The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Iran America meeting in Islamabad Pakistan demands unacceptable israel us war

'इस्लामाबाद में अमेरिका से बात नहीं करेंगे,' रिपोर्ट में ईरान ने पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेर दिया

Pakistan, तुर्किए और मिस्र बीते कुछ समय से America और Iran के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी में लगे हुए हैं. 29 मार्च को Islamabad में इन देशों के विदेश मंत्रियों की बीच बैठक भी हुई, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल रहा.

Advertisement
pic
4 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 4 अप्रैल 2026, 11:38 AM IST)
Iran not meet US officials in Pakistan
ईरान ने कहा कि वह पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की. इस्लामाबाद के इसमें अपने फायदे हैं. दोनों देशों के बीच डील कराकर पाकिस्तान खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज के तौर पर पेश करना चाहता है और शांति का झंडाबरदार बनना चाहता है. लेकिन अब उसके अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. ईरान ने पाकिस्तान की अगुवाई में होने वाली बातचीत में शामिल होने से कथित तौर पर इनकार कर दिया है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराने की कोशिशें एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गईं, जहां से आगे बढ़ना मुमकिन नहीं लग रहा है. इसमें दावा किया गया कि तेहरान ने इस्लामाबाद में अमेरिका से बात करने से इनकार कर दिया है. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि तनाव कम करने के लिए की जा रही कूटनीतिक कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है. 

पाकिस्तान, तुर्किए और मिस्र बीते कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी में लगे हुए हैं. 29 मार्च को इस्लामाबाद में इन देशों के विदेश मंत्रियों की बीच बैठक भी हुई, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल रहा. इस बैठक में वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत की उम्मीद जताई गई थी. लेकिन अब ऐसा होना मुश्किल लग रहा है.

WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यस्थों ने बताया कि ईरान ने उन्हें आधिकारिक तौर पर बता दिया है कि वह आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है, और यह भी कहा कि अमेरिका की मांगें कबूल करने लायक नहीं हैं.

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका, ईरान के साथ बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा था, "हम उस बातचीत में बहुत अच्छा कर रहे हैं." हालांकि उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी.

ईरान ने पहले उन दावों को खारिज कर दिया था कि वह पाकिस्तान की मदद से हो रही बातचीत में हिस्सा ले रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है और तेहरान को मध्यस्थों के जरिए सिर्फ ‘बहुत ज्यादा और गलत मांगें’ ही मिली हैं. बयान में कहा गया, 

"पाकिस्तान के मंच उनके अपने हैं. हमने उनमें हिस्सा नहीं लिया… हालांकि युद्ध को खत्म करने के लिए क्षेत्रीय अपीलों का स्वागत है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि इसे शुरू किसने किया था."

ईरान का रुख इन दिनों और भी कड़ा हो गया है. वह भविष्य में किसी भी मिलिट्री एक्शन के खिलाफ गारंटी, नुकसान की भरपाई और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर कंट्रोल की मांग कर रहा है.

ये भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका की जंग में पाकिस्तान बुरा फंसा, सिर से हटे 'बवाल', इसलिए करवा रहा डील

अगर तेहरान पड़ोसी खाड़ी देश पर हमले जारी रखता है, तो सितंबर 2025 में सऊदी अरब के साथ हुआ पाकिस्तान का रक्षा समझौता, इस्लामाबाद के लिए मुसीबत बन सकता है. इस समझौते के तहत दोनों देशों के लिए एक-दूसरे की मदद करना जरूरी है. यह जंग लंबी चलती है, तो पाकिस्तान को भी इस बात का खतरा है कि उसे भी इस लड़ाई में घसीटा जा सकता है.

वीडियो: ईरान जंग खत्म कराने के लिए चीन-पाकिस्तान के साथ क्या प्लान बना रहा?

Advertisement

Advertisement

()