PM मोदी के सामने एक पत्रकार की तीखी स्पीच वायरल
'सरकार की तरफ से की गई आलोचना हमारे लिए इज़्ज़त की बात है.'
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फोटो - thelallantop
यह बात किसी पश्चिमी विद्वान के नाम से भी लिखी जा सकती थी, पर फिलहाल इस अदने पत्रकार ने अपनी तरफ से लिख दी है. अपनी राय और सदिच्छा तो ये है कि पत्रकारिता का मूल विचार ही पार्टी निरपेक्ष और सत्ता के विरुद्ध होता है. सरकार अपनी पीठ खुद ठोंक लेती है. टांग हमें खींचनी है.
नई दिल्ली में बुधवार को पत्रकारिता के रामनाथ गोयनका पुरस्कार बांटे गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीफ गेस्ट थे और उन्हें अपने हाथों से कुछ पत्रकारों को उनकी बीजेपी विरोधी रिपोर्टों के लिए अवॉर्ड देना पड़ा. पत्रकार और लेखक अक्षय मुकुल को भी अवॉर्ड मिलना था, लेकिन वो नहीं पहुंचे. उन्होंने इस प्रोग्राम का बायकॉट ये कहते हुए पहले ही कर दिया था कि मैं खुद को नरेंद्र मोदी के साथ एक फ्रेम में नहीं देख सकता.
लेकिन ये इस प्रोग्राम की सबसे यादगार बात नहीं रही. सबसे यादगार थी, प्रोग्राम के अंत में आभार जताते हुए कही गई चार-आठ बातें. ये थे गोयनका ग्रुप के अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के एडिटर राजकमल झा. उन्होंने बायकॉट के बजाय संवाद का रास्ता चुना और प्रधानमंत्री के सामने कुछ दो-टूक बातें कहीं, अपनी एक छोटी सी स्पीच में.
राजकमल झा प्रोग्राम के आखिर में आभार जताने आए थे, प्रधानमंत्री के बोलने के ठीक बाद. उन्होंने अंग्रेजी में अपनी बात कही. हम आपको उसका हिंदी अनुवाद पढ़वा रहे हैं. जब पत्रकार की हैसियत इस बात से तय होने लगे कि कितने मंत्री उसका फोन उठाते हैं, तब इस छोटी सी स्पीच को बारम्बार पढ़ा जाए.
नई दिल्ली में बुधवार को पत्रकारिता के रामनाथ गोयनका पुरस्कार बांटे गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीफ गेस्ट थे और उन्हें अपने हाथों से कुछ पत्रकारों को उनकी बीजेपी विरोधी रिपोर्टों के लिए अवॉर्ड देना पड़ा. पत्रकार और लेखक अक्षय मुकुल को भी अवॉर्ड मिलना था, लेकिन वो नहीं पहुंचे. उन्होंने इस प्रोग्राम का बायकॉट ये कहते हुए पहले ही कर दिया था कि मैं खुद को नरेंद्र मोदी के साथ एक फ्रेम में नहीं देख सकता.
लेकिन ये इस प्रोग्राम की सबसे यादगार बात नहीं रही. सबसे यादगार थी, प्रोग्राम के अंत में आभार जताते हुए कही गई चार-आठ बातें. ये थे गोयनका ग्रुप के अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' के एडिटर राजकमल झा. उन्होंने बायकॉट के बजाय संवाद का रास्ता चुना और प्रधानमंत्री के सामने कुछ दो-टूक बातें कहीं, अपनी एक छोटी सी स्पीच में.
राजकमल झा प्रोग्राम के आखिर में आभार जताने आए थे, प्रधानमंत्री के बोलने के ठीक बाद. उन्होंने अंग्रेजी में अपनी बात कही. हम आपको उसका हिंदी अनुवाद पढ़वा रहे हैं. जब पत्रकार की हैसियत इस बात से तय होने लगे कि कितने मंत्री उसका फोन उठाते हैं, तब इस छोटी सी स्पीच को बारम्बार पढ़ा जाए.

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