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ICICI बैंक फ्रॉड: ड्राइवर, माली तक को बना दिया गया था कंपनियों में डायरेक्टर

प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट से हुआ खुलासा

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ICICI बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर के बिज़नेसमैन पति दीपक कोचर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 7 सितंबर को गिरफ्तार किया था. (फोटो- Social Media)
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अभिषेक त्रिपाठी
9 दिसंबर 2020 (Updated: 9 दिसंबर 2020, 06:37 PM IST)
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चंदा कोचर का नाम तो आपने सुना होगा? ICICI बैंक की एमडी और सीईओ रही हैं. उनके बिज़नेसमैन पति दीपक कोचर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 7 सितंबर को गिरफ्तार किया था. ICICI बैंक की कर्ज़दार कंपनी वीडियोकॉन समूह द्वारा दीपक कोचर की कंपनी में निवेश को लेकर लगातार जांच चल रही है. मामला लोन के दुरुपयोग का है.  ICICI बैंक फ्रॉड केस में ED ने  3 नवंबर को चार्जशीट फाइल की थी. इसकी बातें अब सामने आ रही हैं. ये चार्जशीट कहती है कि दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने अपने ड्राइवर, माली, ऑफिस बॉय वगैरह को कंपनी में डमी डायरेक्टर बना रखा था. वही कंपनियां, जिनके जरिये बैंक फ्रॉड किया गया. इससे भी बड़ी बात ये है कि इन ड्राइवर, माली को इसका पता भी नहीं था कि वो किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं. ये किस स्तर का भ्रष्टाचार था, इसका अंदाजा इससे समझिए. लक्ष्मीकांत सुधाकर कटोरे. ये 2001 से 2016 तक वीडियोकॉन में माली का काम करते थे. लेकिन वीडियोकॉन के मालिक धूत ने जब एक कंपनी बनाई- RCPL, तो इस कंपनी में लक्ष्मीकांत सुधाकर को डायरेक्टर बना दिया गया. माने आसान शब्दों में इसे यूं समझिए कि मालिक अपने नाम पर तो हर कंपनी खोल नहीं सकते, तो किसी को भी नाम भर का डायरेक्टर बना दिया. बाकी कंपनी खुद चलाते रहे, उसके जरिए फायदे लेते रहे. लक्ष्मीकांत को ये पता भी नहीं था कि वो भी कंपनी के डायरेक्टर हैं. उन्हें तो उनकी वही तनख्वाह मिलती रही- दस हजार रुपए महीना. क्या है फ्रॉड का मामला? ICICI बैंक ने वीडियोकॉन समूह को अप्रैल-2012 में 3,250 करोड़ रुपए का लोन दिया था. बाद में वीडियोकॉन ने लोन के करीब 2,810 करोड़ रुपए बैंक को नहीं चुकाए. लोन नॉन परफॉर्मिंग असेट यानी एनपीए में बदल गया. एनपीए उस लोन को कहते हैं, जिसकी वसूली बैंक के लिए संभव नहीं रह जाती. आरोप है कि इस लोन के बदले वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने ICICI बैंक की उस समय की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को आर्थिक लाभ पहुंचाया था. लोन के बदले वेणुगोपाल धूत ने अपनी दो कंपनियां चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को मात्र नौ लाख रुपए में बेच दी थीं. ये भी आरोप है कि चंदा कोचर ने वेणुगोपाल धूत को बैंक लोन दिलाने में मदद की. जनवरी,2019 में FIR इन्हीं आरोपों के बाद मार्च, 2018 में इन सभी के खिलाफ प्राथमिक जांच का केस दर्ज किया गया. फिर जनवरी, 2019 में CBI ने चंदा, दीपक और वेणुगोपाल के ख़िलाफ FIR दर्ज की. एफआईआर दर्ज होने के बाद CBI ने वेणुगोपाल धूत और दीपक कोचर के दफ़्तरों और दूसरे ठिकानों पर छापेमारी की. CBI ने 24 जनवरी, 2018 को वीडियोकॉन के मुंबई स्थित हेड ऑफिस और औरंगाबाद ऑफिस में छापा मारा था. इसके अलावा दीपक कोचर से जुड़ी अन्य कंपनियों के ऑफिसों में भी जांच पड़ताल की गई थी. इसके करीब डेढ़ साल बाद दीपक कोचर को गिरफ्तार कर लिया गया.

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