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एक स्टिंग ऑपरेशन ने करणी सेना को नंगा करके रख दिया है

ये वही हैं जिन्होंने संजय लीला भंसाली के सेट पर तोड़-फोड़ की थी.

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26 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 26 सितंबर 2017, 06:09 AM IST)
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शूटिंग के दौरान 'पद्मावती'के सेट पर तोड़-फोड़ की गई थी.
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27 जनवरी 2017 को खबर आई कि राजस्थान  के जयगढ़ किले में शूटिंग चल रही थी जिसके सेट पर करणी सेना नाम के एक झुण्ड ने हमला बोल दिया. फ़िल्म के डायरेक्टर थे संजय लीला भंसाली. उन्हें पीटा गया. फ़िल्म के सेट पर तोड़-फोड़ की गई. स्पीकर वगैरह उठा के पटक दिए. करणी सेना वालों का कहना था कि फ़िल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है. रानी पद्मावती को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. इसके बाद संजय लीला भंसाली को शूटिंग रोककर पुलिस बुलानी पड़ी.
इस फिल्म में दीपिका पादुकोण पद्मावती का रोल कर रही हैं. रणवीर सिंह अलाउद्दीन खिलजी का रोल करेंगे. दीपिका और रणवीर की भंसाली के साथ ये तीसरी फिल्म है. पहले राम-लीला और बाजीराव-मस्तानी बन चुकी हैं. बाजीराव-मस्तानी की भी तथ्यों की वजह से आलोचना हुई थी.
जब ‘पद्मावती’ फिल्म की शूटिंग शुरू भी नहीं हुई तब से ही करणी सेना वाले भंसाली को फिल्म न बनाने के लिए धमका रहे थे.
sanjay leela bhansali
पद्मावती के सेट पर हुई तोड़-फोड़ जिसमें संजय लीला भंसाली को भी थप्पड़ जड़ दिया गया था

खैर, अब कथित करणी सेना का चिट्ठा सामने आया है. इंडिया टुडे के द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में ऐसी बातें सामने आई हैं जो इन कथित सेनाओं के दोगलेपन और इनकी नीचता को सामने ले आती हैं.
इंडिया टुडे नेटवर्क के अंडरकवर रिपोर्टर्स जून में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी तक पहुंचे. गोगामेड़ी संजय लीला भंसाली, उनकी फ़िल्म और उनके फ़िल्म में पद्मावती के चित्रण की भरपूर मुखालफ़त कर रहे थे. वही इस पूरी मुहिम के लीडर थे. गोगामेड़ी ने खुल्ले में फ़िल्म के प्रोड्यूसर्स को धमकाया था.
रिपोर्टर्स जब गोगामेड़ी से मिले तो वो रिपोर्टर के तौर पर नहीं बल्कि एक फ़िल्म प्रोडक्शन हाउस के एजेंट के तौर पर मिले. वहां उन नकली एजेंट्स ने ऐसा दिखाने की कोशिश की जैसे वो एक फ़िल्म बनाना चाहते हों और उसके केंद्र में औरंगज़ेब और एक राजपूत रानी होगी. फ़िल्म में इन दोनों के बीच प्यार दिखाने की बात भी बताई गई. अमूमन ऐसा होता है कि भावना कानों-कान आहत हो जाती है. भावना को आहत होने के लिए आंखों की ज़रूरत नहीं पड़ती. उसके लिए कान ही काफी होते हैं. संजय लीला भंसाली की फ़िल्म की कहानी जाने बगैर, फ़िल्म को देखे बगैर उन्हें पीटने के लिए पहुंच जाने वाला आदमी औरंगज़ेब और राजपूत रानी के प्रेम पर पागल होकर कुछ भी कर सकता था. लेकिन वो बिलकुल शांत रहा. उल्टा उसने बिन्नेस की बात शुरू कर दी. उसने तुरंत ही अपने एक साथी उम्मेद सिंह से बात करवाई. उसका नम्बर उपलब्ध करवाया और कहा कि उससे मुंबई में मुलाक़ात हो सकती है. अंडरकवर रिपोर्टर्स को मुंबई भेज दिया. उनसे कहा गया कि सब कुछ उम्मेद सिंह संभाल लेगा.
 
इंडिया टुडे के स्तिन्फ़ ऑप का एक स्क्रीनशॉट.
इंडिया टुडे के स्टिंग ऑपरेशन का एक स्क्रीनशॉट.

