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रूस की आपत्ति के बावजूद भारत में बना गोला-बारूद पहुंच रहा यूक्रेन, रिपोर्ट में बड़ा दावा

रिपोर्ट की माने तो, तीन भारतीय अधिकारियों ने कहा कि रूस ने गोला बारूद के इस मुद्दे को कम से कम दो मौकों पर भारत के सामने उठाया है. इसमें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके भारतीय समकक्ष के बीच जुलाई में हुई बैठक भी शामिल है.

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indian ammunition reaching ukraine diverted by european customers despite russia protest claims report
रिपोर्ट में कई और बड़े दावे किए गए हैं. (सांकेतिक फोटो- इंडिया टुडे)
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ज्योति जोशी
19 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 07:21 PM IST)
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एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस के विरोध के बावजूद भारत में बनाया गया गोला-बारूद यूक्रेन भेजा जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस व्यापार को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है. ये दावा अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी ताजा एनालिटिकल रिपोर्ट में किया है. सूत्रों और सीमा शुल्क आंकड़ों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि रूस के खिलाफ यूक्रेन का समर्थन करने के लिए भारतीय हथियारों को एक साल से यूक्रेन में ट्रांसफर किया जा रहा है.

इस रिपोर्ट के लिए रॉयटर्स ने कई भारतीय और यूरोपीय सरकारी और रक्षा उद्योग के अधिकारियों से बातचीत की है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इन अधिकारियों ने अपना नाम ना छापने की शर्त रखी. हालांकि इस रिपोर्ट पर रूस और भारत के विदेश और रक्षा मंत्रालयों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या जवाब सामने नहीं आया है.

बता दें, रूस दशकों से भारत का प्रमुख हथियार सप्लायर रहा है. वो भारत के 60% से ज्यादा हथियारों की सप्लाई करता है. दोनों के संबंध भी अच्छे हैं. पीएम मोदी ने तीसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद अपनी पहली द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए रूस को चुना था.

रिपोर्ट की माने तो, तीन भारतीय अधिकारियों ने कहा कि रूस ने गोला बारूद के इस मुद्दे को कम से कम दो मौकों पर भारत के सामने उठाया है. इसमें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके भारतीय समकक्ष के बीच जुलाई में हुई बैठक भी शामिल है.

भारत की तरफ से सफाई!

इस साल जनवरी में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत ने यूक्रेन को गोला-बारूद ना भेजा है या ना बेचा है.

भारत सरकार के दो और रक्षा सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि भारत ने यूक्रेन में इस्तेमाल किए जा रहे गोला-बारूद की बहुत कम मात्रा का ही उत्पादन किया है. एक अधिकारी का अनुमान है कि ये युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन के इंपोर्ट किए गए कुल हथियारों का 1 परसेंट से भी कम था.

एक स्पेनिश और एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी, और सरकारी कंपनी ‘यंत्र इंडिया’ के एक पूर्व अधिकारी के मुताबिक, यूक्रेन को भारतीय युद्ध सामग्री भेजने वाले यूरोपीय देशों में इटली और चेक गणराज्य शामिल हैं. एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि भारत स्थिति पर नजर रख रहा है.

गोला-बारूद के ट्रांसफर की जानकारी रखने वाले रक्षा उद्योग के एक अधिकारी ने बताया कि भारत ने यूरोप को सप्लाई कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है.

जान लें, भारत और अमेरिका सिक्योरिटी के मामले में यूक्रेन के दो बड़े समर्थक हैं. दोनों ही देशों ने हाल में अपने रक्षा और राजनयिक सहयोग को मजबूत किया है. और ये दोनों ही देश चीन को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी भी मानते हैं. 

हालांकि अमेरिकी सरकार ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. मामले पर यूक्रेनी, इतालवी, स्पेनिश और चेक रक्षा मंत्रालयों ने भी कोई कॉमेंट नहीं किया है.

आंकड़ें क्या कहते हैं?

अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2018 और 2023 के बीच 3 बिलियन डॉलर (करीब 25 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा के हथियारों को एक्सपोर्ट किया था.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 30 अगस्त के सम्मेलन में कहा था कि डिफेंस एक्सपोर्ट पिछले फाइनेंशियल ईयर में 2.5 अरब डॉलर (20 हजार करोड़) से ज्यादा हो गया है और भारत इसे 2029 तक लगभग 6 अरब डॉलर (50 हजार करोड़) तक बढ़ाना चाहता है.

गोला बारूद बनाने के मामले में भारत की तीन मुख्य कंपनियां हैं- यंत्र, म्यूनिशन्स इंडिया और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स. सीमा शुल्क रिकॉर्ड बताते हैं कि फरवरी 2022 से पहले के दो सालों में इन तीन कंपनियों ने इटली, चेक गणराज्य, स्पेन और स्लोवेनिया को केवल 2.8 मिलियन डॉलर (23 करोड़ रुपये) के गोला-बारूद एक्सपोर्ट किए. फरवरी 2022 और जुलाई 2024 के बीच ये आंकड़ा बढ़कर 135.25 मिलियन डॉलर (एक हजार करोड़ रुपये) हो गया.

ये वही चार देश हैं, जिन्होंने यूक्रेन के लिए सप्लाय चेन में भारी निवेश किया है.

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में भारत के रक्षा विशेषज्ञ अर्जान तारापोर ने रॉयटर्स को बताया है कि भारत पर अपने हथियारों के निर्यात को बढ़ाने का प्रेशर है और ये यूक्रेन में भारतीय हथियारों के ट्रांसफर की एक प्रमुख वजह भी है.

ये भी पढ़ें- क्या ईरान के हथियारों से यूक्रेन में तबाही मची? रूस-ईरान साझेदारी की पूरी कहानी!

भारत को फायदा मिला!

छह भारतीय सूत्रों के मुताबिक, भारत हथियार इंपोर्ट करने के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है और वो यूरोप में चल रहे इस वॉर को अपने हथियार एक्सपोर्ट सेक्टर को बढ़ाने के अवसर के तौर पर देखता है. यूक्रेन के पास इस वक्त गोला बारूद की काफी कमी है.

किंग्स कॉलेज लंदन के दक्षिण एशिया सुरक्षा विशेषज्ञ वाल्टर लाडविग ने कहा है कि कम मात्रा में गोला-बारूद को डायवर्ट करना जियो पॉलिटिक्स के तौर पर भारत के लिए फायदेमंद साबित हुआ. उनके मुताबिक, इससे भारत को पश्चिम में अपने साझेदारों को ये दिखाने का मौका मिला कि वो रूस-यूक्रेन वॉर में रूस के पक्ष में नहीं है.

वीडियो: दुनियादारी: यूक्रेन को छूट देने की तैयारी, पुतिन की किस बात से मचा हड़कंप?

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