आर्किटेक्ट की नौकरी छोड़ 8.4 करोड़ पाने वाला ये स्पिनर अपना डेब्यू याद नहीं रखना चाहेगा
कहानी वरुण चक्रवर्ती की जिसे मिस्ट्री स्पिनर कहा जाता है.
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वरुण चक्रवर्ती की कहानी बड़ी मजेदार है.
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पंजाब के लिए एक नया बॉलर आईपीएल में अपना डेब्यू कर रहा था. नाम है वरुण चक्रवर्ती. इनके बारे में आगे बताएंगे, मगर पहले जान लीजिए कि इनकी बात क्यों. ये जब मैच में बॉलिंग करने आये तो कोलकाता के पास पहले ओवर में मात्र एक रन आया था. इस लिहाज़ से वरुण के लिए स्टेज सेट था. वो अपनी मिस्ट्री बॉलिंग से और भी प्रेशर बना सकते थे. एक-दो विकेट निकाल देते तो सोने पे सुहागा होता. लेकिन हुआ एकदम उलटा. सुनील नारायण ने इस ओवर में 24 रन बनाए. पहली गेंद पर लिन ने सिंगल लेकर उन्हें स्ट्राइक दी थी. यानी पूरे ओवर में 25 रन आये.
सुनील ने वरुण का वेलकम छक्के से किया. अगली गेंद पर ज़ोरदार शॉट मारा लेकिन कैच वरुण से ही छूट गया. इसके बाद एक चौका और फिर लगातार 2 छक्के और भी लगे. वरुण के लिए आईपीएल करियर की शुरुआत एक बुरे सपने जैसी हो गई थी. अगले ओवर में वरुण को उथप्पा ने 2 चौके मारे. कुल 9 रन आये. हां, अपने तीसरे ओवर में वरुण ने भले 1 रन ही दिया लेकिन 15 ओवर के बाद उन्हें बॉल देना और वो भी तब जब आंद्रे रसेल बैटिंग पर थे, ये खतरे से खाली नहीं होता. ऐसे में उनके हिस्से का एक ओवर आया मंदीप सिंह के हिस्से जिसमें 6 गेंदों में 18 रन पड़ गए. कुल मिलाकर बात ये कि वरुण चक्रवर्ती का डेब्यू अच्छा नहीं रहा.

तमिलनाडु प्रीमियर लीग में शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है.
ये शौकिया था और टेनिस बॉल से खेलते थे. फिर क्रिकेट में वापस इतना रमने लगे कि नौकरी छोड़ने का मन बना लिया. वरुण ने क्रॉमबेस्ट क्रिकेट क्लब जॉइन किया और वहां फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर बन गए. मगर जब घुटने में चोट लगी और काफी वक्त तक खेलने का मौका नहीं मिला तो स्पिनर बन गए. यहां टेनिस बॉल से 18 गज की पट्टी पर गेंदबाजी करनी होती थी और ऐसे में वरुण ने अपनी स्पिन में इतनी वैरिएशन ले पैदा कर लीं कि क्रिकेट सर्किट में वरुण को मिस्ट्री स्पिनर के नाम से जाना जाने लगा. ऑफब्रेक, लेगब्रेक, गुगली, कैरम बॉल, फ्लिपर, टॉपस्पिनर और स्लाइ़डर जैसे हथियार अपनी गेंदबाजी में जोड़ने के बाद 2017-18 में सिर्फ 7 मैचों में वरुण ने 8.26 के औसत से 31 विकेट ले लिए.
तमिलनाडु प्रीमियर लीग के फाइनल में वरुण ने 16 रन देकर 3 विकेट लिए और उस मैच में ऑस्ट्रेलिया के माइक हसी ने कमेंट्री करते हुए कहा था कि वरुण चक्रवर्ती एक अलग तरह का दुर्लभ टैलंट है. बीते साल ही वरुण को चेन्नई सुपर किंग्स और केकेआर के नेट्स में बॉलिंग करने के लिए बुलाया गया था. इससे मिली सफलता के बाद वरुण को विजय हजारे ट्रॉफी के लिए तमिलनाडु की 50-ओवरों की टी में खेलने का मौका मिला जहां इस स्पिनर ने 4.23 की इकॉनमी से 9 मैचों में 22 विकेट लिए. इसी से तमिलनाडु की रणजी टीम का दरवाजा खुल गया. एक फेल क्रिकेटर से सबसे महंगे क्रिकेटर बनने का ये सफर वरुण की उस कमिटमेंट का भी नतीजा है जो उन्होंने क्रिकेट को लेकर दिखाई. साथ ही आईपीएल में एक और नाम जिसे करोड़ों मिल गए. उम्मीद कीजिए कि किंग्स इलेवन पंजाब के लिए डेब्यू तो अच्छा नहीं रहा मगर आगे वो अपनी स्पिन का जादू जरूर दिखाएं.
