इंडोनेशिया की सुनामी में करीब 300 की मौत, परफॉर्म कर रहा बैंड बह गया
ये सुनामी भूकंप की वजह से नहीं, ज्वालामुखी की वजह से आई.
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ये अनक क्रिकटोवा ज्वालामुखी की हवाई तस्वीर है. फिलहाल जो पता है, उसके मुताबिक इस ज्वालामुखी का एक हिस्सा टूटकर समंदर में गिरा. इसी वजह से सुनामी आई. चूंकि अंडरवॉटर लैंडस्लाइड के कारण सुनामी आई, इस वजह से पहले से कोई वॉर्निंग सिग्नल भी नहीं मिला(फोटो: रॉयटर्स)
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22 दिसंबर. रात के तकरीबन साढ़े नौ बजे का वक़्त था. शनिवार की रात. अगले दिन इतवार की छुट्टी. वो भी क्रिसमस वाले हफ़्ते में. इंडोनेशिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले दो द्वीप हैं- पश्चिमी जावा और सुमात्रा. यहां खूब सारे लोग घर से बाहर निकलकर मौज-मस्ती कर रहे थे. एकाएक समंदर की ऊंची-ऊंची लहरें किनारे आईं. ये आम दिनों की लहरें नहीं थीं. सुनामी थी. सुनामी ख़त्म होने के बाद से ही लाशें निकल रही हैं. मरने वालों की तादाद 281 तक पहुंच गई है. ये संख्या और बढ़ सकती है. लगभग 1,000 लोग जख्मी हुए हैं. सैकड़ों इमारतें बर्बाद हो गई हैं. कई लोग लापता हैं.

अनक क्रिकटोवा सुमात्रा और जावा द्वीपों के बीच में पड़ता है. पिछले कुछ महीनों से ये ज्वालामुखी सुलग रहा था. इसमें से लावा और धुआं बाहर आ रहा था. ये फोटो 23 दिसंबर को ली गई थी, सुनामी आने के कुछ घंटों बाद (फोटो: रॉयटर्स)
अनक क्रिकटोवा कैसे बना? इंडोनेशिया की एक प्रमुख भाषा है मलय. इसमें 'अनक क्रिकटोवा' का मतलब होता है क्रिकटोवा का बच्चा. ये ज्वालामुखी क्रिकटोवा ज्वालामुखी से बना है. 1880 के दशक में क्रिकटोवा ज्वालामुखी फटा था. उसके फटने का जोर इतना था कि उसका फोर्स ऑस्ट्रेलिया तक महसूस हुआ लोगों को.
2018 का साल बुरा रहा इंडोनेशिया के लिए आपदाओं और दुर्घटनाओं के लिहाज से 2018 का साल इंडोनेशिया के लिए बहुत बुरा रहा. भूकंप, बाढ़, प्लेन क्रैश बहुत सारे हादसे हुए. इन सबमें साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए. 28 सितंबर को इंडोनेशिया में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था. इसकी वजह से भी सुनामी आई. 2,000 से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई. तकरीबन साढ़े चार हज़ार लोग गंभीर घायल हुए. 15 लाख के करीब लोगों पर इसका असर पड़ा. जुलाई और अगस्त में भी कई भूकंप आए यहां. 2004 में जब भारत के आम लोगों की डिक्शनरी में पहली बार सुनामी शब्द जुड़ा था, तब इसके आने की तारीख थी 26 दिसंबर. हिंद महासागर में आई उस सुनामी का असर 14 देशों पर पड़ा था. इसमें तकरीबन 2,26,000 लोग मारे गए थे. सवा लाख के लगभग मौतें तो अकेले इंडोनेशिया में ही हुई थीं.

