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इंडिया-यूएस ट्रेड डील से भारत के किसानों और कंपनियों को क्या फायदा-नुकसान होगा? सब पता चला

India US Interim Trade Deal: नए समझौते के तहत, भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. डील का दस्तावेज जारी हुआ है, जिससे कई बातें सामने आई हैं.

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7 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 7 फ़रवरी 2026, 11:54 AM IST)
India US interim trade Deal
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, पीएम नरेंद्र मोदी के साथ (फाइल फोटो: PTI)
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अमेरिका और भारत ने शुक्रवार, 6 फरवरी को एक अंतरिम (अस्थायी) व्यापार समझौते का खाका (फ्रेमवर्क) जारी किया. यह कदम दोनों देशों के बीच चल रही लंबी बातचीत के बाद उठाया गया है. अभी कुछ फैसले अस्थायी तौर पर लागू होंगे, ताकि व्यापार में चल रही दिक्कतें कम हों, टैरिफ कम हो और दोनों देशों के कारोबारियों को तुरंत राहत मिले. बाद में दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देंगे.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नए समझौते के तहत, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. घटा हुआ टैरिफ 7 फरवरी सुबह साढ़े दस बजे से लागू हो गया. इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. एक संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे इस अंतरिम समझौते को तुरंत लागू करेंगे. साथ ही, दोनों पक्ष एक पूरे और स्थायी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को पूरा करने के लिए काम करेंगे. 

India US interim trade Deal
(फोटो: ANI)

बयान के मुताबिक, इस बातचीत की शुरुआत 13 फरवरी 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. संयुक्त बयान में इस पूरे घटनाक्रम को ‘एक ऐतिहासिक मील का पत्थर’ बताया गया है. 

अमेरिका को क्या फायदा होगा?

अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत, अमेरिका से आने वाले सभी औद्योगिक सामानों और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ हटाएगा या कम करेगा. इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं. 

इसके अलावा, भारत को अमेरिका से आने वाले मेडिकल डिवाइस, आईटी और कृषि उत्पादों पर लगे मुश्किल नियम और औपचारिकताएं कम करनी होंगी, यानी सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि लाइसेंस, सर्टिफिकेट, टेस्टिंग जैसी रुकावटें आसान करनी पड़ेंगी. साथ ही, भारत अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान, जैसे ऊर्जा, विमान, कीमती धातु, तकनीक और कोकिंग कोयला खरीदेगा.

भारत को क्या फायदा होगा?

इसके बदले में अमेरिका भारतीय सामान पर अपनी रेसिप्रोकल टैरिफ दर को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा. अगर समझौता फाइनल होता है, तो अमेरिका जेनेरिक दवाइयों, रत्न और हीरे और विमान के पुर्जों जैसे चुनिंदा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म कर देगा. इससे भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

सरकार ने यह भी साफ किया है कि संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा की गई है. मक्का, गेहूं, चावल, सोया, दूध, पनीर, मांस, मुर्गी पालन, इथेनॉल, तंबाकू और कुछ सब्जियों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है, ताकि किसानों और दूध उत्पादकों की आजीविका सुरक्षित रहे.

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है. उन्होंने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खुल जाएगा. इससे खासकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों और मछुआरों को लाभ होगा. उन्होंने आगे कहा कि देश भर में महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

यह समझौता उस ऐलान के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 25 परसेंट का टैरिफ लगाया था, इसके बाद रूस से तेल खरीदने की वजह से 25 फीसदी टैरिफ और लगा दिया था.

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