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'हमारे सामने हुई मिसाइलों की बौछार', ईरान में फंसे इन दो भारतीयों ने 'मौत' देखी

Iran-Israel War: भारत के दोनों व्यक्ति यज्द में एक लोकल फैमिली के यहां रुके हैं और सुरक्षित हैं. उन्होंने इंडियन एंबेसी से मदद की अपील की है. उनकी मांग है कि उन्हें Armenia या Turkey के बॉर्डर से बाहर निकाला जाए.

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इंडियन एंबेसी ने भारतीयों से तेहरान छोड़ने की सलाह दी है.
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मौ. जिशान
17 जून 2025 (अपडेटेड: 17 जून 2025, 09:16 PM IST)
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ईरान में फंसे दो भारतीयों ने तेहरान में मची तबाही की खौफनाक दास्तान बताई है. दोनों दुबई में काम करते हैं और शुक्रवार, 13 जून को तेहरान पहुंचे थे. इसी दिन इजरायल ने ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर हमले किए थे. दोनों ने अपनी आंखों से तबाही का मंजर देखा. इजरायल के हमले में ईरान के टॉप मिलिट्री अफसर और न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स की मौत हो गई. इसके बाद ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलों से जवाबी हमला किया. बीते चार दिनों में दोनों देशों के बीच लगातार हमले हो रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के मलप्पुरम जिले के रहने वाले हफसल और मुहम्मद दुबई में बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर के तौर पर काम करते हैं. दोनों काम के सिलसिले में तेहरान गए थे और इजरायल की स्ट्राइक के बीच फंस गए. अब वे 600 किलोमीटर दूर यज्द शहर में एक स्थानीय परिवार के यहां पनाह ले चुके हैं.

हफसल और मुहम्मद ने अपने सफर के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि तेहरान से बचकर निकलने के दौरान उनका सामना 'मिसाइलों की बौछार' से हुआ. हफसल और मुहम्मद को रविवार को ईरान से लौटना था. हफसल ने बताया,

"हम एक होटल में रह रहे थे, लेकिन रविवार से तनाव बढ़ने लगा. अपने होटल के कमरे से हमने आस-पास मिसाइलों को गिरते हुए देखा. जल्दी ही मिसाइलें हर जगह गिरने लगीं और लोग भागने लगे. फिर टैक्सी सर्विस बंद कर दी गईं. पास में एक अंडरग्राउंड मेट्रो थी और हमने उसमें शरण ली. कई और लोग उस अंडरग्राउंड मेट्रो की तरफ भाग रहे थे, और इसलिए हम भी उनके पीछे चले गए."

हफसल ने आगे कहा,

"(इंडियन) एंबेसी ने हमें तेहरान में ही रहने की सलाह दी थी, लेकिन हमने यह महसूस किया कि अगर हम वहीं रहे, तो हमारी जान खतरे में हो सकती थी. हमारे एक स्थानीय दोस्त अपने परिवार के साथ तेहरान से भाग रहे थे, और उन्होंने हमें भी अपने साथ ले जाने की इजाजत दे दी."

हफसल ने बताया कि 10 घंटे रोड से सफर करने के दौरान वे 'मिसाइलों की बौछार' से बाल-बाल बचे. उन्होंने कहा,

"हमने मिसाइलों को आसमान में इधर-उधर उड़ते देखा. हमें लगा कि मौत हमारा पीछा कर रही है. स्थानीय दोस्त के परिवार ने हमें यज्द में रहने की सलाह दी, जो एक हेरिटेज सिटी है. हमें बताया गया था कि यह शहर सुरक्षित रहेगा, लेकिन यहां भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं."

अखबार के मुताबिक ये दोनों व्यक्ति यज्द में एक लोकल फैमिली के यहां रुके हैं और सुरक्षित हैं. उन्होंने इंडियन एंबेसी से मदद की अपील की है. उनकी मांग है कि उन्हें आर्मेनिया या तुर्किए के बॉर्डर से बाहर निकाला जाए. वहीं, केरल सरकार का प्रवासियों से संबंधित विभाग (NORKA ROOTS) भी उनसे संपर्क बनाए हुए है. हालांकि, हफसल का तर्क है कि इंडियन एंबेसी ही उन्हें सुरक्षित निकाल सकती है.

दूसरी तरफ, ईरान स्थित इंडियन एंबेसी ने मंगलवार, 17 जून को नई एडवाइजरी जारी की है. उसने भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के व्यक्तियों (OIC) से तेहरान से निकलने की सलाह दी है. एंबेसी ने भारतीयों की मदद के लिए तीन इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर- +98 9010144557, +98 9128109115, और +98 9128109109 भी जारी किए हैं.

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