मुंबई में उम्मेद सिंह से जब फर्जी एजेंट्स और उनका भेष धरे रिपोर्टर्स मिले तो उसने बड़ी सफाई से फ़िल्म की पब्लिसिटी के लिए शूटिंग के वक़्त तोड़-फोड़, हाथापाई का प्रपोज़ल रखा. उसने कहा, "कुछ लोग बाहर से आएंगे और वो तमाशा खड़ा करेंगे. सेट को जलाया नहीं जाएगा. दो या चार लोगों को मारा जाएगा. गुंडागर्दी को रिकॉर्ड किया जाएगा."
रिपोर्टर ने पूछा, "और ये सब फैलाने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया जाएगा?"
उम्मेद सिंह ने जवाब दिया, "ये सब पूरे देश और दुनिया भर में फ़ैला दिया जाएगा."
इसके बाद मुद्दे की बात शुरू हुई. उसने पैसे मांगे. फ़िल्म को एक महीने तक गुंडों से बचाए रखने के लिए. उसने कहा कि एक महीने में 50 लोग लगेंगे जो सेट को सुरक्षित रखेंगे. उसके लिए फ़िल्म वालों को उन्हें डेढ़ करोड़ रुपए देने होंगे.
उम्मेद सिंह जो गोगामेड़ी का ख़ास है.
उम्मेद सिंह जो गोगामेड़ी का ख़ास है.

इसी साल मार्च में कोल्हापुर में पद्मावती के सेट पर आग लग गई थी. उम्मेद ने उसका भी ज़िक्र किया और बताया कि महाराष्ट्र में संजय लीला भंसाली की फ़िल्म सेफ़ है. लेकिन कोल्हापुर में उसे जला दिया गया था. उसने ये भी कहा कि वो लोग फ़िल्म की रिलीज़ नहीं रोकेंगे लेकिन इसके पीछे गुंडागर्दी होगी.
कुल मिलाकर मामला ये है कि राजपूतों की आन बान और शान की जी भरकर रक्षा करने का दावा करने वाली करणी सेना गजब का काम कर रही है. ये पहले तो आहत होने का स्वांग रचकर तोड़-फोड़ करेंगे. बाद में खुद से ही फ़िल्म को बचाने के लिए पैसे मांगेंगे. वो भी डेढ़ करोड़. एक करोड़ में 7 ज़ीरो होते हैं. (अब ये न कहना कि डेढ़ करोड़ में साढ़े दस होंगे) पिछले कुछ दिनों में फ़िल्में कमाई का अच्छा ज़रिया बन गई हैं. ये बात उन लोगों पर ज़्यादा लागू होने लगी है जिनका फ़िल्म से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. वो इंतज़ार करते हैं फ़िल्म के शूट होने का और उसके रिलीज़ होने का. क्यूंकि यही वो समय होता है जब फ़िल्म से जुड़े लोग सबसे ज़्यादा नाज़ुक होते हैं. फ़िल्म की शूटिंग के वक़्त भयानक पैसा लगता है. उस वक़्त एक माइक से लेकर कैमरे के ढक्कन के खराब हो जाने पर शूटिंग में खलल पड़ सकता है. उस वक़्त ये छिछोरे सेट पर जाकर तोड़-फोड़ करते हैं. और फिर फ़िल्म की रिलीज़ के वक़्त ये अपने बिल से निकलते हैं. क्यूंकि फ़िल्म तैयार हो चुकी है और मार्केट में आने वाली है, उसे रोका जाना किसी के लिए भी हितकारी नहीं होगा.
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संजय लीला भंसाली की पद्मावती

करणी सेना जैसे मवालियों का झुण्ड इस मौके की ताक में रहता है. उसे मालूम है कि फ़िल्म प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर रिलीज़ में कोई विघ्न नहीं चाहेंगे इसलिए उन्हें चढ़ावा मिल ही जाएगा. इस बात पर सरकार भी कुछ नहीं कर पा रही है. क्यूंकि भावना का ऐसा है कि आहत हुई तो सरकार भी ले डूब सकती है.
बीते वक़्त में करणी सेना का नाम कई बार आया है. उसके गाली-गलौज और मार पीट करने वाले सपोर्टर्स भी हैं. अच्छी फॉलोविंग भी है. और फॉलोविंग का सही या ग़लत से कोई लेना देना नहीं होता. लेकिन अब ये एक ऑपरेशन करणी सेना के लिए भारी पड़ सकता है. खुद इस गैंग का सरगना कैमरे पर पैसा लेते और औरंगज़ेब के राजपूत रानी के साथ सम्बन्धों पर बनी फ़िल्म को सुरक्षा देने के लिए मदद करने की बात कह रहा है. गाली बकने वाले सपोर्टर्स का मुंह अब देखने लायक होगा.

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