अनक क्रिकटोवा किनारे के इतना पास है कि अगर वॉर्निंग मिल भी जाती, तब भी शायद लोग किनारे वाले इलाकों को खाली नहीं कर पाते. इस तस्वीर में राहत और बचावकर्मी मलबों में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)
सुनामी आती कैसे है? ज़्यादातर तो सुनामी समंदर में आती है. मगर ये खाड़ी या फिर किसी बड़ी झील में भी आ सकती है. सुनामी आने की स्थिति में होता ये है कि वॉटर बॉडी का बहुत ज़्यादा तादाद में पानी इधर-उधर हो जाता है. मतलब अपनी जगह से हटकर छितरा जाता है. फिर बहुत जोर से वो सारा पानी किनारे की तरफ दौड़ता है. बहुत ऊंची-ऊंची लहरें आती हैं. इन लहरों में भयंकर फोर्स होता है.
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भूकंप नहीं आया, तो फिर सुनामी क्यों आई? सुनामी से हुई तबाही के पीछे एक ज्वालामुखी को वजह बताया जा रहा है. इस वोल्केनो का नाम है अनक क्रिकटोवा. वैज्ञानिकों का कहना है कि सुनामी से कुछ मिनट पहले इसका एक बड़ा हिस्सा टूटकर समंदर में गिरा. इसकी वजह से लहरें और तेज, और ऊंची हो गईं. इसके लिए वैज्ञानिक टर्म है अंडरवॉटर लैंडस्लाइड. जब जमीन (इस केस में ज्वालामुखी का टुकड़ा) का हिस्सा टूटकर समंदर में गिरता है, तो वो उस जगह समंदर की सतह को दूसरी जगह ट्रांसफर कर देता है. इसकी वजह से बहुत जोर की लहरें उठती हैं. ये जो अनक क्रिकटोवा है, वो जावा और सुमात्रा के बीच में पड़ता है. पिछले कुछ महीनों से इसके अंदर से राख और लावा निकल रहा था.The Latest: Death toll from an Indonesian tsunami rises past 280, with more than 1,000 people injured. https://t.co/uaWbNWHDxB
— The Associated Press (@AP) December 24, 2018
सुनामी की कोई वॉर्निंग नहीं थी सुनामी आने से करीब 24 मिनट पहले ये ज्वालामुखी फूटा. अभी जो पता है, उसके मुताबिक शायद यही वजह रही लैंडस्लाइड की. चूंकि ये सुनामी ज्वालामुखी फटने की वजह से आया, न कि भूकंप के कारण. शायद इसीलिए इसकी कोई पूर्व सूचना भी नहीं थी. किनारे पर रहने वालों को कुछ भी ऐसा नहीं दिखा, जिससे उन्हें सुनामी का आभास होता. आमतौर पर भूकंप के झटकों के बाद लोग सावधान हो जाते हैं. वॉर्निंग जारी हो जाती है. इलाका खाली करवा लिया जाता है. लैंडस्लाइड से होने वाले सुनामी के संकेत पहले से मिल जाएं, ऐसा कोई सिस्टम नहीं है. बाकी बातें इस हादसे से जुड़े ब्योरे आने पर पता चलेंगी.#NewsUpdate
— All India Radio News (@airnewsalerts) December 24, 2018
: Death toll from volcano-triggered tsunami in #Indonesia
rises to 281.#IndonesiaTsunami
pic.twitter.com/rEFPl6vG7A

अनक क्रिकटोवा सुमात्रा और जावा द्वीपों के बीच में पड़ता है. पिछले कुछ महीनों से ये ज्वालामुखी सुलग रहा था. इसमें से लावा और धुआं बाहर आ रहा था. ये फोटो 23 दिसंबर को ली गई थी, सुनामी आने के कुछ घंटों बाद (फोटो: रॉयटर्स)
अनक क्रिकटोवा कैसे बना? इंडोनेशिया की एक प्रमुख भाषा है मलय. इसमें 'अनक क्रिकटोवा' का मतलब होता है क्रिकटोवा का बच्चा. ये ज्वालामुखी क्रिकटोवा ज्वालामुखी से बना है. 1880 के दशक में क्रिकटोवा ज्वालामुखी फटा था. उसके फटने का जोर इतना था कि उसका फोर्स ऑस्ट्रेलिया तक महसूस हुआ लोगों को.
