2 हजार करोड़ का ड्रोन भी ईरान में... टैरिफ से हुई कमाई ट्रंप ने इस जंग में खूब डुबाई!
Iran जंग में हुआ सबसे महंगा नुकसान F-35 नहीं था. अमेरिका ने पर्शियन गल्फ में अपना 18-20 हजार करोड़ की कीमत वाला MQ-4C Tritron (एमक्यू-4सी ट्राइटन) गंवा दिया है. एक अकेले ड्रोन की कीमत दो F-35 विमानों के बराबर है. ये एक ऐसा ड्रोन है जो बहुत अधिक ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन की निगरानी करता है.

ईरान की जंग में अमेरिका ने अपने कई शानदार हथियार गंवा दिए हैं. यहां तक कि उसके सबसे एडवांस फाइटर जेट F-35 तक को हिट करने का दावा ईरान ने किया. इस जेट की कीमत 900 मिलियन डॉलर (लगभग 9 हजार करोड़ रुपये) है. लेकिन अब जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक जंग में हुआ सबसे महंगा नुकसान F-35 नहीं था. अमेरिका ने पर्शियन गल्फ में अपना 18-20 हजार करोड़ की कीमत वाला MQ-4C Tritron (एमक्यू-4सी ट्राइटन) गंवा दिया है. एक अकेले ड्रोन की कीमत दो F-35 विमानों के बराबर है. ये एक ऐसा ड्रोन है जो बहुत अधिक ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन की निगरानी करता है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक ऑपरेशन के दौरान MQ-4C ड्रोन लापता हो गया था. लापता होने से पहले ड्रोन ने ‘कोड 7700 अलर्ट’ इमरजेंसी सिग्नल भेजा था. वहीं अमेरिकी नौसेना ने भी अपनी दुर्घटना रिपोर्ट में एक MQ-4C के खो जाने की पुष्टि की है. अमेरिकी नौसेना ने बताया कि नेवी का एक हाई(H) एल्टीट्यूड(A) हाई(H) इंड्योरेंस ड्रोन, पर्शियन गल्फ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय अपने नुकसानों को उनकी कीमत के आधार पर कैटेगरी में बांट देता है. इसके तहत, 2.5 मिलियन डॉलर (लगभग 20 करोड़ रुपये) के नुकसान वाली किसी भी घटना को 'क्लास A' दुर्घटना कहा जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक हाल की घटना में शामिल ड्रोन की कीमत लगभग 240–250 मिलियन डॉलर (20-22 हजार करोड़) थी. 9 अप्रैल को खबरें चलीं कि MQ-4C ड्रोन को ईरान की एयर डिफेंस फोर्सेज ने मार गिराया था. बाद में अमेरिकी नौसेना ने बाद में कहा है कि ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. लेकिन ये कोई शादी वाला ड्रोन तो है नहीं कि यूं ही गिर जाए. इसलिए इसके कारण पर सवाल उठने जायज हैं. हालांकि अमेरिकी नौसेना की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर ये नहीं बताया गया कि दुर्घटना का कारण क्या था? केवल इतना कहा गया है कि ड्रोन का एक्सीडेंट हो गया है और इसमें कोई भी घायल नहीं है.

MQ-4C Triton, अमेरिकन नेवी के सबसे आधुनिक मानवरहित निगरानी वाले सिस्टम्स में से एक है. इसे Northrop Grumman नाम की कंपनी बनाती है. ये वही कंपनी है जो B-2 बॉम्बर बनाती है. इसकी कुछ खासियतों पर नजर डालें तो-
- टाइप: मैरीटाइम निगरानी (समुद्री इलाकों में)
- मैन्युफैक्चरर: Northrop Grumman
- इंजन: Rolls Royce AE3007H
- लंबाई: 14.5 मीटर
- विंगस्पैन: 39.9 मीटर
- ऊंचाई: 4.7 मीटर
- वजन: 14,628 किलोग्राम
- क्रू: 5 ग्राउंड क्रू
- अधिकतम ऊंचाई: 50 हजार फीट
- रेंज: लगभग 13 हजार किलोमीटर
- 24 घंटे लगातार उड़ने में सक्षम
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में US का कोई निगरानी ड्रोन खो गया हो. 2019 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी, जब ईरान ने एक RQ-4A Global Hawk ड्रोन को मार गिराया था, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. हालिया जंग में भी अमेरिका ने कई ड्रोन गंवाए हैं. अमेरिका अब तक 24 MQ-9 रीपर ड्रोन गंवा चुका है. लेकिन MQ-4C Tritron का गायब होना अपने आप में अनोखी घटना है. क्योंकि एक Titron की कीमत में 9 रीपर ड्रोन आ सकते हैं. साथ ही Titron जमीन और आसमान स्थित AWACS के साथ मिलकर को-ऑर्डिनेशन में काम करता है. इसलिए ये हैरानी की बात है कि इतनी उन्नत मशीन यूं ही गायब हो गई.
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