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पठानकोट की एक्सक्लूज़िव रिपोर्ट : हमले के वक़्त भाग गए थे कुछ कमांडो

7 जवान हुए थे शहीद. 3 दिन चला था ऑपरेशन

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20 जून 2017 (अपडेटेड: 20 जून 2017, 12:44 PM IST)
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साल 2016 की पहली रात. 2 तारीख लग चुकी थी. पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हुआ. ऑपरेशन 3 दिन तक चला, तब जाकर एयरबेस को पूरी तरह मुक्त कराया गया. ऑपरेशन में 7 जवान शहीद हुए. इस पूरे वाकये की इंटर्नल इन्वेस्टिगेशन चल रही थी. ये इन्वेस्टिगेशन पूरी हुई और इसकी रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि काफी जानों को बचाया जा सकता था अगर सुरक्षा व्यवस्था में कुछ कमियां न होतीं. ये रिपोर्ट इंडिया टुडे के हाथ लगी और उन्हीं से हवाले से जानकारी मिली है. रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि अटैक से बचने के जुगाड़ में कमी थी और प्लानिंग ढंग से नहीं की गई थी. इसीलिए इतनी परेशानी हुई. जानें बचाई जा सकती थीं और ऑपरेशन 3 दिन से पहले भी खतम किया जा सकता था. इंडियन एयर फ़ोर्स ने पहले जांच का आदेश नहीं दिया था लेकिन फिर पीएम मोदी की नाराज़गी देखते हुए ऐसा करने के लिए कदम उठाना पड़ा. जांच एयर वाइस-मार्शल अमित देव से कराई गई. जो सबसे बड़ी बात जांच रिपोर्ट में सामने आई वो थी कि वहां पर बेसिक सिक्योरिटी प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किये गए थे. इसकी मुख्य ज़िम्मेदारी एयरबेस के बड़े ऑफिसर्स पर डाली गई. हमले से पहले ही ये इनपुट्स मिल चुके थे कि आतंकी एक हमले की तैयारी कर रहे हैं. ये इनपुट्स काफी सटीक भी थे. इसके बावजूद एयरबेस की सुरक्षा को बढ़ाया नहीं गया और न ही अटैक से निपटने के लिए प्लानिंग की गई. अटैक के दो महीने बाद अटैक के वक़्त एयरबेस के कमांडर एयर कमाडोर जे एस धमून का ट्रांसफर कर दिया गया था. इंडियन एयर फ़ोर्स की जांच में सवालों के घेरे में आने की वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. कहा ये भी जा रहा है कि कई और जवान और ऑफिसर्स अपने पद खो सकते हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2000 एकड़ में फैले एयरबेस में सिक्योरिटी की नज़र से खूब प्रॉब्लम थीं. इसके अलावा जो स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर फॉलो किये जाते हैं, उनमें भी चूक हुई. इसकी वजह से आतंकी बड़ी आसानी से एयरबेस में घुस आये. और उन्हें खुद को छुपाने में काफी आसानी हुई. जो एयरबेस था उसके चारों ओर पेड़ पौधे थे. उनकी कटाई-छंटाई नहीं हुई. उन्हीं के सहारे आतंकी अन्दर घुसे. वहां उगी झाड़ में उन्होंने खुद को छुपाये रखा. उनकी लटकाई हुई रस्सियां भी नहीं पहचानी जा सकीं और उनके छोड़े कपड़े और खाने भी वक़्त रहते नहीं पाए जा सके. इसके अलावा घुसपैठ पर नज़र रखने के लिए एयरबेस के पास फ्लड लाइट्स थीं जो हमले के वक़्त सही काम नहीं कर रही थीं. इसके साथ ही जो सबसे हैरान करने वाली बात है वो ये है कि क्रैक कमांडो टीम के कई मेम्बर्स गोलीबारी के वक़्त भाग गए थे.

गरुण कमांडो जम्मू-कश्मीर में होगी तैनात

इंडियन एयरफ़ोर्स के स्पेशल दस्ते 'गरुण कमांडो' ने पठानकोट एयरबेस पर हुए अटैक में सबसे पहले आतंकियों का सामना किया था. इन्हें अब जम्मू कश्मीर में ऐंटी-टेरर ऑपरेशन के लिए तैयार किया जायेगा और उन्हें वहां तैनात किया जायेगा. ये फैसला भी एयरबेस पर हुई जांच रिपोर्ट के बाद ही लिया गया है.

पठानकोट हमले की इनसाइड स्टोरी और कुछ बातें

-जैश ए मोहम्मद के 6 आत्मघाती आतंकी 30 दिसंबर को गुरदासपुर से लगी सरहद से भारत की सीमा में दाखिल हुए. ये आतंकी लैंड क्रुजर और पजेरो गाड़ी से पठानकोट एयर बेस पहुंचे. -सभी आतंकी आत्मघाती थे और भारी गोला बारूद से लैस थे. ये आतंकी पाकिस्तान के बहावलपुर से ट्रेनिंग लेकर आए और अल रहमान ट्रस्ट से जुड़े हैं. इनके हैंडलर मौलाना अशफाक अहमद और हाजी अब्दुल शकूर हैं जिनसे ये लगातार बात कर रहे थे. जबकि पिछले 6 महीने से ये आतंकी इस हमले की ट्रेनिंग कर रहे थे. -इन 6 आतंकियों को पठानकोट में वायुसेना स्टेशन पर हमले का टास्क दिया गया था. इनकी योजना आत्मघाती विस्फोट से वायुसेना के विमानों को उड़ाने की थी. -इनके पास एके 47, हैंड ग्रेनेड, जीपीएस सिस्टम समेत भारी गोला बारूद मौजूद था. इसके लिए इन्होंने लैंड क्रुजर और पजेरो गाड़ी का इस्तेमाल किया.लेकिन ख़ुफ़िया और सुरक्षा एजेंसियों को इस ऑपरेशन की जानकारी समय रहते मिल गयी और ऐसे में ये आतंकी बड़ा हमला करने में सफल नहीं हो पाए. -साल के पहले दिन शुकवार को ही एनएसए अजित डोभाल ने इस हमले को नाकाम करने के लिए वायु सेना, सेना, एनएसजी और पंजाब पुलिस को अलर्ट कर दिया था. वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख एयर मार्शल एस बी कल रात ही पठानकोट पहुंच गए थे.
गिरफ्तार फौजी यहीं करता था काम हमले से कुछ दिन पहले एयरफोर्स के पूर्व फौजी के रंजीत को ISI के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. के रंजीत इसी एयरफोर्स स्टेशन में काम करता था. पठानकोट में सेना के ऑपरेशन की निगरानी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल कर रहे थे. दिल्ली में IB, सेना प्रमुख समेत सुरक्षा एजेंसियों की हाईप्रोफाइल मीटिंग हुई. ISI ने कहा था, बड़े हमले करो? हमले से पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठनों की बैठक हुई थी. इसमें ISI ने आतंकी गुटों से जम्मू-कश्मीर और पंजाब में बड़े हमले करने को कहा था और इसके लिए फंड भी मुहैया कराया था. पठानकोट में रखे जाते हैं बड़े हथियार पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन इंडिया के लिए मायने रखता है. यहां सेना के बड़े हथियार रखे जाते हैं. युद्ध होने पर यहीं से रणनीति बनाई जाती है. मिग-21 लड़ाकू विमानों के लिए ये बेस स्टेशन है.

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