इस स्टडी की आशंका सही साबित हुई तो कोरोना से रोज मर सकते हैं साढ़े पांच हजार लोग
मास्क और वैक्सीन ही बचाव.
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मार्च 2020 से मई 2021 तक कोरोना महामारी के दौरान बिहार में नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) में दो लाख 51 हज़ार अतिरिक्त मौतें दर्ज हुई हैं. (सांकेतिक फोटो)
देश में कोरोना वायरस से हो रही डेली मौतों का आंकड़ा मई के मध्य तक 5,600 तक पहुंच सकता है. यानी हर दिन इतने लोगों के मरने की आशंका है. एक अमेरिकी स्टडी ने इस बात की चेतावनी दी है. अगर इस स्टडी में जताई गई आशंका सही होती है, तो अप्रैल से लेकर अगस्त के बीच देश में तकरीबन तीन लाख लोग कोरोना वायरस से अपनी जान गंवा सकते हैं.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन नाम के संस्थान ने की है. स्टडी को 'कोविड 19 प्रोजेक्शन' नाम से 15 अप्रैल को पब्लिश किया गया था. स्टडी में कोरोना वायरस की दूसरी लहर पर नियंत्रण पाने के लिए टीकाकरण को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. कैसे की स्टडी? इस स्टडी के लिए एक्सपर्ट्स ने भारत में कोरोना वायरस के वर्तमान रेट ऑफ इंफेक्शन और मौतों का मूल्यांकन किया. इसी आधार पर कहा गया है कि अगले कुछ सप्ताह में कोरोना वायरस महामारी भारत में भयावह रूप ले लेगी.
बताया गया है कि 10 मई को देश में कोरोना वायरस से एक दिन में 5,600 लोग मारे जाएंगे और यह पीक होगा. साथ ही 12 अप्रैल से लेकर एक अगस्त के बीच 3,29,000 अतिरिक्त लोग वायरस के सामने जिंदगी की जंग हार जाएंगे. इससे जुलाई के आखिर में भारत में मौतों का कुल आंकड़ा 6,65,000 हो जाएगा.
स्टडी में बताया गया है कि यूनिवर्सल मास्किंग के जरिए 70 हजार लोगों की जान बच सकती है. (फोटो: पीटीआई)
स्टडी में यह भी कहा गया है कि यूनिवर्सल मास्किंग के जरिए 70,000 लोगों की जान बच सकती है. यूनिवर्सल मास्किंग का मतलब, जब देश की 95 फीसदी जनसंख्या मास्क लगा ले. बताया गया है कि पिछले साल सितंबर के मुकाबले इस बार भारत में कोरोना के मामले दोगुने हो गए हैं. अप्रैल के पहले और दूसरे सप्ताह में जहां मामलों में 71 फीसदी बढ़ोतरी हुई है, वहीं मौतों में 55 प्रतिशत की. मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण कोरोना स्टडी में बताया गया है कि अप्रैल के मध्य में देश में होने वालीं मौतों का पांचवां सबसे बड़ा कारण कोरोना बन गया है. यह स्टडी तब शुरू हुई थी, जब अप्रैल के पहले सप्ताह में रोज कोरोना वायरस के सवा लाख से ज्यादा मामले सामने आने लगे थे, जबकि मार्च के आखिरी हफ्ते में ये आंकड़ा लगभग 78 हजार प्रति दिन था.
स्टडी में एक जरूरी बात और बताई गई है कि बीते 12 अप्रैल तक भारत की 24 फीसदी जनसंख्या कोविड 19 की चपेट में आ चुकी है. हालांकि, स्टडी करने वालों ने कोरोना वैक्सीनेशन पर काफी भरोसा जताया है. उनका कहना है कि वैक्सीनेशन के चलते जुलाई के आखिर तक 85,600 लोगों की जान बचाई जा सकती है.
