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चीन के मद्देनजर भारतीय सेना ने लद्दाख में टैंकों से जुड़ा बड़ा काम कर दिया है

पूर्वी लद्दाख में सेना ने टैंक रिपेयरिंग के लिए दुनिया की सबसे ऊंची रिपेयरिंग वर्कशॉप शुरू की है.

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15 मई 2024 (पब्लिश्ड: 11:38 PM IST)
indian army built tank repair center at height in eastern ladakh near china border
लद्दाख में सेना ने टैंक रिपेयरिंग के लिए रिपेयरिंग वर्कशॉप शुरू की. (सांकेतिक तस्वीर- आजतक)
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भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में दो टैंक रिपेयरिंग केंद्र शुरू किए हैं. इन्हें अपनी तरह का दुनिया का सबसे ऊंचा आर्म्ड रिपेयरिंग केंद्र बताया जा रहा है. साथ ही चीन के मद्देनजर इसे सेना के एक बड़े कदम के रूप में भी देखा जा रहा है. एक रिपेयर फैसिलिटी DSSB सड़क से 148 किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख के DBO सेक्टर में बनाई गई है. वहीं दूसरा केंद्र टिश्यू एक्सिस चाइना बॉर्डर से लगभग 25 किलोमीटर दूर न्यू सेक्टर में बनाया गया है.  

इंडिया टुडे से जुड़े मंजीत सिंह नेगी की रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसिलिटी से क्षेत्र में तैनात टैंकों और अन्य लड़ाकू हथियारों को ठीक करने या उनमें जरूरी सुधार करने में मदद मिलेगी. चीन से तनाव को देखते हुए पिछले चार सालों में सेना ने बड़े पैमाने में अपनी सुरक्षा बढ़ाई है. इसमें 500 से अधिक टैंक और आईसी की तैनाती की गई है.

लद्दाख में सेना टैंक के अलावा अन्य लड़ाकू वाहनों का इस्तेमाल करती है. अत्यधिक ऊंचाई होने के कारण अभी तक उनका रखरखाव और रिपेयरिंग एक बड़ी चुनौती थी. इन दोनों रिपेयरिंग वर्कशॉप के शुरू होने से सेना की ये बड़ी समस्या हल हो जाएगी. इस नई सुविधा से टैंक की क्षमता अपडेट रहेगी. वहीं ऊबड़-खाबड़ इलाकों और माइनस 40 डिग्री से कम तापमान वाले मौसम में भी इन लड़ाकू वाहनों को आधुनिक क्षमता से लैस करने में मदद मिलेगी.

हाल ही में आर्मी प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने लद्दाख का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में तैनात टैंक और अन्य हथियारों के इंप्रूवमेंट की बात कही थी. इस दौरान उन्होंने लद्दाख के सबसे ऊंचे क्षेत्र में स्थित बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों के रखरखाव सेंटर का भी का निरीक्षण किया था. इसके बाद से इन सेंटरो के मांग तेज हो गई थी.

क्या है चीन सीमा विवाद?

चीन की सेना ने कई ऐसे इलाकों में अपनी सैन्य तैनाती कर रखी है, जिन पर भारत अपना दावा करता है. बेसिकली यही विवादों की जड़ है. भारत भी इन इलाकों की पेट्रोलिंग करता है. ये एक तरह का स्टैंड ऑफ है. यानी दोनों ही देशों की सेनाएं तैनात भी हैं और तैयार भी. 1962 से पहले ही चीन ने लद्दाख के 78 हजार वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर लिया था. सियाचिन का साढ़े तीन हजार वर्ग किलोमीटर हिस्सा और पाकिस्तान की तरफ से दी गई सक्षम घाटी चीन के कब्जे में है.

ये भी पढ़ें- क्या हैं T-90 टैंक, जिन्हें भारत ने लद्दाख में चीन सीमा पर भेज दिया है

चीन और भारत के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) है, लेकिन ये सीमा अभी नक्शे पर निर्धारित नहीं है. ये काल्पनिक रेखा है. एक LAC वो है जिसे भारत अपनी सीमा मानता है, और एक LAC चीन की है जिसे वो अपनी सीमा मानता है. ऐसे में तनाव की आशंका हमेशा बनी रहती है.

वीडियो: इंडियन आर्मी ने पूर्वी लद्दाख के चुशूल सेक्टर में चीनी सैनिक को पकड़ा

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