इत्र, खुशबुओं का 'कारोबार' है. गुलाब, केवड़ा, बेला, केसर, कस्तूरी, चमेली, मेहंदी,कदम और ना जाने कितनी खुशबुएं. ज़रा सा लगा लिया तो रूह तक महक उठती है. यूपी का एकछोटा सा जिला कन्नौज, अरब से लेकर अमेरिका तक यूं ही नहीं दुनिया भर में महकता रहताहै. लेकिन ये सब तो फिल्मी लफ्फाजी हैं. मुद्दे की बात ये है कि है तो असल में सबकारोबार ही ना. अब कारोबार है तो पैसा भी है. और पैसा इतना है कि आप बस इत्र कीखुशबू में मस्त रहिए, अगला वहां नोटों से संदूकें भर रहा है. और इतनी ज्यादा भर रहाहै कि आदमी छोड़ ही दीजिए, मशीने नहीं गिन पा रहीं.घर में छिपाए गए नोट.क्या है मामला?लोग गुटखे के नाम पर कानपुर का मज़ाक उड़ाते रहते हैं. कहते हैं यहां के लोगों कीजेबों में पैसे हों ना हों, गुटखे के पैकेट जरूर भर रहते हैं. लेकिन सर, सबके साथऐसा नहीं है. यहां एक इत्र कारोबारी भी है, जिसकी जेब क्या घर की तिजोरी, अलमारी,बिस्तर, दीवार और पता नहीं कहां-कहां नोटों की गड्डियां ही गड्डियां दबी पड़ी थीं.जनाब का नाम है पीयूष जैन.अहमदाबद के जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (DGGI) की टीम ने पीयूष जैन के कानपुरस्थित घर पर छापा मारा. उन्होंने सोचा होगा कि कितना माल निकलेगा, निपटा कर शाम तकघर लौट आएंगे. लेकिन जब नोटों की गिनती शुरू हुई तो तब समझ में आया कि भईया, येअकेले हमारे बस का मामला नहीं है.पीयूष जैन के घर से नोटों की गड्डियों का अंबार निकला तो आनन फानन में DGGI वालोंने इनकम टैक्स वालों को बुलाया. अब दोनों मिल कर नोट गिन रहे हैं. लेकिन इतनीगड्डियां हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं. चार-चार नोट गिनने की मशीनेमंगानी पड़ीं. चौबीस घंटे से नोटों की गिनाई चल रही है. करीब 150 करोड़ रुपये कैशमिला है. खबर लिखे जाने तक 6 बड़े बक्से भर के नोट निकाले जा चुके थे. और घर केबाहर सुरक्षा के लिए PAC तैनात कर दी गई है.पीयूष जैन के घर के बाहर रखे बक्सों की सुरक्षा करती PAC. (फोटो क्रेडिट- ANI)कौन हैं पीयूष जैन?अब इत्र का कारोबार है तो कन्नौज के ही होंगे. पीयूष जैन कन्नौज की इत्र वाली गलीमें अपना इत्र का कारोबार करते हैं. इनके मुंबई में भी आफिस हैं. इनकम टैक्स कोइनकी लगभग चालीस से ज्यादा ऐसी कंपनिया मिली हैं जिनके माध्यम से पीयूष अपना इत्रकारोबार चला रहे थे.लेकिन यार, अगर कोई कानपुर में रह रहा तो गुटखे से थोड़ा इश्क होना तो बनता है.पीयूष जैन को भी हो गया. लेकिन इतने पैसे वाला आदमी गुटखा खाकर अगर कानपुर कीसड़कों पर थूकता दिखेगा तो इमेज नहीं खराब हो जाएगी! तो इन्होंने कहा हम गुटखा खाएंचाहे ना खाएं, बेचेंगे तो हम ही. तो मामला ये है कि पीयूष जैन इत्र के साथ पानमसाला बिजनेस पर भी फोकस करते हैं. कानपुर की ज्यादातर पान मसाला यूनिट्स पीयूष जैनकी ही ग्राहक हैं. इसी चक्कर में इनको कन्नौज छोड़ कानपुर आना पड़ गया.पीयूष जैन के घर मिले नोटों की गड्डियों को ले जाने के लिए टेंपो बुलाना पड़ गया.(तस्वीर- आजतक)कैसे खुली पोल?अहमदाबाद DGGI टीम को पुख्ता जानकारी मिली थी कि कानपुर में एक ट्रांसपोर्टबिज़नेसमैन बिना Eway Bill जनरेट किए फर्जी रसीद बनाता है और टैक्स चोरी करता है.इसके बाद DGGI की टीम ने ट्रांसपोर्टर के घर और दफ्तर पर छापा मारा. इसी दौरानइस ट्रांसपोर्टर के एक और सप्लायर के ठिकानों और घर पर छापा मारा गया. ये शख्सनिकले पीयूष जैन. और फिर शुरू हुई नोटों की बारिश जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहीहै.बीजेपी क्यों एक्टिव हो गई?अभी कुछ दिन पहले की ही बात है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव टीवी पर'समाजवादी इत्र' लॉन्च कर रहे थे. इसे लॉन्च कराया था समाजवादी पार्टी के पम्पी जैनने. अब इस समाजवादी इत्र को इत्र कारोबारी पीयूष जैन से जोड़ बीजेपी एक के बाद एकहमले कर रही है.यह है सपाइयों का असली रंगसमाजवादी इत्र से 'भ्रष्टाचार की गंध' छिप नहीं पाई अखिलेश जीकरोड़ों-करोड़ों का काला धन आपके झूठे समाजवाद की पोल खोल रहाहै।#सपा_मतलब_भ्रष्टाचार... ये नई नहीं, वही सपा है। pic.twitter.com/ZvBzj6GAea— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) December 24, 2021क्या है पीयूष जैन का सपा कनेक्शन?दरअसल सुबह से ये खबरें छप गईं कि समाजवादी पार्टी के MLC पम्पी जैन पीयूष जैन केभाई हैं. लेकिन ये बात सही नहीं है. आजतक के रिपोर्टर नीरज श्रीवास्तव जब कन्नौजपहुंचे तो पता चला कि पीयूष जैन और पम्पी जैन के बीच सिर्फ इतना संबंध है कि दोनोंकन्नौज में एक ही मोहल्ले के रहने वाले हैं.नीरज श्रीवास्तव ने फोन पर पम्पी जैन से बात की तो उन्होंने अपने और पीयूष जैन केकिसी प्रकार के संबंध होने की बात को नकार दिया. उन्होंने कहा- हम लोग एक हीमोहल्ले में रहते हैं, जैन हैं और कारोबारी हैं. बस इतना ही संबंध है. वहींसमाजवादी इत्र के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उससे पीयूषजैन का कोई संबंध नहीं है.