आदमी बन गए डिब्बे और कोलकाता की गलियों में दौड़ पड़ी ट्रेन!
ट्रेन चली है फड़क फड़क. रेल बजट से पहले याद आई 'छुक छुक गाड़ी'. जिसे दौड़ाया था पीयूष पांडेय ने.
Advertisement

फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
रेल बजट की बात चली तो एक ऐड याद आ गया, इंडिया अभी दोबारा क्रिकेट वर्ल्डकप नहीं जीता था. 2010 था शायद. एक ऐड आया करता था टीवी पर. कोलकाता की गलियां, कोलकाता के घर और उनके बीच छुक-छुक कर दौड़ती ट्रेन. ट्रेन भी वो वाली नहीं. आदमियों की ट्रेन. एक-दूसरे का कंधा पकड़ छुक-छुक बढ़े जाते. और पीछे गाना बजता.
रेलगाड़ी रेलगाड़ी छुक-छुक छुक-छुक धड़क धड़क, लोहे की सड़कhttps://www.youtube.com/watch?v=rzEKCYb6zzU बाद में पता लगा इसके पीछे पीयूष पांडेय का दिमाग था. अब क्योंकि ऐड में दादामुनि की आवाज सुनाई गई. और हमने पहले भी सुना था तो पता था गाना पहले का है. कब का है कहां का है? 1964 में आशीर्वाद फिल्म आई थी, उसी का गाना है. https://www.youtube.com/watch?v=TcLrPIE_18o
रेल गाड़ी रेल गाड़ी छुक-छुक छुक-छुक छुक-छुक छुक-छुक बीच वाले स्टेशन बोलें रुक रुक रुक रुक रुक रुक रुक रुक धड़क भड़क लोहे की सड़क धड़क भड़क लोहे की सड़क यहां से वहां वहां से यहां यहां से वहां वहां से यहां छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक फुलाये छाती पार कर जाती बालू रेत आलू के खेत बाजरा धान बुड्ढा किसान हरा मैदान मन्दिर मकान चाय की दुकान पुल पगडण्डी टीले पे झण्डी पानी के कुण्ड पंछी के झुण्ड झोपड़ी झाड़ी खेती बाड़ी बादल धुआं मोठ कुआं कुएं के पीछे बाग़ बगीचे धोबी का घाट मंगल की हाट गाँव में मेला भीड़ झमेला टूटी दिवार टट्टू सवार रेल गाड़ी रेल गाड़ी छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक छुक बीच वाले स्टेशन बोलें रुक-रुक रुक-रुक रुक-रुक रुक-रुक धरमपुर भरमपुर भरमपुर धरमपुर मैंगलोर बैंगलोर बैंगलोर मैंगलोर माण्डवा खंडवा खांडवा माण्डवा रायपुर जयपुर जयपुर रायपुर तालेगाँव मालेगाँव मालेगाँव तालेगाँव बेल्लुर वेल्लुर वेल्लुर बेल्लुर शोलापुर कोल्हापुर कोल्हापुर शोलापुर हुक्कल डिण्डीगल डिण्डीगल हुक्कल मस्लिपत्नम मस्लिपत्नम ऊंगोल निथिगोल निथिगोल ऊंगोल कोरेगाँव गोरेगाँव गोरेगाँव कोरेगाँव ममदाबाद अमदाबाद अमदाबाद ममदाबाद शोल्लुर कोन्नुर शोल्लुर कोन्नुर

