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इंडियन आर्मी ने फ़िल्मी स्टाइल में 3 आतंकियों को मार गिराया, पढ़िए कहानी

लश्कर-ए-तैयबा के इन आतंकवादियों पर कई दिनों से नज़र थी आर्मी की.

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22 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 22 जुलाई 2017, 07:36 AM IST)
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प्रतीकात्मक इमेज. सोर्स: DFI
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एक फिल्म देखी थी 'सहर'. अरशद वारसी हीरो थे. उसमें क्रिमिनल्स के मोबाइल फ़ोन्स को सर्विलांस पर लगाकर उनपर नज़र रखी जाती थी. और उसी से उनकी मूवमेंट ट्रैक कर के उनका क्लाइमेक्स में एनकाउंटर भी होता है. वो फिल्म थी. ऐसा अब असल में भी हुआ है. इंडियन आर्मी ने सर्विलांस की मदद और फ़िल्मी स्टाइल में पीछा करते हुए 'लश्कर-ए-तैयबा' के 3 आतंकवादियों को मार गिराया है. घटना कश्मीर के अरवानी इलाके की है.

कौन थे ये आतंकवादी?

इन तीन लोगों में दो लोग 'लश्कर' के एक्टिव सदस्य थे और एक उनका लोकल मददगार था. मेन मिलिटेंट शौकत लोहार नौगाम इलाके में 'लश्कर' का कमांडर था. वो 2016 में इस आतंकवादी संगठन में भरती हो गया था. उसके साथ मारा गया दूसरा शख्स मुज़फ्फर हाज़िम है. मुज़फ्फर इसी साल 'लश्कर' से जुड़ा था. ये दोनों ही 'लश्कर' के कमांडर बशीर लश्करी के सहयोगी रह चुके हैं.

सेना की ये यूनिट बड़ी करामाती है

ये सारा ऑपरेशन इंडियन आर्मी की 19 राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट ने मुमकिन कर दिखाया है. इस यूनिट के ज़िम्मे अनंतनाग का इलाका है. ये यूनिट इस एरिया में काफी असरदार रहा है. कई सारे एंटी-टेररिस्ट ऑपरेशन्स को इस यूनिट ने कामयाबी से अंजाम दिया है. अभी हाल ही में इसी यूनिट ने लश्कर के ख़तरनाक आतंकी बशीर लश्करी को मार गिराया था. सिर्फ जुलाई महीने में ही ये अब तक 11 आतंकवादियों को मार गिरा चुकी है.
प्रतीकात्मक इमेज.
प्रतीकात्मक इमेज.

कैसे घटा ये सारा ऑपरेशन?

आतंकवादियों पर नकेल कसने के लिए इस यूनिट ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की टेक्निकल सेल की मदद ली. शौकत लोहार के एक बेहद करीबी शख्स का पता लगाया गया. उसके मोबाइल फोन को intercept किया गया. उसके माध्यम से उसकी तमाम गतिविधियों पर नज़र रखी जाने लगी. वो किस-किस से बात करता है, किससे मुलाक़ात करता है वगैरह-वगैरह. ऐसी ही एक बातचीत के दौरान आर्मी को पता चला कि शौकत लोहार अरवानी में एक ख़ास जगह, एक खास दिन आने वाला है. इसके बाद 19 राष्ट्रीय राइफल्स ने उसे मार गिराने का प्लान बनाया.

पल-पल की ख़बर थी आर्मी को

हासिल जानकारी को कैश करते हुए आर्मी ने इलाके में 8 चेकिंग पॉइंट खड़े कर दिए. उन्हें एक बड़ी गाड़ी की तलाश थी, जिसमें इन तीनों के सफ़र करने की ख़बर थी. मोबाइल को लगातार ट्रेस किया जा रहा था और इस गाड़ी की मूवमेंट पर कड़ी नज़र रखी जा रही थी. लेकिन...
पहले दिन आतंकवादी बच निकलने में कामयाब हुए. वो लोग उन चेकिंग पॉइंटस के करीब तक आए ही नहीं. किसी वजह से वो दूर से ही लौट गए. फिर दूसरा दिन आया.
प्रतीकात्मक इमेज.
प्रतीकात्मक इमेज.

फुल बॉलीवुड स्टाइल में हुआ ऑपरेशन

दूसरा दिन आतंकवादियों के लिए इतना लकी नहीं रहा. एक चेक पोस्ट पर उनकी गाड़ी को घेर लिया गया. आतंकी घबराकर भागने लगे. उनके पीछे सेना की सशस्त्र गाड़ियां दौड़ पड़ीं. थोड़ी देर तक फ़िल्मी स्टाइल चेज़ करने के बाद आर्मी के एक जवान ने अपनी जीप से आतंकियों की गाड़ी को पीछे से ठोक दिया. दहशत में आए तीनों आतंकी गाड़ी से बाहर निकल आए और अपनी-अपनी एके-47 संभाले फायरिंग की मुद्रा में आ गए.
लेकीन इससे पहले कि उनकी राइफलें सीधी भी हो पाती, आर्मी के जवानों ने अपनी ऑटोमैटिक राइफलों का मुंह खोल दिया. गोलियों की बारिश कर दी तीनों पर. 5 मिनट से भी कम समय में तीनों की लाशें ज़मीन पर पड़ी थी. ऑपरेशन कामयाब हो चुका था.


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