योगी भले न मानें, लोग लखनऊ मेट्रो को पान मसाले से लाल करके अखिलेश का शुक्रिया अदा कर रहे हैं
दो दिन में ही 20 किलो पुड़िया गेट पर चैकिंग के दौरान इकट्ठी हो गई है.
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फोटो - thelallantop
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मन मसाला, तन मसाला, हरदम मसाला... क्या लाइन बनाई है, कानैपुर वाले उर्फ कनपुरिया तो पक्का मर मिटेंगे...बस चले तो कहो हमको ऑस्कर अलग पकड़ा दें...खैर, अबकी बार कानपुर का नाम लखनऊ वालों ने रौशन किया है. अब पड़ोसी होने का कुछ तो असर आएगा ना. तभी तो बारातियों का स्वागत पान पराग से होना चाहिए...से मोटिवेट होकर नखलऊ वालों ने मेट्रो का स्वागत ही पान-मसाले से कर डाला है (अरे यहां सब कनपुरिये भर गए हैं - पक्का लखनऊवाले यही सोच रहे होंगे). खैर हम पहले ही कहे थे स्टेशन की दीवारे लाल रंग की पुतवाओ, पर एलएमआरसी यानी लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन वाले नहीं माने. मान जाते तो उनका पैसा भी बच जाता. काहे से दीवार पर पेंट की एक ही कोटिंग करवानी पड़ती ना. दूसरी लाल कोटिंग तो लोग खुद ही कर देते. वो भी फ्री में. पर लखनऊ वालों को ये लाल रंग वाला आइडिया जम गया, मिशन लाल दीवार में जुट गए हैं. नहीं विश्वास तो खुदै देख लीजिए-

लखनऊ मेट्रो की दीवारों की रंगाई शुरू हो गई है.
ये लाल रंग कब मुझे पोतेगा...नहीं भइया, दीवारें ऐसा बिल्कुल नहीं गुनगुना रही थीं. पर लोगों ने शायद इसे खुदै इमेजिन कर लिया और पहले ही दिन दान दे दिया. हमको लग रहा मेट्रो का लाल रंग दीवारों से मैच कराने के लिए ये सब किया जा रहा है. और लखनऊ वाले वैसे भी साजो-सजावट में तकल्लुफ नहीं करते हैं. सो काम जारी है. जब मेट्रो बन रही थी, तब भी बैरीकेडिंग हरे रंग की थी. उसे भी लखनऊ वाले थूक-थूक कर लाल करके ही माने थे. रोजाना सुबह इसे साफ करवाना पड़ता था. लाखों रुपये खर्च होते थे इसमें सो अलग.

प्रॉजेक्ट के दौरान रोजाना करनी पड़ती थी बैरिकेडिंग की सफाई.
वो तो कहो अखिलेश भइया तक हमारी बात नहीं पहुंची लाल दीवारों वाली. वरना वो ही लाल दीवारों के आदेश दे देते. अरे लाल रंग तो उनकी पार्टी को सूट भी करता ना. बढ़िया फ्री में प्रचार भी हो जाता. अऊर तो और लखनऊ वालों की मेहनत भी बच जाती. कनपुरियों की तो बल्ले-बल्ले ही हो जाती. 'मार गोली सीने में' के बाद 'मार थूक दीवारों में' जम जाता उनके लिए.

ऐसी पान-मसाले की दुकानें हर नुक्कड़ पर मिलेंगी.
इन जब्त पुड़ियों का क्या होगा- ये सोचकर पक्का बहुत लोगों को रातभर नींद ना आई होगी. कनपुरिये तो कहो इन पुड़ियों को रिहा कराने का प्लान भी बनाने लगे हों.

कानपुर में जगह-जगह मिल जाएंगे ये पोस्टर.
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लखनऊ मेट्रो की दीवारों की रंगाई शुरू हो गई है.
ये लाल रंग कब मुझे पोतेगा...नहीं भइया, दीवारें ऐसा बिल्कुल नहीं गुनगुना रही थीं. पर लोगों ने शायद इसे खुदै इमेजिन कर लिया और पहले ही दिन दान दे दिया. हमको लग रहा मेट्रो का लाल रंग दीवारों से मैच कराने के लिए ये सब किया जा रहा है. और लखनऊ वाले वैसे भी साजो-सजावट में तकल्लुफ नहीं करते हैं. सो काम जारी है. जब मेट्रो बन रही थी, तब भी बैरीकेडिंग हरे रंग की थी. उसे भी लखनऊ वाले थूक-थूक कर लाल करके ही माने थे. रोजाना सुबह इसे साफ करवाना पड़ता था. लाखों रुपये खर्च होते थे इसमें सो अलग.

