विदेश नीति पर राहुल गांधी ने ऐसा क्या पूछ लिया कि सरकार दो घंटे जवाब देती रही?
ये भी खबरें हैं कि विदेश नीति पर प्रज़ेंटेशन को राहुल ने 'लॉन्ड्री लिस्ट' बताकर ख़ारिज किया.
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बैठक में राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से सवाल किया कि चीन और अमेरिका को लेकर सरकार के पास क्या प्लान है. (फाइल फोटो- PTI)
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16 जनवरी, शनिवार को देश के विदेशी मामलों को लेकर एक परामर्श समिति की बैठक हुई. बैठक में सरकार के प्रतिनिधि भी थे और विपक्ष के भी. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारियां दीं कि सरकार की विदेश नीति किस तरह से काम कर रही है. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सवालों ने इस बैठक में सरकार के लिए काफी मुश्किलें पैदा कीं. राहुल ने सरकार से चीन समेत कुछ अन्य विदेशी मसलों पर सवाल किए और साफ कहा कि सरकार को ये ध्यान देना चाहिए कि विदेशों से जुड़े उनके हर कदम को बाकी दुनिया में किस तरह से देखा जाता है.
बैठक में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा और शशि थरूर भी मौजूद थे. राहुल के इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द शशि थरूर और आनंद शर्मा ने भी कुछ सवाल दागे. टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक- बैठक करीब साढ़े तीन घंटे चली. इसमें से एक-डेढ़ घंटा सरकार ने अपनी तरफ से प्रज़ेंटेशन दिया. बाकी दो घंटे एस जयशंकर और विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला राहुल के सवालों का जवाब ही देते रहे. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो ये बात भी आई कि जब सरकार की विदेश नीति पर प्रज़ेंटेशन दिया गया तो राहुल गांधी ने इसे 'लॉन्ड्री लिस्ट' बताकर ख़ारिज कर दिया.
इन सभी ने सरकार से कुछ ख़ास मुद्दों पर सवाल किए. जैसे कि –
# अमेरिका के नए प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल के लिए सरकार ने क्या सोचा है? # चीन से निपटने के लिए सरकार के पास क्या प्लान है? # अमेरिका और रशिया, दोनों के साथ अच्छे संबंध लेकर चलने के लिए क्या प्लान है? # अमेरिका और चीन के खटकते रिश्तों के बीच भारत वैश्विक तौर पर ख़ुद को कहां पाता है?राहुल का सवाल चीन को लेकर राहुल गांधी ने सरकार से सवाल किया कि लगातार आक्रामक हो रहे चीन से निपटने के लिए सरकार की क्या स्ट्रैटजी है. उन्होंने कहा कि अब ऐसी स्थिति बनती दिख रही है कि दुनिया दो धड़ों में बंट सकती है. अमेरिका के पक्ष में और चीन के पक्ष में. राहुल ने इसके लिए 'बाइपोलर' शब्द का इस्तेमाल किया. कहा कि दुनिया बाइपोलर होने की तरफ है. चीन और अमेरिका ग्लोबल पावर बनते दिख रहे हैं. राहुल ने माना कि चीन जिन रणनीतियों के साथ चल रहा है, वो फेल भी हो सकती हैं. लेकिन फिर भी अगर कोई विपरीत परिस्थिति बनती है तो सरकार ने इसे लेकर क्या सोचा है? विदेश मंत्री का जवाब इसके जवाब में एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इतनी जल्दी और इतनी आसानी से किन्हीं दो धड़ों में बंटने नहीं जा रही है. और ऐसी किसी भी संभावित स्थिति में रशिया,जापान, जर्मनी, यूरोपियन यूनियन का किरदार भी अहम होगा. माने इतने दख़ल के बाद चीजें फिर उस हिसाब से तय होंगी. विदेश मंत्री ने कहा कि वे फिलहाल दुनिया को बाइपोलर होते नहीं देख रहे. रशिया, जापान व अन्य बड़े देशों के होते ये मल्टीपोलर ही रहेगी. चीन के आक्रामक रवैये के ख़िलाफ भारत की तैयारियों की जानकारी देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि 2016 तक चीन की सीमा पर भारत सालाना करीब 4,600 करोड़ रुपए खर्च कर रहा था. अब ये बजट बढ़ाकर करीब-करीब 11,800 करोड़ रुपए का कर दिया गया है. एस जयशंकर ने कहा कि अतीत में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर इतना कम ध्यान दिया गया है कि अब इसे मजबूत करने के लिए दोगुना जोर लगाना पड़ रहा है. माने एक तरह से कांग्रेस काल को ज़िम्मेदार ठहराया. आनंद शर्मा ने कहा कि पहले विदेशी मसलों को लेकर एक किस्म की राष्ट्रीय नीति हुआ करती थी. लेकिन NDA सरकार उन नीतियों को न मानकर अपनी मनमर्जी कर रही है. शशि थरूर ने कहा कि सरकार को ये भी ध्यान देना चाहिए कि घरेलू मसलों पर लिए गए उसके कुछ फैसलों का वैश्विक तौर पर कैसा मैसेज जा रहा है. कुछ फैसले ऐसे रहे हैं, जिनको वैश्विक तौर पर नेगेटिव कॉमेंट्स मिल रहे हैं.

