जस्टिस मुरलीधर ने गजा में बच्चों की हत्या और इजरायल को लेकर भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए
इज़रायल पर आरोप है कि उसने फिलिस्तीन में जानबूझकर बच्चों को निशाना बनाया था. UN की एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है. रिपोर्ट एक स्वतंत्र जांच समिति ने बनाई है, जिसकी अगुआई जस्टिस एस. मुरलीधर कर रहे हैं.

पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट आई थी. इसमें इज़रायल पर आरोप लगाया गया कि उसने फिलिस्तीन में ‘जानबूझकर’ बच्चों को निशाना बनाया. ये रिपोर्ट एक स्वतंत्र जांच समिति ने बनाई है. इसकी अगुआई भारत के चर्चित न्यायाधीश रहे जस्टिस एस मुरलीधर कर रहे हैं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इज़रायल ने जो कार्रवाई शुरू की, उसमें अक्टूबर 2025 तक कम से कम 20,179 फिलिस्तीनी बच्चों की मौत हुई और 44,143 बच्चे घायल हुए. अब इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जस्टिस मुरलीधर ने साफ कहा कि भारत को इस पूरे मामले को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
अखबार ने सवाल किया कि UN की रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के आदेशों के बावजूद इज़रायल पर अक्सर कोई असर नहीं पड़ता, ऐसे में क्या इस रिपोर्ट से न्याय मिल पाएगा? ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा, ‘हमें अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और कानून पर भरोसा नहीं खोना चाहिए.’
उन्होंने आगे कहा कि करीब 6,000 फ्रांसीसी, लगभग 200 ब्रिटिश और 700 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस समय इज़रायली सेना में सेवा दे रहे हैं. ये सभी देश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के Rome Statute पर साइन कर चुके हैं. इसलिए अगर उनके नागरिक युद्ध अपराधों में शामिल पाए जाते हैं, तो उन देशों की जिम्मेदारी बनती है कि वे उनके खिलाफ कार्रवाई करें. जस्टिस एस मुरलीधर ने कहा,
‘हम उन देशों से भी अपील कर रहे हैं जो इज़रायल को हथियार देते हैं. भारत भी इज़रायल को छोटे हथियार निर्यात करता है. ऐसे देशों को हथियारों की आपूर्ति रोकनी चाहिए, क्योंकि हथियार देने वाले देश पर भी युद्ध अपराधों में मदद करने का आरोप लग सकता है.’
उन्होंने कुलभूषण जाधव केस का उदाहरण देते हुए भारत को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने की सलाह दी. कहा,
रिपोर्ट में क्या है?'जब कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली थी, तब भारत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) गया था. यानी जब हमारे हितों की बात होती है, तब हम अंतरराष्ट्रीय कानून का सहारा लेते हैं. लेकिन जब बात मानवाधिकारों की आती है, तो कई नेता इसे "विदेशी कानून" कहकर नजरअंदाज करने लगते हैं.
मैं चाहता हूं कि भारत सरकार अपनी विदेश नीति पर दोबारा विचार करे. ये सवाल पूछे कि क्या हम बुनियादी मानवीय सिद्धांतों को नजरअंदाज होने देंगे? अगर इतने गंभीर सबूतों के बावजूद हम कोई कदम नहीं उठाते, तो भविष्य में खुद को सही साबित करना मुश्किल होगा.'
रिपोर्ट में कहा गया है कि इज़रायली हमलों की वजह से दुनिया में सबसे ज्यादा हाथ-पैर गंवाने वाले बच्चे गज़ा में हैं. वहां के 58,000 से ज्यादा बच्चे अनाथ हो चुके हैं. जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये हमले गज़ा में फिलिस्तीनियों के भविष्य और उसकी अगली पीढ़ी को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा लगते हैं. रिपोर्ट में नागरिकों पर हमले तुरंत रोकने, राहत सामग्री बिना किसी रुकावट के पहुंचाने, पीड़ितों को मुआवजा देने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.
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