प्रॉजेक्ट के दौरान रोजाना करनी पड़ती थी बैरिकेडिंग की सफाई.
वो तो कहो अखिलेश भइया तक हमारी बात नहीं पहुंची लाल दीवारों वाली. वरना वो ही लाल दीवारों के आदेश दे देते. अरे लाल रंग तो उनकी पार्टी को सूट भी करता ना. बढ़िया फ्री में प्रचार भी हो जाता. अऊर तो और लखनऊ वालों की मेहनत भी बच जाती. कनपुरियों की तो बल्ले-बल्ले ही हो जाती. 'मार गोली सीने में' के बाद 'मार थूक दीवारों में' जम जाता उनके लिए.
कितनी कुरबानी दे रहे हैं, जानकर आंसू बह जाएंगे
दीवारें लाल करने के लिए लखनऊ वाले कितनी शिद्दत और कर्मठता से जुटे हैं, इसका नमूना तो आपने ऊपर देख ही लिया. अब जानिए उनकी कुरबानी के किस्से. दो दिन में ही 20 किलो पुड़िया सूली पर चढ़ चुकी हैं. एक-एक पुड़िया की अपनी कीमत होती है. तुम यूपी के बाहर वाले क्या जानो. बायस्ड लोग. स्टेशन के गेट पर ही तैनात एलएमआरसी के 'गुर्गों ' ने चेकिंग कर पुड़ियां जब्त करना शुरू कर दिया था. मिशन लाल दीवार फिर भी जारी रहा. कुछ लोग दबा-बचा के पुड़िया अंदर ले ही गए और रंगाई कर दी.
ऐसी पान-मसाले की दुकानें हर नुक्कड़ पर मिलेंगी.
इन जब्त पुड़ियों का क्या होगा- ये सोचकर पक्का बहुत लोगों को रातभर नींद ना आई होगी. कनपुरिये तो कहो इन पुड़ियों को रिहा कराने का प्लान भी बनाने लगे हों.
तुम जितना जुर्माना ठोकोगे, हम उतना मसाला थूकेंगे
एलएमआरसी के मुताबिक, स्टेशन के अंदर पान, मसाला या तंबाकू मिलने पर 500 रुपये जुर्माना वसूला जाएगा. लेकिन बाहर पकड़े गए तो चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा. बस पुड़िया जब्त होगी. इसी बात को तड़ लिया पुड़िया के बाजीगरों ने. वैसे भी जुगाड़ में तो उनका कोई सानी नहीं. ऐसा छुपा के पुड़िया ले जाएंगे कि पुड़िया का पु ना पता चलेगा. और ये पिछले दो दिनों में वो साबित कर चुके हैं. फिर अंदर पकड़े भी गए तो बता देंगे फलाने विधायक के ताऊ के मामा के लड़के के साले हैं हम. अब इसका तोड़ है क्या किसी के पास. ऐसे कैसे इन भौकाली लोगों पर जुर्माना लगा दोगे.ये तो ट्रेलर है, पिच्चर तो अभी बाकी है
अब बेटा ये सोचों कि जब लखनऊ में इतना रहम बरसा है तो कानैपुर में का होगा. सब भरे बैठे होंगे कि कब बारी आए और दे मारे पिचकारी. और अब तो बात इज्जत पे आ गई है, लखनऊ वालों ने जो टक्कर दे दी है. खैर टक्कर तो दे दोगे मगर जो कारीगरी कनपुरियों के पास है, वो कहां से लाओगे. पिकासो के चाचा हैं सब, डिजाइन बना-बनाके दीवारे पोतेंगे. ना विश्वास हो तो कॉम्पिटिशन करवा के देख लो. मसाले का मसाला, पानी का पानी हो जाएगा. और फिर मोटिवेशन देने के लिए हर चौराहे पर बड़ी-बड़ी होर्डिंगें लगी ही हैं. जेम्स बॉन्ड तक कानपुर के मसाले पर फिदा हैं. आखिर में मेट्रो कॉरपोरेशन वालों के लिए वो लाइन याद आ गई- अभी तो बस अंगड़ाई है, आगे बहुत लड़ाई है.
कानपुर में जगह-जगह मिल जाएंगे ये पोस्टर.
खैर हंसी मजाक अपनी जगह है. लखनऊ वालों और बाहर से आए लोगों को ये समझना होगा कि मेट्रो की सफाई भी उन्हीं की जिम्मेदारी है. उसे सरकार की नहीं, अपनी मेट्रो मानकर चलना होगा. आप तो पान-मसाला थूक के, गंदगी फैलाकर चल देंगे, पर नाम पूरे शहर का खराब होता है. खासकर लखनऊ वालों को ये ध्यान देना होगा कि लोग गंदगी ना फैलाएं. कोई फैलाता दिखे तो उसे फौरन टोकें और उसकी शिकायत करें. वो कहते हैं ना- मुस्कुराइये कि आप लखनऊ में हैं, ये सुनना साफ-सुथरी मेट्रो में ही अच्छा लगेगा.
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