The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • india refuse to give america summon to gautam adani group citing no ink signature official seal on documents

भारत ने क्यों नहीं भेजा अडानी को अमेरिकी समन? सब पता चल गया

America की एजेंसी ने Gautam Adani और Sagar Adani तक समन भेजने के लिए अलग तरीका खोजा है. इस खुलासे के बाद से Adani Group की कंपनियों के शेयरों में लगभग 3.3% से 14.6% तक की गिरावट देखी गई. ग्रुप की करीब 1 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू कम हो गई.

Advertisement
Gautam Adani, Sagar adani, america summon to adani, american summon to gautam adani, american summon, america summon, summon, us summon adani
गौतम अडानी का अडानी ग्रुप SEC के आरोपों से इनकार करता रहा है. (ITG)
24 जनवरी 2026 (Updated: 24 जनवरी 2026, 02:58 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

अमेरिकी शेयर मार्केट रेगुलेटर 'यूनाइटेड स्टेट्स सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन' (SEC) ने भारत के कानून और न्याय मंत्रालय को आधिकारिक आवेदन दिया था. इसमें भारत से भारतीय कारोबारी गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को अमेरिकी समन पहुंचाने की गुजारिश की गई थी. ऐसा दो अलग-अलग मौकों पर किया गया, लेकिन दोनों ही बार मंत्रालय ने गौतम अडानी और सागर अडानी को कानूनी समन औपचारिक तौर पर देने से मना कर दिया था.

इसके बाद SEC ने इस इंटरनेशनल प्रोसेस को बायपास करके सीधे अडानी परिवार को ईमेल के जरिए कानूनी नोटिस भेजने की इजाजत मांगी है. ये सारी बातें कोर्ट डॉक्यूमेंट्स से पता चलती हैं. अमेरिका के शेयर बाजार से जुड़े मामलों की जांच करने की जिम्मेदारी 'यूनाइटेड स्टेट्स सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन' (SEC) के पास है.

इंडियन एक्सप्रेस में पब्लिश हुई अपूर्वा विश्वनाथ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, भारतीय कानून मंत्रालय ने ये कहते हुए गौतम अडानी और सागर अडानी को अमेरिकी समन देने से इनकार कर दिया कि उन पर ना तो दस्तखत था, ना ऑफिशियल सील लगी थी. इसी वजह से SEC को बाद में कोर्ट का रुख करना पड़ा कि वो ईमेल के जरिए नोटिस भेज सके.

न्यूयॉर्क के ईस्टर्न जिले की कोर्ट में दाखिल कागजों से पता चलता है कि इंडियन लॉ मिनिस्ट्री ने ये समन पहले मई 2025 में और फिर दिसंबर 2025 में दो बार लौटाए. इसके बाद अमेरिकन रेगुलेटर SEC ने न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में अपील दायर की. SEC ने कोर्ट से मांग की कि उसे इंटरनेशनल प्रक्रिया पूरी करने के बजाय अडानी परिवार को सीधे ईमेल के जरिए 'प्रभावी समन' भेजने की परमिशन दी जाए.

रिपोर्ट के मुताबिक, SEC ने फेडरल कोर्ट में कहा,

"(भारत के कानून और न्याय) मंत्रालय के रुख को देखते हुए और हेग कन्वेंशन के तहत पहली बार सर्विस देने की कोशिश के बाद से इतना वक्त बीत जाने के बाद SEC को उम्मीद नहीं है कि हेग कन्वेंशन के जरिए सर्विस पूरी हो पाएगी."

भारत सरकार के साथ अमेरिका की यह बातचीत SEC की कोर्ट फाइलिंग वाले दस्तावेजों में शामिल है. इसके तार नवंबर 2024 से जुड़े हैं, जब SEC ने एक शिकायत दाखिल की. इसमें अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड पर इल्जाम लगाया गया.

इल्जाम यह कि कंपनी ने सितंबर 2021 की अपनी डेट ऑफरिंग (Debt Offering) के दौरान इन्वेस्टर्स को गलत और भ्रामक जानकारी दी थी. SEC ने आरोप लगाया कि ये काम जानबूझकर या लापरवाही में किया गया, जो अमेरिकी शेयर बाजार कानून के खिलाफ है.

इसके बाद अडानी ग्रुप ने लगभग 600 मिलियन डॉलर के बराबर बॉन्ड ऑफरिंग को वापस ले लिया था. उसी दौरान यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (अमेरिकी न्याय विभाग) ने गौतम अडानी और उनसे जुड़ी कई एंटिटीज पर रिश्वतखोरी से जुड़े आरोपों में कार्रवाई शुरू की.

क्रिमिनल केस के अलावा, SEC सिक्योरिटीज कानून के कथित उल्लंघन को लेकर एक सिविल लॉ सूट भी चला रहा है. यानी एक नॉन-क्रिमिनल केस भी साथ-साथ चल रहा है. कोर्ट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, हेग कन्वेंशन के तहत फरवरी 2025 में SEC ने भारतीय कानून मंत्रालय से मदद मांगी थी.

