लास्ट बॉल पर 7 रन चाहिए थे और फिर अंपायर ने नौकरी खोने का काम कर दिया
आईपीएल में एक और बवाल हो गया है.
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मलिंगा का बाहर जाता पैर अंपायर ने देखा ही नहीं.
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आईपीएल 2019 का सातवां मैच. दो बड़ी टीमें आमने सामने. मुंबई इंडियन्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर. यानी रोहित शर्मा बनाम विराट कोहली. पहले मैच में 70 पर ऑल आउट होने वाली विराट कोहली की टीम यहां जीत के करीब थी. पहले मुंबई ने बैटिंग की और 187 रन बना लिए. जवाब में बेंगलोर की तरफ से विराट कोहली और एबी डिविलियर्स की पारियों से टीम जीत के करीब पहुंच गई.
आखिरी ओवर यानी लास्ट 6 गेंद पर बेंगलोर को 17 रन चाहिए थे. क्रीज पर शिवम दुवे और एबी डिविलियर्स थे. मलिंगा का आखिरी ओवर था. मलिंगा ने पहली गेंद डाली. सामने शिवम दुबे. और ये लॉन्ग ऑफ की तरफ छक्का गया. जीत के लिए चाहिए थे 5 गेंदों पर 11 रन. दूसरी गेंद और शिवम ने सिंगल भागा. सामने अब डिविलियर्स थे. मलिंगा ने यॉर्कर डाली और डिविलियर्स एक ही रन ले पाए. अब तीन गेंद पर 9 रन चाहिए थे. चौथी गेंद फुल टॉस जिसे दुबे ने डीप पॉइंट की तरफ लुढ़का दिया. फिर सामने डिविलियर्स औऱ मलिंगा की फिर एक बार यॉर्कर. यहां सिर्फ एक ही रन निकला.
अब मैच यहां फंस चुका था. आखिरी गेंद पर बेंगलोर को कम से कम 6 रन चाहिए थे ये मैच बचाने के लिए. जीत के लिए 7 चाहिए थे मगर छक्का लगता तो कम से कम मैच सुपर ओवर तक चला जाता. सामने शिवम दुबे थे और मलिंगा ने फिर फुल टॉस डाली जिस पर कोई रन नहीं आया और यहां मुंबई इंडियन्स के कैंप में खुशी का माहौल था. बेंग्लोर की टीम उदास. मगर जरा रुकिए. इतने में टीम जीत की खुशी मना ही रही थी और स्टंप्स उखाड़ ली गई थी. ग्राउंड पर बड़ी स्क्रीन पर रिप्ले दिखाया गया. और इसे देख कर सब चौंक गए. मलिंगा की ये आखिरी गेंद नो बॉल होनी चाहिए थी क्योंकि उनका पैर लाइन से बाहर था. ये बहुत बहुत बहुत बड़ा अंपायरिंग ब्लंडर था. ऑन फील्ड अंपायर ने पैर पर ध्यान ही नहीं दिया. अगर इसे नो बॉल दिया जाता तो बेंगलोर को एक अतिरिक्त रन मिलता, साथ में फ्री हिट और फिर आखिरी गेंद पर मैच पलट सकता था. मगर चूंकि स्टंप्स उखाड़ ली गईं थी, इस पर कोई एक्शन नहीं लिया जा सकता था.
अब जो भी हो. यहां फील्ड अंपायर की जितनी जिम्मेदारी थी. थर्ड अंपायर भी उतने ही जिम्मेदार हैं. वो कॉल ले सकते थे. मगर लिया नहीं गया. क्रिकेट के जानकार अब इस तरह के लैप्स से बचने से लिए यही सलाह दे रहे हैं कि फील्ड अंपायर से गेंदबाज का पैर देखने की जिम्मेदारी ले ली जानी चाहिए. ताकि वो सिर्फ सामने ध्यान दें. कोई एक डेडिकेटेड कैमरा लाइन पर लगे जो गेंदबाज का पैर बाहर जाता अलर्ट करे. या फिर कोई ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो कि लाइन से पैर बाहर जाते ही सिग्नल दे. खैर, जो भी हो कोहली की टीम इस एक बॉल से मैच हार गई. आप इस पूरे अंपायरिंग एरर पर क्या सोचते हैं, कमेंट करके जरूर बताएं.
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अपने दोनों मैच हारने वाले कोहली की इस पर रिएक्शन जानने लायक थी. वो गुस्से से तमतमा रहे थे. कोहली ने प्रजेंटेशन सेरेमनी में कहा- हम लोग आईपीएल लेवल पर खेल रहे हैं. कोई क्लब क्रिकेट नहीं हो रही है. इस तरह की गलतियां खेल के लिए सही नहीं हैं. ये एक इंच की नो-बॉल थी. अंपायरों को फील्ड पर खड़े होकर और तेज और ध्यान रखने की जरूरत है." कोहली की इन बातों को खूब समर्थन मिल रहा है. मिलना भी चाहिए क्योंकि आईपीएल में अंपायरों का स्तर काफी लो है. खास तौर पर इंडियन अंपायरों का. इसी मैच में जसप्रीत बुमराह की एक गेंद को वाइड दिया गया था जो असल में वाइड नहीं थी और इसे रोहित शर्मा ने प्रजेंटेशन सेरेमनी में बताया भी.This incident will hasten the process of checking the line on every ball bowled. Before the next ball is bowled, the 3rd umpire checks the legality of the previous one. Won't hold up play, there are locked off cameras anyway, will only take a few secs while normal activity is on.
— Harsha Bhogle (@bhogleharsha) March 28, 2019
अब जो भी हो. यहां फील्ड अंपायर की जितनी जिम्मेदारी थी. थर्ड अंपायर भी उतने ही जिम्मेदार हैं. वो कॉल ले सकते थे. मगर लिया नहीं गया. क्रिकेट के जानकार अब इस तरह के लैप्स से बचने से लिए यही सलाह दे रहे हैं कि फील्ड अंपायर से गेंदबाज का पैर देखने की जिम्मेदारी ले ली जानी चाहिए. ताकि वो सिर्फ सामने ध्यान दें. कोई एक डेडिकेटेड कैमरा लाइन पर लगे जो गेंदबाज का पैर बाहर जाता अलर्ट करे. या फिर कोई ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो कि लाइन से पैर बाहर जाते ही सिग्नल दे. खैर, जो भी हो कोहली की टीम इस एक बॉल से मैच हार गई. आप इस पूरे अंपायरिंग एरर पर क्या सोचते हैं, कमेंट करके जरूर बताएं.
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