था. इस जेट में दो पायलट सवाल थे. एक को हमले वाले दिन ही बचा लिया गया, लेकिन एक पायलट ईरान में ही छूट गया. कई दिनों तक रेस्क्यू की राह देखते वो वहां की पहाड़ियों में पैदल भटकता रहा.

बीते दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान में ‘लापता’ अपने पायलट को ढूंढकर बचा लिया है. उसे चोट लगी है, लेकिन वो जल्दी ठीक हो जाएगा. ट्रंप ने इसे यूएस मिलिट्री के इतिहास की सबसे साहसी रेस्क्यू कार्रवाई बताया जिसे एक शानदार क्रू मेंबर अफसर और सम्मानित कर्नल के लिए अंजाम दिया गया. 

लेकिन अब ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप दुनिया के सामने सफेद झूठ बोल रहे हैं. उनके इस पूरे तामझाम का मकसद किसी पायलट को बचाना नहीं, कुछ और ही था, जो ‘बहुत बुरी तरह से फेल’ हो गया. इस नाकामी को छिपाने के लिए ही ट्रंप ने दुनिया के सामने झूठी कहानी सुनाई.

रिपोर्ट में जो दावा किया गया है, अगर वो सच है तो ये बात समझना कोई मुश्किल काम नहीं है कि ट्रंप ईरान पर ऐसे क्यों सनके हैं. क्यों ईरान से ‘अच्छी बातचीत के दावे' से उसे गाली देने पर उतर आए हैं. झल्लाहट के इस स्तर पर आ गए हैं कि ‘पूरी सभ्यता की मौत’ की धमकी देने लगे हैं.

क्या है रिपोर्ट में?

ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, इस्फहान में अमेरिकी ऑपरेशन किसी पायलट को बचाने का रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था. डॉनल्ड ट्रंप ने अपनी एक बड़ी हार और नाकाम ऑपरेशन को छिपाने के लिए दुनिया के सामने इसके बारे में झूठ बोला था. प्रेस टीवी ने दावा किया कि उसके पास ऐसे सबूत हैं जो ये बताते हैं कि अमेरिका का असली मकसद इस्फहान में ईरान की एक न्यूक्लियर फैसिलिटी में घुसना और उस पर हमला करना था, लेकिन ईरानी सेना ने उनके सारे इरादे नाकाम कर दिए.

प्रेस टीवी ने बताया कि अमेरिका और इजरायल की सेना ने हमले से पहले इस इलाके में रेकी की थी. उस समय भी दोनों देशों के कई एयरक्राफ्ट, जिनमें कम से कम एक A-10 थंडरबोल्ट II और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर शामिल थे, तबाह कर दिए गए थे. 

3 अप्रैल को अमेरिका के F-15E विमान को ईरान ने मार गिराया. विमान के तबाह होने से पहले इसके दोनों पायलट जहाज से सुरक्षित बाहर आ गए. इनमें से एक को तो रेस्क्यू कर लिया गया लेकिन दूसरा वहीं फंसा रह गया. उसे बचाने के लिए 4-5 अप्रैल को अमेरिका ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. प्रेस टीवी के मुताबिक, रेस्क्यू के लिए आया अमेरिका का C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ईरान के इस्फहान में न्यूक्लियर साइट के पास एक सुनसान एयरस्ट्रिप पर उतरा था. अमेरिकियों को अंदाजा था कि ईरान का एयर डिफेंस उनके एयरक्राफ्ट का सामना नहीं कर पाएगा, लेकिन ईरानी सेना इसके लिए पूरी तरह से तैयार थी. 

वह तो अमेरिकियों के लिए जाल बिछाए बैठी थी. उन्होंने अमेरिकियों के पहले जहाज को एयरस्ट्रिप पर आराम से उतरने दिया. उस पर कोई सीरियस रिएक्शन नहीं दिखाया. इसके कुछ मिनटों के बाद ही उनका दूसरा C-130 एयरक्राफ्ट आया. इसमें कई स्पेशल गाड़ियां थीं. कई MH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर और दूसरे सपोर्ट इक्विपमेंट थे. 

इस जहाज के लैंड करने से पहले ही मौके पर मौजूद ईरानी फोर्स ने उसे टारगेट कर लिया. इससे उसकी नॉर्मल लैंडिंग इमरजेंसी लैंडिंग में बदल गई. इसके थोड़ी देर बाद ही दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी आ गए, लेकिन इसी वक्त अमेरिका के पहले वाले प्लेन से उतरे एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और कमांडो ईरानी सेना के लिए परफेक्ट टारगेट बन गए, ऐसा प्रेस टीवी ने दावा किया है.

इस दौरान जब अमेरिकी स्पेशल फोर्स को एहसास हुआ कि वो ईरान के जाल में फंस गए हैं, तभी ‘व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम’ ने एक जरूरी फैसला लिया. झट से न्यूक्लियर साइट में घुसपैठ के मेन ऑपरेशन को ईरानी फायरिंग में फंसे दर्जनों US कमांडो के लिए एक रेस्क्यू ऑपरेशन में बदल दिया गया. प्रेस टीवी का कहना है कि इस नाकाम ऑपरेशन में US स्पेशल फोर्सेज को अपना स्पेशल लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर उड़ाने का भी मौका नहीं मिला. इनमें से कुछ जमीन पर ही खत्म हो गए जबकि दूसरे C-130 एयरक्राफ्ट के अंदर समाप्त हो गए. 

प्रेस टीवी के मुताबिक ये ऑपरेशन इतनी जल्दबाजी में किया गया था कि कुछ अमेरिकी सैनिक और अफसर अपनी जान बचाने के लिए अपना सामान तक छोड़कर भागे. यहां तक कि एक अमेरिकी अफसर का पहचान पत्र भी वहीं छूट गया.

न्यूक्लियर साइट पर हमले का ट्रंप का ये प्लान पूरी तरह फेल हो गया. इसके बाद उन्होंने अपनी नाकामी छिपाने के लिए आनन-फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और इसे पायलट रेस्क्यू ऑपरेशन बता दिया. ट्रंप और उनके मंत्री पीट हेगसेथ ने लोगों को बताया कि ये अमेरिकी सेना की बड़ी उपलब्धि थी. उन्होंने अमेरिका की जनता को खुश करने के लिए हॉलीवुड टाइप की झूठी कहानियां गढ़ीं और इस ऑपरेशन को दुनिया का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन बताया, जो कि 'झूठ' था. 

रिपोर्ट का दावा है कि यह हार अब तक के इतिहास में अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी और शर्मनाक नाकामियों में दर्ज हो सकती है. इस बड़ी नाकामी का असर सिर्फ ईरान के खिलाफ चल रही जंग में ही नहीं दिखेगा बल्कि ये ट्रंप की राजनीति, उनकी रिपब्लिकन पार्टी और अमेरिका के पूरे राजनीतिक हालात पर लंबे समय तक असर डाल सकता है.

प्रेस टीवी का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से ट्रंप के बौखलाए बयान इसी 'शर्मनाक हार' की खीझ हैं. इसीलिए वो ईरान को तबाह करने, एक रात में खत्म कर देने, पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकियां दे रहे हैं. ईरान को गालियां देने की वजह भी इस्फहान ऑपरेशन में मिली इसी हार की झल्लाहट है. 

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