एक और स्टडी भी सामने आई है. यह अमेरिका की मिशिगन यूनीवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की तरफ से की गई है. बताया गया है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर में भारत में रोज 8 से 10 लाख मामले सामने आ सकते हैं. यह इस वेव का पीक होगा. वहीं करीब 4,500 लोग रोज अपनी जान गंवा सकते हैं. इस स्टडी में कहा गया है कि भारत में अभी डेली मामलों की अंडर रिपोर्टिंग की जा रही है. इसके चलते हालात और बिगड़ सकते हैं.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन नाम के संस्थान ने की है. स्टडी को 'कोविड 19 प्रोजेक्शन' नाम से 15 अप्रैल को पब्लिश किया गया था. स्टडी में कोरोना वायरस की दूसरी लहर पर नियंत्रण पाने के लिए टीकाकरण को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. कैसे की स्टडी? इस स्टडी के लिए एक्सपर्ट्स ने भारत में कोरोना वायरस के वर्तमान रेट ऑफ इंफेक्शन और मौतों का मूल्यांकन किया. इसी आधार पर कहा गया है कि अगले कुछ सप्ताह में कोरोना वायरस महामारी भारत में भयावह रूप ले लेगी.
बताया गया है कि 10 मई को देश में कोरोना वायरस से एक दिन में 5,600 लोग मारे जाएंगे और यह पीक होगा. साथ ही 12 अप्रैल से लेकर एक अगस्त के बीच 3,29,000 अतिरिक्त लोग वायरस के सामने जिंदगी की जंग हार जाएंगे. इससे जुलाई के आखिर में भारत में मौतों का कुल आंकड़ा 6,65,000 हो जाएगा.
स्टडी में बताया गया है कि यूनिवर्सल मास्किंग के जरिए 70 हजार लोगों की जान बच सकती है. (फोटो: पीटीआई)
स्टडी में यह भी कहा गया है कि यूनिवर्सल मास्किंग के जरिए 70,000 लोगों की जान बच सकती है. यूनिवर्सल मास्किंग का मतलब, जब देश की 95 फीसदी जनसंख्या मास्क लगा ले. बताया गया है कि पिछले साल सितंबर के मुकाबले इस बार भारत में कोरोना के मामले दोगुने हो गए हैं. अप्रैल के पहले और दूसरे सप्ताह में जहां मामलों में 71 फीसदी बढ़ोतरी हुई है, वहीं मौतों में 55 प्रतिशत की. मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण कोरोना स्टडी में बताया गया है कि अप्रैल के मध्य में देश में होने वालीं मौतों का पांचवां सबसे बड़ा कारण कोरोना बन गया है. यह स्टडी तब शुरू हुई थी, जब अप्रैल के पहले सप्ताह में रोज कोरोना वायरस के सवा लाख से ज्यादा मामले सामने आने लगे थे, जबकि मार्च के आखिरी हफ्ते में ये आंकड़ा लगभग 78 हजार प्रति दिन था.
स्टडी में एक जरूरी बात और बताई गई है कि बीते 12 अप्रैल तक भारत की 24 फीसदी जनसंख्या कोविड 19 की चपेट में आ चुकी है. हालांकि, स्टडी करने वालों ने कोरोना वैक्सीनेशन पर काफी भरोसा जताया है. उनका कहना है कि वैक्सीनेशन के चलते जुलाई के आखिर तक 85,600 लोगों की जान बचाई जा सकती है.
एक और स्टडी भी सामने आई है. यह अमेरिका की मिशिगन यूनीवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की तरफ से की गई है. बताया गया है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर में भारत में रोज 8 से 10 लाख मामले सामने आ सकते हैं. यह इस वेव का पीक होगा. वहीं करीब 4,500 लोग रोज अपनी जान गंवा सकते हैं. इस स्टडी में कहा गया है कि भारत में अभी डेली मामलों की अंडर रिपोर्टिंग की जा रही है. इसके चलते हालात और बिगड़ सकते हैं.

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