यहां हेग कन्वेंशन का बार-बार जिक्र हो रहा है, तो उस पर भी थोड़ा बात कर लेते हैं. हेग कन्वेंशन एक इंटरनेशनल कानून है, जिसके तहत सिविल या कमर्शियल मामलों में एक देश की कोर्ट दूसरे देश में ऑफिशियल चैनल्स के जरिए दस्तावेज भेज सकती है. ये कन्वेंशन इसलिए बनाया गया ताकि गैर-भरोसेमंद मेल्स या प्राइवेट एजेंट्स से बचा जा सके.

यही वजह थी कि अमेरिकी SEC ने भी हेग कन्वेंशन का इस्तेमाल किया. इसी के जरिए उसने भारत सरकार को अडानी ग्रुप के लिए समन भेजे. लेकिन लॉ मिनिस्ट्री ने उस वक्त ये कहते हुए डॉक्यूमेंट्स लौटा दिए कि SEC के कवर लेटर पर ना स्याही से साइन किए हुए थे और ना ही जरूरी फॉर्म्स पर कोई ऑफिशियल मोहर लगी थी.

समन लौटाते हुए कानून मंत्रालय ने अपने जवाब में लिखा,

"फॉरवर्डिंग लेटर पर ना सील है और न सिग्नेचर. मॉडल फॉर्म पर भी रिक्वेस्टिंग अथॉरिटी की सील नहीं है. ऐसे में हम दस्तावेजों की प्रामाणिकता वेरिफाई नहीं कर सकते."

SEC ने फिर से वही डॉक्यूमेंट्स भारत भेजे. अमेरिका ने तर्क दिया कि हेग कन्वेंशन में ऐसी फॉर्मेलिटीज जरूरी नहीं हैं. SEC ने अपनी दलील में सर्विस कन्वेंशन के ऑपरेशन पर प्रैक्टिकल हैंडबुक के चौथे एडिशन का भी हवाला दिया. इसके आधार पर तर्क दिया गया कि कुछ राज्यों द्वारा डॉक्यूमेंट्स की सर्विस से मना करने का तरीका "जब तक कि उन पर जारी करने वाले कोर्ट की सील और स्टैम्प ना हो... गलत है."

दूसरे शब्दों में, अमेरिका ने प्रैक्टिकल हैंडबुक का हवाला देते हुए कहा कि जो देश दस्तावेजों पर उसे जारी करने वाली अदालत की मुहर या स्टैम्प ना होने की वजह से उन्हें मानने से इनकार करते हैं, वे गलत कर रहे हैं. लेकिन दिसंबर 2025 में कानून मंत्रालय ने एक बार फिर समन लौटा दिया. इस बार भारतीय मंत्रालय ने अमेरिकी कानून का हवाला दिया. मंत्रालय ने लिखा,

"दस्तावेजों की जांच की गई है और SEC के इनफॉर्मल एंड अदर प्रोसीजर के रूल 5(b), 17 C.F.R. § 202.5(b) के अनुसार, यह पाया गया है कि ऊपर बताया गया समन ऊपर बताई गई कैटेगरी में नहीं आता है. इसलिए, इसे वापस किया जा रहा है."

मंत्रालय ने कहा कि SEC के नियमों के मुताबिक, समन जारी करना उसके एनफोर्समेंट टूल्स की लिस्ट में ही नहीं आता. यानी केंद्र सरकार का ये तर्क था कि SEC के पास समन भेजने का हक ही नहीं है. इसके खिलाफ SEC न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट पहुंच गया. उसने कोर्ट में कहा,

"(भारत के) मंत्रालय ने ऐसा सुझाव दिया कि SEC के पास हेग कन्वेंशन को लागू करने या समन जारी करने का अधिकार नहीं है. (भारत की) इस आपत्ति का कन्वेंशन में कोई आधार नहीं है, जो सर्विस प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, ना कि SEC के पास कार्रवाई करने के मिले अधिकार को (नियंत्रित करता है)."

SEC के इस कदम से अडानी ग्रुप के शेयरों पर बुरा असर पड़ा. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 जनवरी की रात ये खबर सामने आने के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में लगभग 3.3 फीसदी से लेकर 14.6 फीसदी तक की गिरावट देखी गई. कुल मिलाकर, ग्रुप की करीब 1 लाख करोड़ रुपये के आसपास की मार्केट वैल्यू कम हो गई.

इसके बाद स्टॉक एक्सचेंजों ने अडानी ग्रुप से सफाई मांगी. 23 जनवरी की देर रात स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई फाइलिंग में अडानी ग्रीन एनर्जी ने कहा,

"कंपनी इस कार्यवाही की पार्टी नहीं है और उस पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है."

कंपनी ने ये भी साफ किया कि यूएस फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट के तहत ना तो रिश्वतखोरी और ना ही भ्रष्टाचार का कोई इल्जाम उस पर लगाया गया है.

अडानी ग्रीन ने ये भी कहा कि SEC की कार्रवाई सिविल नेचर की है, यानी ये आपराधिक मामला नहीं है. इसी तरह, अडानी ग्रुप लगातार SEC के आरोपों को बेबुनियाद बताता रहा है. अडानी ग्रुप ने ये भी कहा है कि वो इसके खिलाफ हर संभव कानूनी रास्ता अपनाएगा.

वीडियो: ट्रंप ने चाइना का नाम लेकर कनाडा को क्या चेतावनी दे दी?

Advertisement

Advertisement

()