मैच शुरू होने का टाइम आया तो बारिश आ चुकी थी. लोग छाते की बजाय घर से तिरंगा लेकेआये थे. चेहरे पर लगा तीन रंगों का पेंट धुलने को नहीं लगाया था. इन्द्रदेव को भीसुननी पड़ी. अरे सुननी क्या, माननी पड़ी. कलकत्ता की ज़मीन थी. कोई मज़ाक की बात नहींथी. कलकत्ता यानी वो पिच जहां बाबू मोशाय सौरव गांगुली खेलते थे. जहां से जगमोहनडालमिया आते थे. जहां की बोली सुनते ही कानों में शहद घुलने लगता है. जहां कारसगुल्ला खाते ही डायबिटीज़ पछाड़ें मार के रो देता है. जहां पीली टैक्सी में घूमतेहुए किशोर दा के गाने सुनते हुए आपको मालूम चल जाता है कि जन्नत आखिर होती क्या है.जहां की दुर्गा पूजा पूरे इंडिया में वर्ल्ड फेमस है. जहां की ट्राम वहां के दिल कीधड़कन है. ईडेन गार्डन. इंडिया बनाम पाकिस्तान. जानते हो क्या होता है? ईडेन पर एकभी मैच में नहीं जीता था इंडिया पाकिस्तान से. लेकिन ये भी तो था कि वर्ल्ड कप मेंइंडिया हारा नहीं था पाकिस्तान से. लेकिन बारिश मानने को नहीं तैयार थी. मैच शुरूहोने के टाइम पिच पे कवर पड़े हुए थे. मैच शुरू हुआ घंटे भर देरी से. 18 ओवर एक साइडको मिले. 4 गेंदबाज 4-4 ओवर फेंक सकते थे. माने एक कोई 2 फेंकेगा. ये रूल थे मैचके. मैच के पहले इमरान खान आते हैं, सचिन तेंदुलकर, ममता दी, अमितावच्चन आते हैं.सचिन ने क्या कहा, सुनाई नहीं दिया. पब्लिक उनका नाम सुनते ही पागल हो जाती है. शोरमचाती है. टॉस के वक़्त सौरव दादा आये. ट्रॉफी हाथ में लेके. इमोशनल मोमेंट था. सौरवगांगुली वो जिसने इंडिया को जीतने की आदत डलवाई. जिसने सीना तान के सामने वालेप्लेयर से कभी कहा था कि पिच के आस पास भी आया तो कहानी पैक कर दूंगा. श्री लंका केखिलाफ़ मैच था. रसेल फर्नान्डो को बोला था. वो पिच पे चल रहा था. जिसने लॉर्ड्स मेंनेटवेस्ट जीतने पर टीशर्ट निकाल कर सालों पुरानी दुश्मनी निकाली थी. फ्लिंटॉफ़ से.वो सौरव गांगुली हाथ में ट्रॉफी लेके अमिताभ बच्चन और शफ़कत अमानत अली खान को लीड कररहा था. मैच में अमानत ने पाकिस्तान का और अमिताभ बच्चन ने इंडिया का राष्ट्रगानगाया. शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं 'जय जय जय जय हे!' सुनते और गाते हुए. आज भीखड़े हुए. अमितावच्चन की आवाज़ में कुछ और ही लगता है राष्ट्रगान. ये जो भी बहसबाजीचल रही है न आज कल, इन सभी को ले आओ. और समझाओ कि ऐसे निकलता है दिल से 'भारत माताकी जय!' मैच शुरू हुआ. इंडिया बॉलिंग कर रहा था पहले. टीम का एक प्लेयर जिसका मज़ाकउड़ाती है फेसबुक और ट्विटर की जनता, गेंद फेंक रहा था. सारे मज़ाकों से दूर. भरेस्टेडियम के सामने. स्टेडियम क्या, करोड़ों आँखों के सामने. लोग कहते थे कि ये इतनेपुराने हैं कि इनको मैच फ़ीस नहीं पेंशन मिलती है. लेकिन इन्होंने ये बताया किएक्सपीरियंस आखिर होता क्या है. अच्छा और बुरा एरिया होता क्या है. लेंथ क्या होतीहै और लाइन किसे कहते हैं. पहले ओवर में मात्र तीन रन. दो लेंथ बाल बाकी सभी गेंदोंमें कोई रूम नहीं. आशीष नेहरा. 