2018 का साल बुरा रहा इंडोनेशिया के लिए आपदाओं और दुर्घटनाओं के लिहाज से 2018 का साल इंडोनेशिया के लिए बहुत बुरा रहा. भूकंप, बाढ़, प्लेन क्रैश बहुत सारे हादसे हुए. इन सबमें साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए. 28 सितंबर को इंडोनेशिया में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था. इसकी वजह से भी सुनामी आई. 2,000 से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई. तकरीबन साढ़े चार हज़ार लोग गंभीर घायल हुए. 15 लाख के करीब लोगों पर इसका असर पड़ा. जुलाई और अगस्त में भी कई भूकंप आए यहां. 2004 में जब भारत के आम लोगों की डिक्शनरी में पहली बार सुनामी शब्द जुड़ा था, तब इसके आने की तारीख थी 26 दिसंबर. हिंद महासागर में आई उस सुनामी का असर 14 देशों पर पड़ा था. इसमें तकरीबन 2,26,000 लोग मारे गए थे. सवा लाख के लगभग मौतें तो अकेले इंडोनेशिया में ही हुई थीं.
बैंड गाना बजा रहा था, सुनामी आई और लोगों को बहा ले गई न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में एक रॉक बैंड 'सेवेन्टीन' का ज़िक्र है. जब सुनामी आई, तो ये बैंक समंदर किनारे परफॉर्म कर रहा था. वो उस शाम की परफॉर्मेंस का दूसरा गाना बजा ही रहे थे कि स्टेज के पीछे से करीब 10 फुट ऊंची लहरें आईं. ड्रमर, उसके ड्रम, बैंड के बाकी लोगों को स्टेज समेत बहाते हुए लहरें सामने बैठे दर्शकों की तरफ बढ़ीं. और सबको बहाकर ले गईं. बैंड के दो लोग- बेस प्लेयर और मैनेजर मारे जा चुके हैं. बैंड से जुड़े चार लोग अभी लापता हैं. इस प्रोग्राम को देख रहे करीब 14 लोगों की मौत हुई है.Unthinkable devastation from the tsunami disaster in Indonesia. More than two hundred dead and nearly a thousand injured or unaccounted for. We are praying for recovery and healing. America is with you!
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) December 23, 2018

अनक क्रिकटोवा किनारे के इतना पास है कि अगर वॉर्निंग मिल भी जाती, तब भी शायद लोग किनारे वाले इलाकों को खाली नहीं कर पाते. इस तस्वीर में राहत और बचावकर्मी मलबों में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)
सुनामी आती कैसे है? ज़्यादातर तो सुनामी समंदर में आती है. मगर ये खाड़ी या फिर किसी बड़ी झील में भी आ सकती है. सुनामी आने की स्थिति में होता ये है कि वॉटर बॉडी का बहुत ज़्यादा तादाद में पानी इधर-उधर हो जाता है. मतलब अपनी जगह से हटकर छितरा जाता है. फिर बहुत जोर से वो सारा पानी किनारे की तरफ दौड़ता है. बहुत ऊंची-ऊंची लहरें आती हैं. इन लहरों में भयंकर फोर्स होता है.
किन वजहों से आती है सुनामी? सबसे ज़्यादा तो भूकंप के कारण. भूकंप में जब ज़मीन हिलती है, तो समंदर का पानी छिटक जाता है. सुनामी ज्वालामुखी के कारण भी आता है. मानो ज्वालामुखी फट जाए और खूब सारा लावा निकले. या ज्वालामुखी का कोई हिस्सा टूटकर समंदर में जा गिरे. इस लैंडस्लाइड के कारण खूब सारा पानी डिस्प्लेस हो जाएगा. फिर ये पानी ऊंची-ऊंची लहरों की शक्ल में पूरे फोर्स से साथ सुनामी बनकर आएगा.#UPDATE
— AFP news agency (@AFP) December 24, 2018
The death toll from a volcano-triggered tsunami in Indonesia has risen to 281, with more than 1,000 people injured, according to the national disaster agency https://t.co/X0uXwmIy2F
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