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इंफोसिस फाउंडर नारायणमूर्ति का अपनी बेटी को खुला खत

'जिंदगी में मिलने वाली कुछ खुशियां हमें सादगी से ही मिल जाती हैं.' पढ़िए पूरा खत हिंदी में:

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फोटो - thelallantop
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विकास टिनटिन
28 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 28 अप्रैल 2016, 05:32 AM IST)
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मां. हमारी सबसे प्यारी दोस्त. बच्चों से प्यार की बात करते ही मां का ख्याल पहले आता है. ज्यादातर मौकों पर मां की तुलना में बच्चों का प्यार पापा को कम ही नसीब हो पाता है. एक बेवजह की दूरी बनी रहती है. हिचक कह लीजिए. लेकिन इसका ये मतलब तो कतई नहीं कि पापा अपने बच्चों से प्यार नहीं करते. या बच्चे अपने पापा से मुहब्बत नहीं करते हैं. ऐसे ही एक पापा हैं. इंफोसिस के फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति. नारायण ने अपनी बेटी अक्षता को एक खूबसूरत खत लिखा है. ये खत सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हम आपको उसी खत को पढ़ाए देते हैं.
अक्षता, मैंने कभी नहीं सोचा था कि पिता बनने से मेरी जिंदगी कई मायनों में इतना बदल जाएगी. तुम्हारे आने से मेरी जिंदगी काफी हद तक बदल गई. तुम्हारे पैदा होने के बाद से मैंने हर इंसान से ज्यादा सेंसेटिव होकर बात करनी की जरूरत महसूस की. क्योंकि एक रोज तुम्हें बड़ा होना था. और मैं ये नहीं चाहता था कि तुम्हें कभी ये मालूम हो कि मैंने कुछ गलत किया. तब जब हमने इंफोसिस कंपनी को शुरू किया था. तब हम पर इतने पैसे नहीं थे. उसी दौर में एक बार स्कूल के एक जरूरी इवेंट में तुम नई ड्रैस खरीदे जाने की वजह से शामिल नहीं हो पाई थीं. तुम परफॉर्म नहीं कर पाई थीं. तब हमने महसूस किया था कि तुम्हें शायद अच्छा न लगा हो. पर हमें मालूम है तुमने उस रोज, उस आपबीती से कुछ जरूर हासिल किया होगा. अब जब हम पर अच्छी खासी दौलत है, तब भी हमारा लाइफ स्टाइल वैसा ही है, जैसे पहले थे. मुझे याद आता है एक किस्सा, जब मैं तुम्हारी मां से तुम्हें और तुम्हारे भाई रोहन को कार से स्कूल भेजने के बारे में बात कर रहा था. तब तुम्हारी मां ने कार की बजाय ऑटोरिक्शा से ही तुम दोनों को स्कूल भेजने की बात कही. तुम्हारे उस ऑटोवाले अंकल के ऑटो में कुछ अच्छे दोस्त बने. जिंदगी में मिलने वाली कुछ खुशियां हमें सादगी से ही मिल जाती हैं. फ्री में मिलने वाली खुशियां.
तुम्हारी मां ने ये तय कर रखा था कि हमारे घर में टीवी नहीं होगा. क्योंकि उसे ऐसा लगता था कि इससे तुम लोगों की पढ़ाई और बात करने वाला टाइम वेस्ट होगा. घर में टीवी न होने को लेकर तुम मुझसे अक्सर बहस किया करती कि घर में टीवी क्यों नहीं है. तब जब तुम्हारे ज्यादातर दोस्तों की बातें टीवी से जुड़ी हुआ करती होंगी. तुम्हारी मां मानती थीं कि ऐसी तमाम चीजें हैं, जिन्हें सीखने की जरूरत है. हम रोज रात 8 से 10 का वक्त घर में एक साथ बिताते थे.
इस बारे में सब जानते हैं कि जब एक बेटी की शादी होती है तो एक बाप मिक्स फीलिंग से भरा होता है. वो इस बात से नफरत करता है कि उसकी बेटी की जिंदगी में कोई और भी है, जिससे वो अपने प्यार शेयर करेगी. एक स्मार्ट, कॉन्फिडेंट, जवान आदमी, जिसे वो सारी अटेंशन मिलेगी, जो अब तक सिर्फ बेटी के पिता को मिलती थी. मुझे भी थोड़ी उदासी और जलन हुई थी, जब तुमने बताया था कि तुम्हें अपना जीवन साथी ऋषि मिल गया है. मैं जब ऋषि से मिला, तो मैंने उसे वैसा ही पाया जैसा तुमने बताया था. स्मार्ट, ब्रिलियंट, हैंडसम और सबसे जरूरी बात. ईमानदार, जिसकी वजह से तुमने उसे अपना दिल चुराने दिया.
मैं इसके बाद ही तुम्हारा मेरे को मिलने वाला प्यार ऋषि से साझा कर पाया. कुछ महीने पहले तुमने मुझे प्राउड नाना बनाया. तुम्हें पहली बार बांहों में लेने की खुशी जिस तरह अद्भुत थी, ठीक उसी तरह तुम्हारी बेटी अपनी प्यारी नातिन कृष्णा को गोद लेना मेरे लिए एकदम अलग खुशियों से भरा पल था. मैं अब इस बात को महसूस करने लगा हूं कि मैं बूढ़ा हो रहा हूं. पर मुझे इसमें भी एक बोनस दिखता है. नाना बनने का बोनस. मेरे पास इस बात की खुशी है कि मैं एक चिड़चिड़ाते बच्चे को प्यार से खिला पाता हूं.
अब जब तुम अपनी जिंदगी की जीते हुए टारगेट्स को पूरा करने में लगी हुई हो, तब एक बात याद रखना. हमारे रहने का सिर्फ एक ठिकाना है, वो है ये प्लैनट. जहां हम सबको रहना है. लेकिन ये प्लैनेट फिलहाल कुछ मुसीबतों से घिरा हुआ है. तब मैं चाहता हूं कि तुम एक बात याद रखना. और ये तुम्हारी जिम्मेदारी है कि तुम हमारे इस प्लैनट को कृष्णा को बेहतर कंडीशन में दो. ठीक वैसे ही जैसे हमने तुम्हें दिया था. अपना ख्याल रखना मेरी प्यारी बच्ची

खूब सारा प्यार अप्पा


(ये खत 'सुधा मेनन लेगेसी: मशहूर हस्तियों को बेटियों को लिखे खत' में पहली बार छापा गया था.)

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