The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • india reaction to donald trump hellhole on earth remarks about india

भारत को 'नरक' कहने पर ईरान ने अच्छे से धोया, इतना सुनाया कि ट्रंप दोबारा ये घटिया बात न बोलेंगे

डॉनल्ड ट्रंप ने सोचा था कि उन्होंने एक बयान देकर बहस छेड़ दी है, लेकिन ईरान ने वाइल्ड कार्ड एंट्री लेकर पूरा गेम ही पलट दिया. जमकर सुनाया है. ऐसा मालूम दे रहा है कि दुनिया की कूटनीति में कोई हाई वोल्टेज रिएलिटी शो चल रहा हो. जिसका टाइटल- ‘Hellhole Diplomacy’ है.

Advertisement
pic
24 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 10:57 AM IST)
india sharp reaction to donald trump hellhole on earth remarks about india
प्रेसिडेंट ट्रंप ने भारत-चीन के बारे में टिप्पणी की थी (PHOTO-India Today)
Quick AI Highlights
Click here to view more

भारत को नरक बताने वाले डॉनल्ड ट्रंप 'कभी इंडिया आके देखो, फिर बोलना'. ट्रंप पर ये डिप्लोमैटिक सार्केज्म (Sarcasm) ईरान ने किया है. कहा है कि शायद किसी को मिस्टर ट्रंप के लिए एक तरफ़ा कल्चरल डिटॉक्स बुक करना चाहिए, इससे शायद इनकी रैंडम बकवास कम हो जाए.

डॉनल्ड ट्रंप ने सोचा था कि उन्होंने एक बयान देकर बहस छेड़ दी है, लेकिन ईरान ने वाइल्ड कार्ड एंट्री लेकर पूरा गेम ही पलट दिया. ऐसा मालूम दे रहा है कि दुनिया की कूटनीति में कोई हाई वोल्टेज रिएलिटी शो चल रहा हो. जिसका टाइटल- ‘Hellhole Diplomacy’ है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-चीन को नरक बताने वाला पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया. भारत ने पहले संयम दिखाया, चीन ने दूरी बनाए रखी, और तभी ईरान ने मंच पर आते ही ऐसा जवाब दिया कि पूरा नैरेटिव पलट गया. यह सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि नहले पर दहला था. सबसे दिलचस्प बात ये रही कि इस विवाद में भारत के समर्थन में सबसे तीखी प्रतिक्रिया आई ईरान से.

वही ईरान, जिसके साथ अमेरिका के रिश्ते वैसे ही कड़ाही में उबलती चाय जैसे हैं. भारत विरोधी बयान देकर अब ट्रंप भी मिमिया रहे हैं. सफाई दे रहे हैं. उधर, भारत भी आस्तीन समेटते हुए ट्रंप के बयान को घटिया बता रहा है. कौन क्या कह रहा है बताते हैं. पहले मामले की टाइमलाइन समझ ली जाए.

भारत के लिए घटिया पोस्ट शेयर किया

इसकी शुरुआत कल यानी 23 अप्रैल को डॉनल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई. ये पोस्ट अमेरिकी रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के एक कार्यक्रम से जुड़ा था. विषय था- ‘अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता’ यानी Birthright Citizenship. इसमें कहा गया था, ‘यहां एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे पूरे परिवार को चीन या भारत या दुनिया के किसी और नरक से ले आते हैं.’ पोस्ट में भारतीय और चीनी इमिग्रेंट्स को लैपटॉप वाले गैंगस्टर तक कहा गया. ये भी आरोप लगाए गए कि ये लोग टेक इंडस्ट्री में अमेरिकियों की नौकरियां खाए ले रहे हैं.

यानी अमेरिका की घरेलू आव्रजन बहस में भारत और चीन को यूं घसीटा गया जैसे घर की अंदरूनी बहस का ठीकरा पड़ोसी के सिर फोड़ दिया जाए.

फिर सीन में एंट्री हुई ईरान की

इसके बाद कहानी में एंट्री होती है ईरान की. ईरान ने सिर्फ भारत और चीन का बचाव ही नहीं किया, बल्कि ट्रंप पर सीधा और बेहद तीखा हमला बोला.

हैदराबाद स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर लिखा,

‘भारत और चीन सभ्यता की जन्मस्थली हैं. असली हेलहोल वह जगह है, जहां का युद्धोन्मादी राष्ट्रपति (डॉनल्ड ट्रंप) ईरान की सभ्यता को मिटाने की धमकी देता है.’

ये बयान केवल ट्रंप की गुस्ताखियों का जवाब नहीं था, बल्कि अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव की पृष्ठभूमि में एक तीखा राजनीतिक संदेश भी था.

ईरान ने साफ कर दिया कि भारत और चीन को अपमानित करना सिर्फ कूटनीतिक असभ्यता नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अज्ञानता भी है. आखिर भारत और चीन वे सभ्यताएं हैं, जिन्होंने दुनिया को दर्शन, योग, आयुर्वेद और न जाने क्या-क्या दिया है. इन्हें हेलहोल कहना वैसा ही है, जैसे ताजमहल को बस एक पुरानी बिल्डिंग कह देना.

iran
ईरान ने नरक वाली बात पर ट्रंप की आलोचना की

इन सबके बाद अमेरिका बैकफुट पर आता दिखा. अमेरिकी दूतावास ने तुरंत सफाई जारी की. दूतावास के प्रवक्ता क्रिस्टोफर एल्म्स ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को महान देश करार दिया है और कहा है कि भारत एक महान देश है और वहां मेरे बहुत अच्छे दोस्त शीर्ष पर हैं. ये बयान ट्रंप के पिछली पोस्ट से काफी अलग था. इससे ये साफ हुआ कि अमेरिका भारत जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार को खोना नहीं चाहता.

भारत ने ट्रंप के बयान पर क्या जवाब दिया 

मामले पर भारत ने भी तुरंत आक्रामक रुख नहीं अपनाया. शायद इसलिए कि भारत-अमेरिका संबंध आज कई रणनीतिक और आर्थिक आयामों पर आधारित हैं. लेकिन चुप्पी का मतलब सहमति नहीं होता. कुछ ही समय बाद भारत ने अधिक स्पष्ट और सख्त प्रतिक्रिया दी.

भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से X पर जारी किए बयान में कहा गया,

'हमने वो टिप्पणियां देखी हैं. और अमेरिकी दूतावास की प्रतिक्रिया भी देखी हैं. ये टिप्पणियां साफ तौर पर बिना जानकारी के, अनुचित और भद्दी हैं. भारत और अमेरिका के संबंधों की असलियत ये नहीं है'.

भारत ने साफ कर दिया कि आलोचना और अपमान में फर्क होता है. असहमति स्वीकार्य है, लेकिन अवमानना नहीं.

जाहिर है ये सिर्फ एक शब्द का विवाद नहीं है. भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. तकनीक, अंतरिक्ष, फार्मा, डिजिटल पेमेंट, स्टार्टअप हर क्षेत्र में भारत वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है. ऐसे में भारत को नरक जैसी जगह कहना न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की उपलब्धियों का अपमान भी है.

वैसे भी ट्रंप की राजनीति हमेशा से ऐसे भड़काऊ बयानों पर टिकी रही है. लेकिन समस्या तब होती है, जब घरेलू राजनीति के लिए दिए गए बयान अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने लगते हैं.

वीडियो: दुनियादारी: होर्मुज का तोड़ मिल गया, आखिरकार बैकफुट पर ईरान

Advertisement

Advertisement

()