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सुनील ने वरुण का वेलकम छक्के से किया. अगली गेंद पर ज़ोरदार शॉट मारा लेकिन कैच वरुण से ही छूट गया. इसके बाद एक चौका और फिर लगातार 2 छक्के और भी लगे. वरुण के लिए आईपीएल करियर की शुरुआत एक बुरे सपने जैसी हो गई थी. अगले ओवर में वरुण को उथप्पा ने 2 चौके मारे. कुल 9 रन आये. हां, अपने तीसरे ओवर में वरुण ने भले 1 रन ही दिया लेकिन 15 ओवर के बाद उन्हें बॉल देना और वो भी तब जब आंद्रे रसेल बैटिंग पर थे, ये खतरे से खाली नहीं होता. ऐसे में उनके हिस्से का एक ओवर आया मंदीप सिंह के हिस्से जिसमें 6 गेंदों में 18 रन पड़ गए. कुल मिलाकर बात ये कि वरुण चक्रवर्ती का डेब्यू अच्छा नहीं रहा.
डेब्यू की बात इसलिए क्योंकि 2018 में हुई ऑक्शन में वो सबसे मंहगे बिके थे. इससे पहले कम लोगों ने इनका नाम सुना था. 20 लाख के बेस प्राइस वाले वरुण को किंग्स इलेवन पंजाब ने 8.4 करोड़ रुपए की मोटी रकम में खरीद कर सबको चौंका दिया था. साथ ही वरुण की कहानी भी काफी दिलचस्प है.तमिलनाडु के वरुण ने 13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. 17 साल की उम्र तक विकेटकीपिंग की. मगर एज-ग्रुप क्रिकेट में मौके नहीं मिल रहे थे. उधर परिवार का दबाव पड़ना शुरू हो गया कि कम से कम पढ़ाई में ही ध्यान लगा लो. तो सोचा क्यों न क्रिकेट छोड़ कुछ और किया जाए. फिर पढ़ाई में मन लगाया और आर्किटेक्चर में 5 साल की डिग्री ली और फ्रीलांस आर्किटेक्ट बनकर काम करने लगे. फिर नौकरी भी करने लगे. मगर क्रिकेट कहीं न कहीं अंदर कुलबुला रहा था. वीकेंड में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया.

तमिलनाडु प्रीमियर लीग में शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है.
ये शौकिया था और टेनिस बॉल से खेलते थे. फिर क्रिकेट में वापस इतना रमने लगे कि नौकरी छोड़ने का मन बना लिया. वरुण ने क्रॉमबेस्ट क्रिकेट क्लब जॉइन किया और वहां फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर बन गए. मगर जब घुटने में चोट लगी और काफी वक्त तक खेलने का मौका नहीं मिला तो स्पिनर बन गए. यहां टेनिस बॉल से 18 गज की पट्टी पर गेंदबाजी करनी होती थी और ऐसे में वरुण ने अपनी स्पिन में इतनी वैरिएशन ले पैदा कर लीं कि क्रिकेट सर्किट में वरुण को मिस्ट्री स्पिनर के नाम से जाना जाने लगा. ऑफब्रेक, लेगब्रेक, गुगली, कैरम बॉल, फ्लिपर, टॉपस्पिनर और स्लाइ़डर जैसे हथियार अपनी गेंदबाजी में जोड़ने के बाद 2017-18 में सिर्फ 7 मैचों में वरुण ने 8.26 के औसत से 31 विकेट ले लिए.
तमिलनाडु प्रीमियर लीग के फाइनल में वरुण ने 16 रन देकर 3 विकेट लिए और उस मैच में ऑस्ट्रेलिया के माइक हसी ने कमेंट्री करते हुए कहा था कि वरुण चक्रवर्ती एक अलग तरह का दुर्लभ टैलंट है. बीते साल ही वरुण को चेन्नई सुपर किंग्स और केकेआर के नेट्स में बॉलिंग करने के लिए बुलाया गया था. इससे मिली सफलता के बाद वरुण को विजय हजारे ट्रॉफी के लिए तमिलनाडु की 50-ओवरों की टी में खेलने का मौका मिला जहां इस स्पिनर ने 4.23 की इकॉनमी से 9 मैचों में 22 विकेट लिए. इसी से तमिलनाडु की रणजी टीम का दरवाजा खुल गया. एक फेल क्रिकेटर से सबसे महंगे क्रिकेटर बनने का ये सफर वरुण की उस कमिटमेंट का भी नतीजा है जो उन्होंने क्रिकेट को लेकर दिखाई. साथ ही आईपीएल में एक और नाम जिसे करोड़ों मिल गए. उम्मीद कीजिए कि किंग्स इलेवन पंजाब के लिए डेब्यू तो अच्छा नहीं रहा मगर आगे वो अपनी स्पिन का जादू जरूर दिखाएं.
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