17 साल से इंडिया के लिए गेंद फेंक रहा एक चेहरा.अगला ओवर अश्विन. पाकिस्तान छोड़ो, इंडिया के प्लेयर्स की भी आँखें चौंधा गयी होंगी.बॉल ऐसे टर्न हो रही थी जैसे उसका बैट्समैन के पास जाने का मन ही नहीं था. मुंह केसामने से गेंद घूमे जा रही थी. उसके बाद से तो बस स्पिनर्स का झोंका चालू हो गया.इधर आश्विन उधर जडेजा. आश्विन के 3 ओवर हो गए तो रैना आ गया. रैना ने आते ही चौथीगेंद पर शरजील खान को पांड्या के हाथों कैच कराया और वहां से इंडिया की बोहनी शुरूहुई. इंडिया को ये मैच जीतना वाकई ज़रूरी था. अगर ये मैच हार जाते तो वर्ल्ड कप कीये रेस इंडिया के लिए ख़तम थी. हालांकि धोनी की रणनीति में एक दो खामियां ज़रूर थींलेकिन फिर भी बुमराह ने आखिरी ओवर में कसी गेंद फेंक कर पाकिस्तान को 118 पे रोकलिया. हर कोई जानता था कि पाकिस्तान के 120 पार करते ही इंडिया की मुसीबतें शुरू होजातीं. 61,337 लोगों के सामने इंडिया 119 रन बनाने उतरा. कोहली का कहना था कि एकबेहतरीन प्लेयर को खराब पिचों की सबसे ज़्यादा ज़रुरत होती है. कोहली को वही मिला.रोहित शर्मा जल्दी में निकलते बने और कोहली ने एंट्री मारी. वही रौब. वही क्लास.कोहली को न्यूज़ीलैंड की हार ने 'हर्ट' किया था. हम घर की पिच पर ऐसा परफॉर्म नहींकरते. ऐसा कहा था कोहली ने मैच खतम होने के बाद. साफ़ था कि उसे वो हार खटक रही थी.लिहाज़ा बैटिंग करते वक़्त ये सब कुछ दिमाग में चल रहा था. कोहली ने पाकिस्तान केखिलाफ़ पचास पूरा करने के लिए जो भी शॉट्स खेले, वो ये बताते हैं कि लड़का रन बनानेको नहीं, गेम जीतने को बल्ला चलाता है. दो कवर ड्राइव. बल्ला कहीं भी शरीर से दूरनहीं. इस पिच पर जैसा खेलना चाहिए, एकदम वैसा. जितनी देर के लिए वो क्रीज़ पे था,उतनी देर तक पाकिस्तान हारता गया. ऐसा लग रहा था जैसे रामायण का किष्किन्धा काण्डचल रहा हो और बालि अपने सामने वाले की ताकत खैंचता जा रहा हो. कोहली बैटिंग कर रहाथा और सचिन खड़े होके तिरंगा लहरा रहे थे. सचिन वो जिन्हें 2003 के वर्ल्ड कप मेंपाकिस्तान के खिलाफ़ मैच में मैन ऑफ़ द मैच डिक्लेयर करने के बाद मैदान में मौजूदपब्लिक को चुप करवाना पड़ा था. वैसे जानकारी के लिए बता दूं कि सचिन को क्रिकेट काभगवान कहते हैं. भले ही पहली इनिंग्स में अश्विन और जडेजा ने गेंदें घुमाई हों,लेकिन कोहली के फुटवर्क और युवराज के पेशेंस ने खूब साथ निभाया. बैट पे पड़ने वालेकिनारे खाली ज़मीन पे गिर रहे थे. पहली इनिंग्स में जडेजा अपनी रेगुलर गेंद नहींफेंक पा रहे थे क्यूंकि उनकी सीधी गेंदें भी टर्न हो रही थीं. उन्हें खुद इसकाविश्वास नहीं हो रहा था. बैटिंग में डर का समय सिर्फ उस वक़्त आया था जब मोहम्मद शमीने धवन और रैना को 2 गेंदों में ही आउट कर दिया. ऐसा लग रहा था कि शमी तुरुप काइक्का साबित होंगे लेकिन युवराज ने दूसरे पूंजाबी कोहली के साथ टिक कर ये बता दियाकि "पंजाबियां दी शान वखरी!" *more to follow*